VIDEO: मुझे हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ, ईश्वर के लिखे लेख को भी मैं मिटा सकता हूं- निरहुआ

निरहुआ ने कहा कि वो आजमगढ़ से जीत के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं और आजमगढ़ की जनता पूरी तरह से उनके साथ है.

आजमगढ़: सूबे की हाईप्रोफाइल सीट बन चुकी आजमगढ़ संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव (निरहुवा) ने टीवी9 भारतवर्ष से एक्सक्लूसिव बातचीत की. निरहुआ ने कहा कि वो आजमगढ़ से जीत के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं और आजमगढ़ की जनता पूरी तरह से उनके साथ है.

दिनेश लाल यादव (निरहुआ) ने कहा कि आजमगढ़ से जीत के लिए वो पूरी तरह से आश्वस्त हैं. टीवी9 भारतवर्ष के स्टूडियो से जब निरहुआ से सवाल किया गया है कि अगर वो चुनाव हार गए तो क्या वो आजमगढ़ दोबारा जाएंगे या फिर फिल्मी दुनिया में चले जाएंगे. इस सवाल के जवाब में निरहुआ ने प्रख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता स्वातंत्र्य गर्व उनका जो नर फांको में प्राण गंवाते हैं. इस कविता के बीच की दो लाईनें स्वातंत्र्य भाव नर का अदम्य , वह जो चाहे कर सकता है, शासन की कौन बिसात, पाँव विधि की लिपि पर धर सकता है… गुनगुनाई और फिर कहा,  ‘हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ. वो ईश्वर के लिखे लेख को भी मिटा सकते हैं.’

अजीत अंजुम का सवाल- निरहुआ आप फिल्म कलाकार हैं, काफी पॉपुलर हैं, आपका बहुत बड़ा दर्शक वर्ग है. आप मुंबई रहते हैं क्यों आपको वहां के मतदाता अखिलेश यादव के मुकाबले वोट दें?

निरहुआ का जवाब- इसलिए वो मुझको वोट दे रहे हैं, क्योंकि उनको पता है कि पिछली बार उन्होंने श्री मुलायम सिंह यादव जी को अपना सांसद चुना था. वो अपना प्रमाण पत्र भी लेने आजमगढ़ नहीं आए. निरहुआ जब राजनीति में नहीं था फिर भी आठ फिल्में यहीं आकर बनाया. उनको पता है कि इसका लगाव आजमगढ़ से है और ये आजमगढ़ छोड़कर नहीं जाएगा.

अजीत अंजुम का सवाल- फिर तो मतदाता ये भी सोचेगा कि आप फिल्म बनाने आए. लेकिन जनता के लिए काम करना. बिजली, सड़क, पानी, विकास भी. काफी खून पसीना बहाना पड़ता है. एक फिल्म कलाकार कैमरों के सामने शूटिंग तो कर सकता है.

निरहुआ का जवाब- वही तो जनता देख रही है, वो जनता देख रही है कि जो लड़का रहता था फिल्म दुनिया में वो गांव-गांव आकर धूल फांक रहा है और घूम रहा है. एक आदमी जो यहां से जीता हुआ है वो आया ही नहीं. जिसके पास वोट मांगने का टाइम नहीं है, वो जीतने के बाद क्या आएगा. ये सब समझ रही है जनता.

अजीत अंजुम का सवाल- लोग ये भी कह रहे हैं कि यहां से तीन बार सांसद रहे रमाकांत यादव का टिकट काटकर आपको उतारा गया है. ये भी कहीं अंडर करंट हो सकता है नाराजगी हो सकती हैं?

निरहुआ का जवाब- बिल्कुल नहीं, कोई नाराजगी नहीं है. रमाकांत यादव जी के बेटे मेरे साथ हैं, और वो मेरा प्रचार कर रहे हैं. रमाकांत यादव भी उसी सोच के हैं जिस सोच के पहले के लोग थे कि भाई ये यादव है इसी के साथ रहना है. अब लोगों ने समझ लिया है ये लोग हमको जाति में बांधकर हमारा दुरुपयोग कर रहे हैं. निरहुआ आया है और इस निरहुआ को लोग निरहुआ हिंदुस्तानी के रुप में जानते हैं. और आज मैंने पूरे आजमगढ़ के लोगों को निरहुआ हिंदुस्तानी की तरह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है.

जय शंकर गुप्त का सवाल- निरहुआ जी ये बताइए कि रमाकांत यादव ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है और वो कांग्रेस के उम्मीदवार भी हैं और दूसरा ये कि आपके ही परिवार के बहुत मशहूर भोजपुरी गायक हैं विजय लाल यादव वो आपके खिलाफ क्यों घूम रहे हैं.

