‘राष्‍ट्र ऋषि’ नरेंद्र मोदी? घोषणा के हफ्ते भर बाद काशी परिषद में फूट

काशी विद्वत परिषद के कई लोग इस ऐलान की ख़िलाफ़त में उतर आए हैं.
राष्‍ट्र ऋषि, ‘राष्‍ट्र ऋषि’ नरेंद्र मोदी? घोषणा के हफ्ते भर बाद काशी परिषद में फूट

नई दिल्‍ली: करीब एक सप्‍ताह पहले वाराणसी की काशी विद्वत परिषद के कुछ सदस्‍यों ने एक घोषणा की थी. अध्यक्ष पं. रामयत्न शुक्ल के आवास पर हुई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में महामंत्री डा. रामनारायण द्विवेदी ने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राष्‍ट्र ऋषि’ की उपाधि प्रदान की जाएगी. परिषद ने दो पन्‍नों का एक प्रोफार्मा भी प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा है. अब इस संस्‍था के ही कई लोग इस ऐलान की ख़िलाफ़त में उतर आए हैं.

परिषद के महासचिव शिवाजी उपाध्‍याय ने सोमवार (3 जून) को रिपोर्टर्स से कहा कि “यह सत्‍ता के चापलूसों का काम है. उन्‍होंने राजनैतिक रूप से तटस्‍थ सदस्‍यों से सलाह-मशविरा किए बिना ही प्रधानमंत्री को यह उपाधि देने का निर्णय कर लिया.”

काशी विद्वत परिषद के सदस्‍य ऋषि द्विवेदी ने द टेलीग्राफ से बातचीत में कहा,”ऐसा कोई निर्णय महासमिति की बैठक में ही लिया जा सकता है. 24 सदस्‍यीय परिषद के भीतर तीन-चौथाई बहुमत से निर्णय होना चाहिए. ऐसी कोई बैठक नहीं बुलाई गई. दो लोग साथ बैठे और मीडिया में ऐलान कर दिया कि ऐसा करेंगे.”

रामदेव ने मोदी को कहा था ‘राष्‍ट्र ऋषि’

ऋ‍षितयों को चार उपाधियों से अलंकृत किया जाता है- राजर्षि, महर्षि, ब्रह्मर्षि और देवर्षि. ‘राष्‍ट्र ऋषि’ शब्‍द का इस्‍तेमाल बाबा रामदेव भी कर चुके हैं. दो साल पहले हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ के रिसर्च इंस्‍टीट्यूट का उद्घाटन करने पहुंचे पीएम मोदी को रामदेव ने ‘राष्‍ट्र ऋषि’ बताया था.

इस परिषद ने जनवरी 1990 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री विश्‍वनाथ प्रताप सिंह को ‘ब्रहर्षि’ की उपाधि से सम्‍मानित किया था. मगर अगस्‍त में उन्‍होंने मंडल कमीशन की सिफारिशें मानीं तो उपाधि वापस ले ली गई.

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