टूट सकता है SP-BSP महागठबंधन, मायावती ने कहा- अकेले ही लड़ेंगे ग्यारह सीटों पर उपचुनाव

इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा से गठबंधन के बावजूद बसपा मात्र 10 सीटें ही जीत सकी.

लखनऊ: लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में समीक्षा का दौर शुरू हो चुका है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को गठबंधन से अलग होने के संकेत दिए.

लखनऊ में बीएसपी की एक बैठक में मायावती ने इस आशय के संकेत दिए. मायावती ने कहा कि यादव वोट बसपा को नहीं मिला. यहां तक कि गठबंधन को भी पूरा नहीं मिला. उन्होंने साफ़ किया कि यदि वोट मिला होता तो समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपने घर की सीटें ना हारते. इस बैठक में उन्होंने यह भी ऐलान कि बसपा ग्यारह सीटों पर अकेले ही उपचुनाव में उतरेगी.

कहां होंगे उपचुनाव
यूपी के 11 विधायकों ने इस बार लोकसभा का चुनाव लड़कर जीता है. कानूनन कोई भी व्यक्ति संसद या विधासनभा में से किसी एक का ही सदस्य रह सकता है. सभी 11 विधायक अब संसद के सदस्य होंगे और उनकी जगह खाली होने की वजह से चुनाव कराया जाएगा ताकि विधानसभा में नए सदस्य जा सकें. इन 11 लोगों में लखनऊ कैंट से बीजेपी विधायक रीता बहुगुणा जोशी, टुंडला से बीजेपी विधायक एसपी सिंह बघेल, गोविंदनगर से बीजेपी विधायक सत्यदेव पचौरी, प्रतापगढ़ से अपना दल विधायक संगम लाल गुप्ता, गंगोह से बीजेपी विधायक प्रदीप कुमार, मानिकपुर से बीजेपी आरके पटेल, जैदपुर से बीजेपी विधायक उपेंद्र रावत, बलहा से बीजेपी विधायक अक्षयवर लाल गोंड, इगलास से बीजेपी विधायक राजवीर सिंह शामिल हैं.

इसके अलावा रामपुर सदर से सपा विधायक आजम खां और जलालपुर से बसपा विधायक रितेश पांडेय भी सांसद बने हैं. सभी 11 सीटों पर छह महीने के अंदर उपचुनाव होने हैं.

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शिवपाल पर साधा निशाना
बसपा सुप्रीमो ने आज बीएसपी की बैठक में समाजवादी पार्टी से अलग हो अपना दल बनाकर चुनाव लड़ने वाले शिवपाल यादव का नाम तीन बार लिया. उन्होंने कहा कि शिवपाल ने कई जगहों पर यादव वोट को बीजेपी के लिए ट्रांसफ़र करा दिया. उन्होंने सीधे सीधे शिवपाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो बीजेपी से मिले हुए हैं.

अब तक इतने हुए बेदखल
मायावती लोकसभा चुनाव परिणाम से नाखुश हैं, इसीलिए उन्होंने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी. मायावती ने छह राज्यों के लोकसभा चुनाव प्रभारियों को हटा दिया है. इसके साथ ही उन्होंने तीन राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को भी पद से बेदखल कर दिया है. मायावती ने उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात और ओडिशा के लोकसभा चुनाव प्रभारियों को हटाया है. इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली व मध्य प्रदेश के बसपा अध्यक्षों को भी पद से बेदखल कर दिया है.

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रडार पर ये-ये
बसपा ने इस बार के लोकसभा चुनाव में 2014 के मुकाबले भले ही बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10 सीटें जीती हैं, लेकिन अपेक्षा के मुताबिक गठबंधन को कम सीटें मिली हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मायावती के रडार पर प्रदेश के 40 समन्वयक और जोनल समन्वयक हैं, जिन पर गाज गिर सकती है. बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में बसपा को अनुमान से बहुत कम सीटें मिली हैं. इसके चलते मायावती काफी नाराज हैं.

गिरता जा रहा है ग्राफ
गौरतलब है कि 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से बसपा का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है. हालत यह हो गई कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा खाता भी नहीं खोल सकी थी. इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा महज 19 सीटें ही जीत सकी थी.

बसपा अब, लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी काम करने वालों के खिलाफ एक्शन मोड में आ गई है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है.