बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कल्याण सिंह की बढ़ सकती है मुश्किल

कल्याण सिंह को इस मामले में अनुच्छेद 351 के तहत संवैधानिक पद पर होने के चलते कानूनी कार्रवाई से छूट मिली हुई थी.

नई दिल्ली: राजस्थान के राज्यपाल पद से हटते ही पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है लेकिन पार्टी ज्वाइन करते ही उनकी मुसीबत बढ़ गई है. सीबीआई ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कल्याण सिंह को बतौर आरोपी अदालत में पेश करने के लिए अर्जी दाखिल की है.

बता दें सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को आदेश दिया था, जिसमें कल्याण सिंह के अलावा इस केस में पूर्व डिप्टी पीएम लाल कृष्ण आडवाणी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, पूर्व सीएम उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, विनय कटियार, सतीश प्रधान, चंपत राय बंसल, महंत नृत्यगोपाल दास, विष्णु हरि डालमिया, नृत्य गोपाल दास, जगदीश मुनि महाराज, बीएल शर्मा (प्रेम), धर्म दास, सतीश प्रधान, आरवी वेदांती को आरोपी मानते हुए मुकदमा चलाने की बात कही थी.

कल्याण सिंह को इस मामले में अनुच्छेद 351 के तहत संवैधानिक पद पर होने के चलते कानूनी कार्रवाई से छूट मिली हुई थी.

ज़ाहिर है इन सभी नेताओं के खिलाफ अयोध्या में बाबरी विध्वंस के लिए आपराधिक षडयंत्र करने का आरोप है, जो धारा 120 (बी) के तहत चल रहा है. अब सीबीआई के अपील स्वीकार करने के बाद कल्याण सिंह को एक बार फिर कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

अयोध्या मामले के लिए लिब्राहन आयोग का गठन 16 दिसंबर 1992 में किया गया था. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बाबरी विध्वंस को सुनियोजित साजिश करार देते हुए 68 लोगों को दोषी माना था. लिब्राहन आयोग ने कहा था कि कल्याण सिंह ने घटना को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.

क्या है मामला?

6 दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद हुआ था तो कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे. आरोप है कि यूपी के सीएम रहते कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में कहा था कि वह अयोध्या में विवादित ढांचे को कोई नुकसान नहीं होने देंगे, लेकिन कार सेवा आयोजित होने के दौरान अयोध्या में मस्जिद को गिरा दिया गया था.

इसके बाद सीएम कल्याण सिंह ने मामले की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.