मौत से भिड़त और ज़िंदगी ने जीत ली जंग, पढ़िए 5 साल के प्रदीप की बोरवेल से निकलने की पूरी कहानी

शनिवार शाम करीब चार बजे, मथुरा के इस छोटे-से गांव अगरयाला में सबकुछ ठीक चल रहा था. तभी अचानक एक परिवार की सांसें अटक गईं. पूरा गांव सदमे में आ गया.

मथुरा में बोरवेल में गिरे बच्चे प्रदीप को लगभग 9 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. निश्चित तौर पर एनडीआरएफ की टीम इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई की पात्र है. हालांकि इससे पहले जो कुछ हुआ वो दिल दहला देने वाला है. आइए सिलसिलेवार तरीके से पूरी घटना को समझते हैं.

शनिवार शाम करीब चार बजे, मथुरा के इस छोटे-से गांव अगरयाला में सबकुछ ठीक चल रहा था. तभी अचानक एक परिवार की सांसें अटक गईं. पूरा गांव सदमे में आ गया. आप सोचेंगे ऐसा क्या हुआ? कुछ लोगों की जानलेवा लापरवाही की वजह से फिर से एक मासूम की जान पर बन आई है.

5 साल का प्रदीप 100 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरा और नाउम्मीद हो गई एक मां, हारने लगा एक पिता.

स्थानीय लोगों ने बताया, ‘प्रदीप पास में ही खेल रहा था, अचानक उसके बोरवेल में गिरने का पता चला. 20 मिनट बाद ही पुलिस को घटना की जानकारी दे दी गई. प्रशासन के अधिकारी करीब 1 घंटे बाद मौके पर पहुंचे, जबकि रात 8 बजे के बाद एनडीआरएफ की टीम आई.’

एनडीआरएफ की टीम ने पहुंचते ही हालात का जायजा लेने के लिए बोरवेल के अंदर सीसीटीवी कैमरा डाला, पता चला कि प्रदीप सुरक्षित है. जिसके बाद प्रदीप तक ऑक्सीजन पहुंचाया गया. उसे पीने के लिए पानी भी भेजा गया. इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने नीचे रस्सी लटकाई जिसे पकड़कर प्रदीप बाहर आ गया.

हालांकि ये इतना आसान भी नहीं था, बाहर निकालते समय बच्चे को चोट लगने का ख़तरा बना हुआ था इसलिए एनडीआरएफ की टीम सीसीटीवी के ज़रिए लगातार बच्चे पर नज़र बनाए हुए थी. आखिरकार प्रदीप बाहर आया तो जैसे पूरे परिवार और गांव की जान लौट आई.

देश में कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें न किसी की जान की परवाह है न ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की. शुक्र है कि अपने देश में एनडीआरएफ की काबिल टीम भी है. एनडीआरएफ के लोग एक बार फिर देवदूत बनकर आए और प्रदीप को करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद निकाल लिया.