‘सपा सरकार में दलित विरोधी फैसले हुए’, मायावती ने किया हर चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान

मायावती ने इसके पीछे आम चुनाव के बाद 'सपा के व्‍यवहार में बदलाव' को जिम्‍मेदार बताया है.

नई दिल्‍ली: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सारे छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को ट्विटर पर इसकी जानकारी दी. मायावती ने इसके पीछे लोकसभा चुनाव के बाद ‘सपा के व्‍यवहार में बदलाव’ को जिम्‍मेदार बताया है.

बसपा प्रमुख ने ट्वीट किया, “सपा के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ सन् 2012-17 में सपा सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरूद्ध कार्यों एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया.”

मायावती ने आगे लिखा, “परन्तु लोकसभा आमचुनाव के बाद सपा का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है. अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी.”

लोकसभा चुनाव 2019 के बाद मायावती ने पहली बार रविवार को अखिल भारतीय स्तर पर पार्टी के सभी जिम्मेदार नेताओं, पदाधिकारियों और जोन इंचार्जों के साथ बैठक की. उत्तर प्रदेश में 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं.

मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक बनाने की घोषणा की है. मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम को भी राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी दी. रामजी गौतम भी मायावती के भतीजे हैं.

इसके साथ ही मायावती ने सतीश चंद्र मिश्र को राज्यसभा में पार्टी का नेता और दानिश अली को लोकसभा में पार्टी का नेता नियुक्त किया है. इसके अलावा गिरीश चंद्र को लोकसभा में मुख्य सचेतक बनाया गया है.

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