निरहुआ का जवाब- हां, देखिए ये है लोकतंत्र. इसी को कहते हैं लोकतंत्र. मेरा बड़ा भाई अगर उसकी ये सोच हैं कि इस देश को नरेंद्र मोदी जी से बढ़िया राहुल गांधी जी चलाएंगे या गठबंधन का कोई नेता चलाएगा तो मैं उनको पूरी आजादी देता हूं कि भईया आप उनका प्रचार कीजिए. मेरे विरोध में प्रचार कीजिए. लेकिन मुझे लगता है कि इस देश को नरेंद्र मोदी जी ने बेहतर चलाया है और बढ़िया चलाएंगे तो मैं नरेंद्र मोदी जी के साथ खड़ा हूं. हर आदमी की अपनी एक स्वतंत्र राय होनी चाहिए इसी को कहते हैं लोकतंत्र.

हेमंत शर्मा का सवाल- निरहुआ जी आजमगढ़ आ गए हैं. आजमगढ़ का चुनाव रंगीन हो गया है. चौराहों पर रंगारंग कार्यक्रम हो रहे हैं. लोगों को बड़ा आनंद हैं. पहले वहां बाहुबली लोग खड़े होते थे. मेरी भी अपेक्षा है कि निरहुआ जी हम लोगों को भी कुछ सुनाएंगे.

निरहुआ का जवाब- मैं सुनाऊंगा लेकिन उससे पहले सुनिए कि निरहुआ आजमगढ़ आया है तो रंगारंग कार्यक्रम नहीं हो रहा है. बहुत गंभीर मुद्दे पर बात कर रहा है निरहुआ. निरहुआ यहां लोगों को ये नहीं कहता है कि अगर निरहुआ की फिल्म देखते हो तो निरहुआ को वोट करो. मैं यहां लोगों को ये बताता हूं कि कल तक तुम अखिलेश जी की भक्ति करते थे, आज अगर दिनेश की भक्ति करोगे तो भी गलत हैं. तुम्हारी अपनी सोच क्या है? तुम्हारी अपनी राय क्या है? ये बताता हूं लोगों को. और अगर अखिलेश भईया में दम है, समाजवादी पार्टी के लोगों में दम है तो निरहुआ की तरह बोलकर दिखाइए. मैं जनता को ये बोलता हूं कि आपको लगता है कि नरेंद्र मोदी से बढ़िया गठबंधन के लोग इस देश को चलाएंगे तो सब लोग जाकर अखिलेश जी को जिता दीजिए. लेकिन अगर आपको लगता है कि कोई भी नरेंद्र मोदी से अच्छा देश नहीं चला सकता तो सिर्फ और सिर्फ कमल का बटन दबाइए. हिम्मत है तो बोलकर दिखाइए अखिलेश यादव जी. मेरे बड़े भईया.

अजीत अंजुम का सवाल- जाते-जाते अपने अंदाज में अपने मतदाताओं से अपील, एक कलाकार की तरफ से

निरहुआ का जवाब- मैं एक ही अपील करता हूं जनता से. सोच के करिहा मतदनवा आजमगढ़ के लोग, आजमगढ़ के लोग सुनला पूरे देश के लोग नहीं तो दिसवा बेंच दीहें बेईमनवा, सुना देश के लोग

अजीत अंजुम का सवाल- एक आखिरी सवाल निरहुआ. अगर आप हार गए तो क्या आप पांच साल दिखेंगे या फिर फिल्मों में व्यस्त हो जाएंगे. फिर 2024 में कहीं से टिकट मिला तो दिखेंगे.

निरहुआ का जवाब- सबसे पहले तो आपसे मैं ये बताता हूं कि मुझे हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ. क्यों कि मैं स्वतंत्र आदमी हूं. मेरी विचारधारा स्वतंत्र है. किसी का गुलाम नहीं हूं. स्वातंत्र्य भाव नर का अदम्य , वह जो चाहे कर सकता है, शासन की कौन बिसात, पाँव विधि की लिपि पर धर सकता है... गुनगुनाई और फिर कहा,  ‘हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ. वो ईश्वर के लिखे लेख को भी हटा सकता हूं, मिटा सकता हूं. अगर मैं अपनी सोच रखता हूं, विचार रखता हूं. मैं यहां किसी के पीछे घूमने वाला इंसान नहीं हूं. ये भूल जाइए कि मुझे यहां कोई हरा पाएगा.

