7 दिनों तक कैसे यूपी पुलिस की 100 टीमों को चकमा देता रहा शातिर विकास दुबे, जानें

विकास दुबे (Vikas Dubey) सात दिनों तक यूपी पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स को चकमा देकर चार राज्यों में मूवमेंट करता रहा लेकिन कोई उस तक नहीं पहुंच पाया.
Gangster Vikas Dubey, 7 दिनों तक कैसे यूपी पुलिस की 100 टीमों को चकमा देता रहा शातिर विकास दुबे, जानें

Vikas Dubey Encounter : भले ही यूपी पुलिस (UP Police) ने मुठभेड़ में कानपुर वाले विकास दुबे (Vikas Dubey) को मार गिराया हो लेकिन पुलिस पिछले सात दिनों तक उसके आसपास फटक भी नहीं पाई. विकास दुबे के शातिर दिमाग की प्लानिंग को तो यूपी पुलिस की करीब 100 टीमें भाप भी नहीं पाईं. टीवी 9 भारतवर्ष की इस रिपोर्ट में देखिये किस तरह पुलिस के नेटवर्क पर विकास का नेटवर्क भारी पड़ा.

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पुलिस की आंखों के सामने की राज्यमंत्री की हत्या

विकास दुबे कानपुर वाला, ये नाम लंबे वक्त तक लोगों के जेहन में रहेगा. ये कहना गलत नहीं होगा कि विकास दुबे को गैंगेस्टर बनाने में पुलिस का अहम रोल रहा है. पुलिस की नाक के नीचे नहीं बल्कि पुलिस की आंखों के सामने उसने एक राज्यमंत्री की हत्या कर दी. इसके बाद उसके हौसले ऐसे बढ़े कि वो पुलिस को तो कुछ समझता ही नहीं था. कई पुलिस वाले उसके मददगार बने और इन्हीं पुलिसवालों के बीच बैठकर उसने पुलिस की हर बारीकी सीखी जैसे कि जांच कैसे होती है, दबिश कैसे होती है, पुलिस की कमजोरियां या वो सब जो अपराधी को अपराध अंजाम देने के बाद बचने के लिए मददगार हो. दो तीन जुलाई की रात पुलिस पहुंची लेकिन उसके पहले विकास को जानकारी पहुंच गई. पुलिस का असलहा छीनकर उसने पुलिस पर हमला किया और आठ पुलिस वालों को मौत के घाट उतार दिया.

विकास ने चाहा तभी पुलिस उसे गिरफ्तार कर पाई

कानपुर हत्याकांड के मुख्य आरोपी और दुर्दांत अपराधी विकास दुबे का नेटवर्क पुलिस के नेटवर्क पर भारी ही पड़ता रहा. विकास सात दिन के दौरान पूरे यूपी पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स को चकमा देकर चार राज्यों में मूवमेंट करता रहा लेकिन कोई उस तक नहीं पहुंच पाया. जब विकास ने चाहा तभी पुलिस उसे गिरफ्तार कर पाई वो भी मध्य प्रदेश की .2/3 जुलाई की रात यानी वारदात के बाद दो दिन तक वह शिवली में अपने एक करीबी के यहां छिपा रहा लेकिन पुलिस उसे नहीं ढूंढ पाई. जबकि शिवली उसके गढ़ में गिना जाता है, पुलिस ने वहां कई घरों में उसे तलाशा.

