सहारनपुर में शिवालिक के जंगल से मिला 50 लाख साल पुराना हाथी का जीवाश्म

राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji national park) की सीमा वाले सहारनपुर डिवीजन में शिवालिक रेंज (Sivalik Range )के 33,000 हेक्टेयर के वनों में एक समय बाघों का बसेरा होता था. मगर अवैध शिकार और मानव हस्तक्षेप के कारण क्षेत्र से बाघ गायब हो गए.

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) में शिवालिक (Sivalik) के जंगल में एक नया बाघ अभ्यारण्य (Tiger Reserve) बनाने के लिए कैमरा-ट्रैप स्टडी के दौरान हाथी का जीवाश्म (fossil) मिला है. बताया जा रहा है कि यह करीब 50 लाख साल पुराना है, जोकि दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्मों में से एक है.

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सहारनपुर डिवीजन के कमिश्नर संजय कुमार ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान इस तरह की दुर्लभ खोज एक सुखद आश्चर्य है. हम और अधिक खोज के लिए वन गुर्जरों की मदद भी ले रहे हैं.” हाथियों के दुर्लभ जीवाश्म से पता चलता है कि हिमालय की तलहटी, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सुंदर हरे-भरे तराई क्षेत्रों में कभी विशालकाय हाथियों, जिराफों, घोड़ों और दरियाई घोड़ों का बसेरा होता था.

मिल सकते हैं कुछ और दुर्लभ जानवरों के जीवाश्म

संजय कुमार ने कहा, “हो सकता है कि स्टडी के बीच हम कुछ और दुर्लभ जानवरों के जीवाश्मों की खोज करने में सफल हो जाएं. हिमालयी भूविज्ञान के प्रतिष्ठित वाडिया इंस्टीट्यूट के शीर्ष वैज्ञानिक इस कोशिश में तकनीकी सहायता कर रहे हैं.” हाथियों के सबसे पुराने ‘निवास स्थान’ का पता तब चला, जब सरकार ने तराई क्षेत्र में बाघों के लिए एक नया रिजर्व बनाने की सोची.

राजाजी नेशनल पार्क की सीमा वाले सहारनपुर डिवीजन में शिवालिक रेंज के 33,000 हेक्टेयर के वनों में एक समय बाघों का बसेरा होता था. मगर अवैध शिकार और मानव हस्तक्षेप के कारण क्षेत्र से बाघ गायब हो गए. नए कमिश्नर संजय कुमार ने इस वन परिक्षेत्र में एक नया बाघ अभ्यारण्य विकसित करने के लिए एक कैमरा ट्रैप अध्ययन की शुरुआत की.

शिवालिक रेंज में की गयी कैमरा ट्रैप स्टडी

वन्यजीवों में रुचि रखने वाले संजय कुमार ने कहा, जिम कॉर्बेट और पूर्वी राजाजी पार्क में बाघों की बढ़ती आबादी धीरे-धीरे पश्चिम की ओर पलायन कर रही है, जिसमें शिवालिक के जंगल भी शामिल हैं. इसलिए हमने यहां वन्यजीवों की स्टडी करने के बारे में सोचा. शिवालिक रेंज में कैमरा ट्रैप स्टडी विश्व वन्यजीव कोष (WWF) के विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की मदद से किया गया.

जिसके तहत कई जगहों पर कैमरा ट्रैप लगाकर वन्य जीवों को कैमरे में कैद किया. साथ ही इस क्षेत्र में सर्वे भी किया गया, जिस दौरान हाथी का जीवाश्म भी मिला. मुख्य वन संरक्षक वीके जैन और उनकी टीम ने बाद में इस जीवाश्म का नमूना देहरादून स्थित वाडिया संस्थान में परीक्षण के लिए भेजा. संजय कुमार ने कहा, “वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस हाथी के जीवाश्म की उम्र 50 लाख से 80 लाख वर्ष तक पुरानी होने की बात कही है.”

खोजे गए जीवाश्म क्षेत्र में हाथी का यह पहला नमूना है

वन अधिकारियों और WWF की एक टीम ने दावा किया कि खोजे गए जीवाश्म क्षेत्र में हाथी का यह पहला नमूना है. इस परीक्षण में डॉ. आर. के. सहगल और डॉ. ए. सी. नंदा भी शामिल हैं, जिन्होंने हाथी के जीवाश्मों से संबंधित अध्ययनों पर बड़े पैमाने पर काम किया है. उन्होंने कहा कि यह नमूने 50 से 80 लाख वर्ष पुराने हैं, जो कि क्षेत्र में स्टेगोडॉन की उपस्थिति का संकेत देते हैं.

इससे पता चलता है कि कभी इस क्षेत्र में विशालकाय जानवरों का बसेरा होता था और हिमालय की तलहटी का यह क्षेत्र घने जंगलों से ढका हुआ था, जहां कई सारी नदियां भी बहती होंगी.

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