मुलायम-अखिलेश को ‘सुप्रीम’ राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI ने दी क्लीन चिट

सीबीआई की तरफ से इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया.

लखनऊ. सीबीआई ने एक हलफनामे के माध्यम से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को आय से अधिक संपत्ति मामले में क्लीन चिट दे दी है. सीबीआई ने कहा, पिता और पुत्र के खिलाफ रेगुलर केस (RC) दर्ज करने के लिए उसको कोई सबूत नहीं मिला है.

सीबीआई ने क्लीन चिट वाला हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दर्ज किया है. हलफनामे में कहा गया है कि 7 अगस्त 2013 को जांच बंद की जा चुकी है, क्योंकि शुरूआती जांच में किसी संज्ञेय अपराध की पुष्टि नहीं हुई थी. याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि सीबीआई को इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दें. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे.

इस मामले में उच्चतम न्यायालय की ओर से 2007 में जांच का आदेश आया था. 2008 में सीबीआई ने केस दर्ज होने लायक सबूत मिलने की बात कही थी.

क्या था मामला?

साल 2005 में कांग्रेस की सरकार के दौरान मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और डिंपल यादव के खिलाफ कांग्रेस नेता व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने आय से अधिक संपत्ति मामले में शिकायत की थी. इस मामले में उन्होंने जनहित याचिका दाखिल कर सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी. जिसके बाद 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच के आदेश दिए थे. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में इस मामले की जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था. जिसपर अब सीबीआई ने हलफनामा सौंपा है.

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कौन हैं विश्वनाथ चतुर्वेदी?

विश्वनाथ चतुर्वेदी  सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं और 17 साल से मुलायम परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को लड़ रहे हैं. उनकी ही याचिका ने मुलायम सिंह यादव के परिवार पर तलवार लटका रखी है. मार्च 2007 में सुप्रीम कोर्ट से आदेश पाकर सीबीआई ने यादव परिवार के खिलाफ जांच छेड़ दी थी. जांच के दायरे में मुलायम, अखिलेश, डिंपल और प्रतीक यादव आए थे. यही चतुर्वेदी लखनऊ लैंड स्कैम और खाद्यान्न मामले में भी याचिकाकर्ता हैं.

चतुर्वेदी का जन्म रायबरेली के शिवगढ़ में हुआ था और उनकी पढ़ाई-लिखाई लखनऊ के केकेसी कॉलेज में हुई. छात्र जीवन में ही उन्होंने सियासत का रास्ता पकड़ा जिसका माध्यम कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई बनी. आगे चलकर चतुर्वेदी यूथ कांग्रेस का हिस्सा बने और आखिरकार 2004 के दौरान कांग्रेस के महासचिव पद पर भी पहुंचे. साल 2002 में सीएम बनने के दौरान जब राजनाथ सिंह के लिए विधायक बनना ज़रूरी हुआ तब वो बाराबंकी की हैदरगढ़ सीट से खड़े हुए. उस चुनाव में उन्हें चुनौती देने के लिए  विश्वनाथ चतुर्वेदी ही सामने आए. उन्हें एक वक्त एनडी तिवारी का खास माना जाता था.

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चुनाव प्रचार में अखिलेश ने विश्वनाथ चतुर्वेदी की चर्चा की थी

अखिलेश ने 19 अप्रैल को अपनी पार्टी के दफ्तर में जो कहा था वो कुछ इस तरह है- वो कांग्रेस ही है, जिसने मेरे और नेता जी के खिलाफ सीबीआई का दुरूपयोग किया. जिस व्यक्ति ने मेरे खिलाफ जनहित याचिका दायर की, वह कांग्रेसी है और (लखनऊ में) कांग्रेस प्रत्याशी (प्रमोद कृष्णम) के नामांकन के समय मौजूद था.