प्रदीप के बोरवेल में गिरने पर प्रशासन पर उठ रहे ये 5 महत्वपूर्ण सवाल

यह पहली घटना नहीं है जब कोई बच्चा बोरवेल या सरकार द्वारा खुदाई कराए गए किसी गड्ढे में गिरा है. ऐसी कई मामले पहले भी सामने आएं हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन खुदाई तो करवा देती है, लेकिन स्थानीय लोगों की सुरक्षा हेतु उसे बंद क्यों नहीं करवाया जाता.

मथुरा: आए दिन देश के किसी न किसी कोने से ऐसी खबरें सामने आती हैं, जहां पर प्रशासन की लापरवाही के कारण खुले पड़े बोरवेल में कोई न कोई बच्चा गिर जाता है. कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में 5 साल की एक बच्ची बोरवेल में गिर गई थी और अब ताजा मामला भी उत्तर प्रदेश से ही सामने आया, जहां पर 5 साल का एक बच्चा 9 घंटे तक 100 फीट गहरे बोरवेल में फंसा रहा.

यह मामला मथुरा क्षेत्र के शेरगढ़ गाव का है. बच्चे को बचाने के लिए जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची. एक पाइप के जरिए बच्चे को ऑक्सीजन मुहैया कराया गया तो वहीं बोरवेल के बगल में जेसीबी से खुदाई की गई. इसके बाद देर रात 12 बजे बच्चे को एक झूले के माध्यम से बाहर निकाला गया और उसे अस्पताल पहुंचाया गया.

यह पहली घटना नहीं है जब कोई बच्चा बोरवेल या सरकार द्वारा खुदाई कराए गए किसी गड्ढे में गिरा है. ऐसी कई मामले पहले भी सामने आएं हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन खुदाई तो करवा देती है, लेकिन स्थानीय लोगों की सुरक्षा हेतु उसे बंद क्यों नहीं करवाया जाता.

इस मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन पर कई सवाल खड़े होते हैं, जिनमें ये पांच सवाल महत्वपूर्ण हैं.

1. बोरवेल की खुदाई में नियमों की अनदेखी क्यों हुई?

2. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को कौन लागू कराएगा?

3.अधिकारियों ने क्या कभी बोरवेल की जांच की?

4.लापरवाही करने वाले अफसरों पर क्या कार्रवाई होगी?

5.बोरवेल के ठेकेदार और बोरवेल मालिक पर क्या कार्रवाई होगी?