ड्रीम गर्ल का ‘हेली’ ट्रैक्टर

1975 में फिल्म शोले में हेमा मालिनी एक तांगे वाली बनी थीं. मगर, वो उनकी फिल्मी सवारी थी. इस बार एक अप्रैल को वो पहले मथुरा के खेतों में गेहूं काटती नज़र आईं. फिर 5 अप्रैल को खेतों में ट्रैक्टर चलाते हुए दिखीं.
हेमा मालिनी, ड्रीम गर्ल का ‘हेली’ ट्रैक्टर

नई दिल्ली: 1975 में तो धन्नो ने बसंती की बात का मान रख लिया था और उन्हें गुंडों से बाइज़्ज़त बचा लिया था. लेकिन अब 2019 की चुनावी आंधी सामने है. पिछली बार की तरह मोदी लहर का भरोसा नहीं नज़र आ रहा. शायद इसीलिए, बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल को सियासी जीत का सपना पूरा करने के लिए हेलीकॉप्टर से उतरकर सीधे ट्रैक्टर पर आना पड़ा.

मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें संसद तक पहुंचने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाना होगा. हालांकि, पिछली बार मथुरावासियों ने उन्हें अपना सांसद चुना था, लेकिन इस बार उन्हें कुछ ज़्यादा ही पसीना बहाना पड़ रहा है. दोबारा संसद तक का सफ़र तय करने के लिए एसी कार छोड़कर खेतों में ट्रैक्टर चला रही हैं. वोटों की फसल पाने के लिए गेहूं की कटाई कर रही हैं. यही तो सियासत है. पांच साल तक राजनेता बने रहने के लिए चार-पांच हफ़्ते तो पसीना बहाना ही पड़ेगा.

1975 में फिल्म शोले में हेमा मालिनी एक तांगे वाली बनी थीं. मगर, वो उनकी फिल्मी सवारी थी. इस बार एक अप्रैल को वो पहले मथुरा के खेतों में गेहूं काटती नज़र आईं. फिर 5 अप्रैल को खेतों में ट्रैक्टर चलाते हुए दिखीं. ये तस्वीरें ख़ुद हेमा मालिनी और जनता को रील लाइफ और रियल लाइफ का फ़र्क़ बता रही हैं. हेमा मालिनी का हौसला बुलंद है. वो दावा कर रही हैं कि मथुरा से इस बार भी उन्हें कोई नहीं रोक पाएगा. मगर, उसी हौसले के साथ-साथ मुश्क़िलें भी उनका पीछा कर रही हैं. गेहूं की कटाई के साथ ही सोशल मीडिया पर उनकी खिंचाई शुरू हो गई. फिर ट्रैक्टर चलाया तो उमर अब्दुल्ला समेत कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया. जब तक हेमा मालिनी ट्रोल के ट्रॉमा से बाहर आतीं, तब तक आचार संहिता की मुसीबतों ने घेर लिया. वृन्दावन कोतवाली में एक जनसभा को लेकर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला सामने आया. प्रशासन ने नोटिस जारी किया, तो हेमा ने जवाब भी दिया. लेकिन, उनके जवाब से संतुष्ट न होने पर हेमा मालिनी के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ कर लिया गया.

बहरहाल, ड्रीम गर्ल को केस की चिंता नहीं है, उनके पॉलिटिकल स्टंट जारी हैं. क्योंकि, वो जानती हैं कि अगर सांसद बन गईं, तो केस ख़ुद-ब-ख़ुद ख़त्म हो जाएंगे. अब चुनावी मौसम में गर्मी का पारा बढ़ता जा रहा है और राजनेताओं की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं. अब वोटर तो यही देखकर ख़ुश है कि कम से कम 5 मिनट के लिए ही सही, लेकिन 5 साल बाद सांसदों को उनके घर और खेतों तक आने की फ़ुर्सत तो मिली. शायद इसीलिए, जब-जब कोई राजनेता वोटों के लिए फोटो वाली सियासत करता है, तो विरोधी और वोटर दोनों ताली बजाते हैं.

Related Posts