Be like Yogi not Chinmayanand, योगी बनिए चिन्मयानंद नहीं, संत समाज ने किसे दी सलाह?
Be like Yogi not Chinmayanand, योगी बनिए चिन्मयानंद नहीं, संत समाज ने किसे दी सलाह?

योगी बनिए चिन्मयानंद नहीं, संत समाज ने किसे दी सलाह?

हालांकि अंतिम फैसला लेने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय दिया जाएगा.
Be like Yogi not Chinmayanand, योगी बनिए चिन्मयानंद नहीं, संत समाज ने किसे दी सलाह?

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद साधुओं और संन्यासियों के ‘आचार और व्यवहार’ पर चर्चा के लिए अगले महीने एक बैठक करने वाली है. इस बैठक में ‘ध्यान भटकने वाली उम्र’ में परिषद के सदस्यों के व्यवहार को लेकर चर्चा होगी. ज़ाहिर है यह बैठक वरिष्ठ बीजेपी नेता स्वामी चिन्मयानंद पर दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तारी के बाद किया गया है.

इतना ही नहीं इस घटना को लेकर संत समाज ने स्वामी चिन्मयानंद से दूरी बनाने का फैसला किया है. उन्हें संत समाज से बाहर करने का ऐलान 10 अक्टूबर को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में किया जाएगा. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने कहा कि हालांकि अंतिम फैसला लेने से पहले अखाड़ा परिषद उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय देगा.

पंचायती अखाड़ा निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि 10 अक्टूबर को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक होगी. जहां पर फ़ैसला किया जाएगा कि ‘यह केस कितना सच हैै?’ उन्होंने आगे कहा कि हमलोगों का आचरण भक्तों (पुरुष और महिला) के साथ बेहतर होना चाहिए. चिन्मयानंद केस जैसे हालात हमारे समाज के लिए ठीक नहीं है. यह हमारे माननेवालों के मन में अविश्वास को बढ़ावा देने वाला है. मैं अपने सभी अखाड़ा परिषद के सदस्यों से कहना चाहता हूं कि वो योगी आदित्यानाथ जैसे बनें.  जो मुख्यमंत्री रहते हुए भी महंत के सारे दायित्व निभा रहे हैं और सादा साफ-सुथरा जीवन जी रहे हैं.’

नरेंद्र गिरि ने कहा, ‘हमने चिन्मयानंद के अखाड़े के साथ जुड़ने के फैसले के लिए 10 अक्टूबर को एक आपातकालीन बैठक बुलाई है. हम अंतिम निर्णय लेने से पहले उन्हें बैठक में अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय देंगे.’

मठ के आदेशों का शीर्ष निकाय जल्द ही उन्हें हरिद्वार स्थित महानिर्वाणी अखाड़े से बहिष्कृत करने की घोषणा करेगा. हरिद्वार में होने वाली बैठक में सभी 13 अखाड़ों के साधु-संत मौजूद रहेंगे.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा, ‘चिन्मयानंद संत परंपरा से आते हैं. वह महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर भी हैं, लेकिन उनका कृत्य बेहद शर्मनाक है. इससे साधु-संतों की बदनामी हो रही है. कानून के मुताबिक उन्हें सजा तो उन्हें भुगतनी ही पड़ेगी. हालांकि, जब तक अदालत का फैसला नहीं आता और चिन्मयानंद निर्दोष साबित नहीं होते, तब तक वह संत समाज से बहिष्कृत रहेंगे.’

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