अजीत अंजुम का सवाल- इससे लगता नहीं बहुत अहंकार हैं आपमें. अहंकार तो रावण का भी खत्म हुआ था. आप कहते हैं कि मुझे हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ. आप कहते हैं कि ईश्वर के लिखे लेख को भी मैं मिटा सकता हूं. ये तो बहुत बड़ा अहंकार है. मुझे लगता है कि आप पृथ्वी लोक के अकेला नेता है जो इस तरह के दावे कर रहा है.

जय शंकर गुप्त का सवाल- इस तरह तो मोदी जी भी दावे नहीं करते भाई.

निरहुआ का जवाब- ये अहंकार नहीं है. मोदी जी नहीं बोलते मैं बोल रहा हूं. सुनिए, मैं आपको सुना रहा हूं. मैं बोल रहा हूं सुनिए आप. मैं ये कह रहा हूं कि अगर मैं सच के साथ हूं धर्म के साथ हूं तो ये असत्य लोग जो देश को लूट रहे हैं ये मुझे नहीं हरा पाएंगे. क्यों कि मैं सच के साथ हूं.

अजीत अंजुम का सवाल- लेकिन निरहुआ आप कह रहे हैं कि मुझे हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ. आप खुद राजनीति में जुम्मा-जुम्मा आठ दिन अभी पैदा नहीं हुए हैं. पैरा ड्रॉपिंग करके आप आए. अभी पहला चुनाव लड़ रहे हैं और आप कह रहे हैं कि कोई पैदा नहीं हुआ. तो कोई ऐसी बात है नहीं कि नौ बार दस बार जीते हों तो भी ऐसे दावे लोग नहीं करते.

निरहुआ का जवाब- इसीलिए बोल रहा हूं, सुनिए मेरी बात सुनिए, मैं बोल रहा हूं तो सुन लीजिए. उस दिन मुझे हराने वाला पैदा हो जाऊंगा जिस दिन मैं अधर्म का साथ कर लूंगा. मैं झूठ के साथ रहूंगा. मैं गलत के साथ रहूंगा. उस दिन हार जाऊंगा. ये जो जनता चाहती है कि श्री नरेंद्र मोदी जी फिर से इस देश के पीएम बने तो कोई नहीं हरा पाएगा मुझे. क्यों कि मैं उनके विचारधारा में चल रहा हूं और जिस दिन मैं जनता के विरोध में जाऊंगा, जनता जो चाहेगी उसके विपरीत जाऊंगा तो हार जाऊंगा.

अजीत अंजुम का सवाल- आपने एक बात बोली निरहुआ आप ईश्वर के लिखे लेख को भी मिटा सकते हैं तो आप ईश्वर से भी ऊपर हो गए. तीनों लोकों के स्वामी.

निरहुआ का जवाब- नहीं, कभी नहीं, मैं ये कह रहा हूं कि रामधारी सिंह दिनकर जी की लिखी कविता है. उन्होंने लिखा है स्वातंत्र्य भाव नर का अदम्य , वह जो चाहे कर सकता है, शासन की कौन बिसात, पाँव विधि की लिपि पर धर सकता है… ये मैंने नहीं लिखा है.

राहुल देव का सवाल- मुझे रामकथा का एक बहुत बड़ा पात्र नजर आ रहा था जो अपने अहंकार और बल में इतना डूबा हुआ था कि वो ईश्वर को जीतने वाला मानता था, हम सब जानते हैं उसका क्या हुआ. मैं समझता हूं कि भारत की जनता को विनम्रता, बड़बोलेपन से ज्यादा अच्छी लगती है, ज्यादा प्रभावित करती है. आप नि:संदेह बुद्धिमान हैं. आप पढ़ें भी हैं. आप दिनकर जी को पढ़ें हैं आप थोड़ा तुलसी बाबा को भी ध्यान कर लीजिए. बहुत से हमारे संत हैं उनको भी याद कर लीजिए. बोलिए विनम्र होकर अपनी बात रखिए अच्छा होगा.

निरहुआ का जवाब- मैं अहंकार की बात नहीं कह रहा. मैं तुलसीदास को भी सुना देता हूं. माता सीता के स्वयंवर में दस हजार राजा एक साथ मिलकर धनुष तोड़ना चाहते थे. उनसे पूछा गया कि सीता माता तो एक ही हैं और धनुष दस हजार लोग तोड़ेंगे. तब उन्होंने बोला कि पहले धनुष तोड़ लेते हैं फिर उसके बाद लड़ के देख लेंगे जो जीतेगा वो विवाह कर लेगा. आप लोग ऐसा ही कर रहे हैं.