बीएचयू के प्रोफेसर फिरोज खान के समर्थन में आया आरएसएस

संघ का मानना है कि फिरोज खान का विरोध गलत है. संस्कृत भाषा का लाभ संपूर्ण विश्व के सभी लोगों को मिलना चाहिए.
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वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में सहायक प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर मचे घमासान के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रोफेसर खान के समर्थन में उतर आया है.

काशी में आरएसएस के विभाग संघ चालक डॉ. जय प्रकाश लाल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक बैठक हुई, जिसमें डॉ. फिरोज खान के संस्कृत विद्या एवं धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में नियुक्ति के संदर्भ में चल रहे विवाद से संबंधित सभी पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया.

संघ का मानना है कि डॉ. फिरोज खान का विरोध गलत है. संघ उससे सहमत नहीं है और संघ का स्पष्ट और दृढ़ मत है कि संस्कृत साहित्य को समर्पित और श्रद्धा भाव से उसे पढ़ाने वाले, वैधानिक चयन प्रक्रिया से नियुक्त किसी भी व्यक्ति का सांप्रदायिक आधार पर विरोध कानून के खिलाफ और सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाला है. संघ इस वृत्ति, प्रवृत्ति का विरोध करता है. यह संस्कृत भाषा और साहित्य का प्रसार-प्रभाव है, जिसका लाभ संपूर्ण विश्व के सभी को मिलना चाहिए.”

दूसरी ओर, बीएचयू में विश्‍व विद् वि प्रशासन की ओर से धरना खत्म होने के दावे को झुठलाते हुए छात्रों ने प्रदर्शन के 16वें दिन शुक्रवार को अपना धरना जारी रखा.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्र पिछले 16 दिनों से कुलपति आवास के बाहर अपने संकाय में हुए गैर हिंदू अध्यापक की नियुक्ति के खिलाफ और नियुक्ति रद्द करने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं.

हालांकि, गुरुवार देर शाम कुलपति आवास में धरनारत छात्रों के दल ने कुलपति से मुलाकात की थी, मगर किसी नतीजे पर न पहुंचने की वजह से शुक्रवार को भी छात्रों का धरना जारी है.
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं बीएचयू के चांसलर न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने नियुक्ति को सही बताया है.

एक अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर आज महामना होते तो डॉ. फिरोज खान के नाम पर पहले मुहर लगाते. उन्होंने संकाय के शिक्षकों को छात्रों को समझाने का सुझाव देते हुए कहा कि अगर शिक्षक समझाएंगे तो छात्र जरूर समझेंगे.

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