CBI ने गौर संस के मालिक के बेटे और बहू पर दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला

राहुल गौड़ ने बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) और सिंडिकेट बैंक (Syndicate Bank) से पैसे एक आवासीय परिसर बनाने के नाम पर लिए थे. यह कॉम्प्लेक्स उनकी कंपनी ब्रिस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड बनाने वाली थी.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रियल एस्टेट ग्रुप गौर संस (Gaur Sons) के चेयरमैन बी. एल. गौर के बेटे राहुल गौर, उनकी पूर्व पत्नी नवनीत गौर और उनकी कंपनी पर बैंक ऑफ बड़ौदा और सिंडिकेट बैंक के साथ कथित रूप से 80 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के सिलसिले में मामला दर्ज किया है. अधिकारियों ने बताया कि एक आवासीय परिसर (Residential Complex) के निर्माण की योजना के नाम पर यह धोखाधड़ी की गई है.

कंपनी के नाम से लिए 250 करोड़ रुपये

CBI के एक अधिकारी ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के सेक्टर 150 में 291 लग्जरी अपार्टमेंट्स वाली उनकी फर्म ब्राइस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित हाई-एंड रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स को तैयार करने के लिए कंपनी के नाम पर 250 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे. अधिकारी ने कहा कि कंपनी को बैंक ऑफ बड़ौदा से 150 करोड़ रुपये और सिंडिकेट बैंक से 100 करोड़ रुपये दिए गए थे.

प्रोजेक्ट को छोड़ दिया गया अधूरा

अधिकारी ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि कुल 80 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है, लेकिन प्रोजेक्ट को शुरुआती स्टेज में ही अधूरा छोड़ दिया गया है.

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FIR में दावा किया गया है कि खरीदारों के किए गए शुरुआती निवेश को एस्क्रो अकाउंट (निलंब लेखा) में जमा किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. शिकायत में कहा गया है कि उधारकर्ताओं के प्रोजेक्ट को छोड़ने के बाद 31 दिसंबर, 2015 को अकाउंट NPA हो गया था.

लोन की राशि का किया गलत इस्तेमाल

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने जिस काम के लिए लोन लिया था, उसमें निवेश करने के बजाए अपनी सुविधा के अनुसार धनराशि का इस्तेमाल किया. FIR में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के खाते का फोरेंसिक ऑडिट किया गया, जिसमें अपारदर्शी कार्यप्रणाली (Opaque System) के साथ ही धनराशि को इधर-उधर लगाने और फैक्ट्स को छिपाने की बात सामने आई.

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