‘बहनजी’ का भाई कैसे बन गया क्लर्क से करोड़पति, जानें पूरी कहानी

कभी नोएडा में क्लर्क रहे आनंद कुमार ने अपनी बहन मायावती के शासनकाल में कैसे धनकुबेर बनने का सफर तय किया, जानिए.

बहुजन समाज पार्टी ना चुनाव जीत रही है और ना ही संगठन की गिरती दीवार संभाल पा रही है. केंद्र और सूबे में सत्तारूढ़ दलों से उसकी दूरी बरकरार है. नए बने सहयोगी भी छिटक गए हैं. ऐसे में माया सिवाय कसमसाने के कुछ नहीं कर पा रही हैं. इतने खराब वक्त से बसपा शायद ही पहले गुज़री होगी. सबसे बुरा तो ये है कि आनेवाले दिनों भी राहत की कोई किरण नहीं दिख रही है.

खराब दिनों का आलम ये है कि मायावती के बाद अब उनके सगे छोटे भाई पर भी कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है. आयकर विभाग ने 400 करोड़ रुपए के उस प्लॉट को जब्त कर किया है जो नोएडा में है. 28,328 स्क्वॉयर मीटर ज़मीन के टुकड़े के मालिक आनंद और उनकी पत्नी विचित्रलता बताए जा रहे हैं लेकिन सभी जानते हैं कि उन पर ऐसी कार्रवाई कोई नई बात नहीं है. आयकर विभाग लगातार उनकी पड़ताल में लगा ही रहा है, लेकिन मायावती इस सबसे बौखला गई हैं. ज़ाहिर है, वो बौखलाएंगी भी.

mayawati, ‘बहनजी’ का भाई कैसे बन गया क्लर्क से करोड़पति, जानें पूरी कहानी
आकाश आनंद को मायावती का उत्तराधिकारी माना जा रहा है

आनंद कुमार उनके भाई होने के अलावा बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं. वो उन आकाश आनंद के पिता भी हैं जिन्हें मायावती ने हाल ही में राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर बनाया है और जिन्हें उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा है. दरअसल आनंद की ताकत का अंदाज़ा आप उनके प्रोफाइल से लगा नहीं सकते. उनका गुण और उनकी शक्ति ही ये है कि वो चुप रहकर अपना काम करते हैं. काफी समय तक तो आम लोगों को उनका नाम भी नहीं मालूम था, लेकिन एक के बाद एक सुर्खियों में आनंद का नाम आता रहा और वो वक्त के साथ जाना-पहचाना नाम बन गए.

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आज करीब 1300 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक आनंद कुमार कभी नोएडा प्राधिकरण के आम क्लर्क थे. साल 2007 मे उनकी संपत्ति साढ़े सात करोड़ रुपए थी लेकिन फिर वो दौर आया जब उनकी बहन यूपी की मुख्यमंत्री बन गई. अगले सात सालों में उन्होंने 18,000 फीसदी लाभ कमाया. साल 2011 में बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने आनंद कुमार की 26 फर्ज़ी कंपनियों की लिस्ट सार्वजनिक कर दी. 2014 तक तो पता चला कि 45 से ज़्यादा कंपनियां खड़ी कर ली गई हैं. तब ये खुलकर सामने आया कि किस तरह फर्जी कंपनियों के नाम पर करोड़ों का लोन लेने और पैसे को रियल एस्टेट में निवेश करके मुनाफा कमाने का खेल चल रहा है. उनके खिलाफ आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच शुरू कर दी.

आयकर विभाग को अपनी जांच में पता चला कि 2007 से 2012 तक जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं, तब पांच कंपनियों – फैक्टर टेक्नोलॉजीज, होटल लाइब्रेरी, साची प्रॉपर्टीज, दीया रियल्टर्स और ईशा प्रॉपर्टीज के जरिए अधिकतर पैसा इकट्ठा किया गया. आनंद कुमार तब भी चर्चा में आए थे जब नोटबंदी के बाद उनके खाते में 1.43 करोड़ रुपए जमा हुए थे.