40 फीट गहरे बोरवेल में गिरी बच्ची को निकाले बिना वापस लौटा फर्रुखाबाद प्रशासन

मामले को तूल पकड़ता देख डीएम ने कहा कि घटनास्थल के आसपास के लोगों ने अपने मकान के धंसने के डर से इस ऑपरेशन का विरोध किया.

फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश में प्रशासन की लापरवाही का एक बहुत बड़ा मामला सामने आया है. यहां पांच साल की एक बच्ची बोरवेल में गिर गई थी, जिसे प्रशासन निकाल नहीं सका, तो एनडीआरएफ की टीम, सेना और जिला प्रशासन मध्य रात्रि में बच्ची को बोरवेल में ही छोड़कर वापस चला गया. यह मामला सूबे के फर्रुखाबाद का है.

इस मामले पर जब फर्रुखाबाद डीएम मोनिका रानी से बात की गई तो उनका कहना था कि मिट्टी धंसने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में समस्या आ रही थी. रेस्क्यू ऑपरेशन टीम बच्ची को ट्रेस नहीं कर पाई थी. पहले 26 फुट पर बच्ची के होने का अंदाजा लगया गया था फिर 40 फुट के आसपास का अंदाजा लगाया गया.

वहीं डीएम ने यह भी कहा कि घटनास्थल के आसपास के लोगों ने अपने मकान के धंसने के डर से इस ऑपरेशन का विरोध किया. इसके लिए करीब 10 मकान तोड़ने पड़ रहे थे और इस पूरी प्रक्रिया में 3 दिन लगते इसलिए ही हमने इस ऑपरेशन को रोकने का फैसला लिया.

डीएम की बात से असहमति जताते हुए बच्ची के भाई आदर्श ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि प्रधान लेखपाल और गांव वालों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन रोका. आदर्श ने कहा, “मुझसे किसी ने बात नहीं की, मेरे मना करने के बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन को रोक दिया गया और मुझे जेल में डालने की धमकी भी दी गई.” आदर्श का कहना है कि “मुझे मेरी बहन चाहिए चाहे वो जिंदा हो या मर गई हो.”