फरीदाबाद पुलिस से हुई चूक

कानपुर के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को अरेस्ट करने में फरीदाबाद पुलिस से चूक हो गई, नहीं तो उसे अरेस्ट करने का श्रेय मध्यप्रदेश की उज्जैन पुलिस को नहीं बल्कि फरीदाबाद पुलिस को मिलता. वह अपने साथियों के साथ फरीदाबाद में सरेंडर करने के इरादे से पहुंचा था, मगर यहां के बिचौलियों की गतिविधियों को देख वह पुलिस टीम को चकमा देकर भाग निकलने में कामयाब हो गया. कानपुर के बिसरू में 2 जुलाई की रात 8 पुलिस कर्मियों की हत्या करने के बाद विकास अपने साथी प्रभात मिश्रा और अमर दुबे के साथ 5 जुलाई को फरीदाबाद पहुंचा था. वह यहां हरिनगर स्थित अपने दूर के रिश्तेदार श्रवण के घर आया था. बताया जाता है कि शराब ठेकों पर कार्य करने वाले श्रवण और उसके बेटे अंकुर ने तीनों के अपने घर आने पर उनसे सारे घटनाक्रम की जानकारी लेने के बाद उनके सरेंडर की योजना बनाई. इस मामले में बाप-बेटों ने फरीदाबाद के ही एक पुलिसकर्मी से बातचीत की. मगर यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी. फरीदाबाद पुलिस को अपने ही आदमी से विकास के यहां छिपे होने के संबंध में जानकारी मिली थी. यहां एक दिन ठहरने के बाद 6 जुलाई को अमर वापस चला गया. जबकि विकास और प्रभात मिश्रा यहीं रुके रहे. घर में कम जगह होने पर इन दोनों को अंकुर ने सेक्टर-19 स्थित नैशनल हाइवे के पास ओयो होटल में ठहरा दिया.

पुलिस की रेड से पहले विकास होटल छोड़कर फरार

सूत्र बताते हैं कि ओयो होटल में ठहरने पर विकास ने पॉल नाम के व्यक्ति का पैन कार्ड दिया था. मगर उसमें एड्रेस न होने पर होटल मैनेजर ने मना कर दिया. इसके बाद अंकुर ने अपनी और पिता की आईडी होटल में जमा कराई. दोनों एक ही कमरे में ठहरे हुए थे. अंकुर की हरकतें देख विकास को शक हुआ और वह भाग निकला. अंकुर इन दोनों के ठहरने और सरेंडर को लेकर बहुत ज्यादा घबराया हुआ था. इस दौरान उसने अपने परिचित पुलिसकर्मी से चर्चा की. मगर इस बार भी योजना सिरे नहीं चढ़ पाई. पुलिसकर्मी अपनी प्रमोशन को लेकर लालायित था. पुलिसकर्मी जब ज्यादा कुछ प्लान नहीं कर सका तो उसने आला अधिकारियों को सूचना दे दी. जिस पर पुलिस ने श्रवण के घर पर रेड कर दी. जिस समय पुलिस ने रेड की उस समय प्रभात मिश्रा हरिनगर में श्रवण के घर पर मौजूद था. अंकुर की गतिविधियों को देख शातिर विकास को शक हो गया था. उसे यह भी शक था कि अंकुर कहीं यूपी में किसी को उसे छिपे होने की सूचना न दे दे और यूपी पुलिस व एसटीएफ उसे यहां आकर न दबोच ले. जिस समय हरिनगर में पुलिस ने रेड की, उससे पहले विकास होटल का कमरा छोड़कर फरार हो गया था. 7 जुलाई को सीसीटीवी फुटेज में एक ऑटो में सवार होता हुआ वह दिख रहा था. जब पुलिस होटल में पहुंची थी, तब तक वह दूर जा चुका था.

टीवी चैनल में जाकर सरेंडर करने की अफवाह

वहां से चकमा देने के बाद, विकास बार्डर और पूरे रास्ते कई जगह चेकिंग होने के बाद भी एनसीआर, दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा में घूमता रहा. नोएडा और फरीदाबाद में उसकी वीडियो फुटेज भी सामने आई लेकिन पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाई. हालांकि पुलिस ने उसके तीन करीबियों को गिरफ्तार कर लिया. जिसमें से एक प्रभात का गुरुवार की सुबह कानपुर में एंकाउंटर भी हो गया. यही नहीं पुलिस को गुमराह करने के लिए विकास ने टीवी चैनल में जाकर सरेंडर करने की अफवाह भी फैलाई. जिसके चलते पुलिस टीमें नोएडा और एनसीआर से सटे इलाकों में उसकी घेराबंदी में लग गईं. इस बीच वह पुलिस को चकमा देकर राजस्थान के रास्ते मध्य प्रदेश निकल गया. मध्य प्रदेश के उज्जैन में उसने अपने प्लान के मुताबिक सरेंडर किया.

फरीदाबाद से उज्जैन पहुंचना बड़ा सवाल

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे गुरूवार को उज्जैन में अरेस्ट हो गया, मगर फरीदाबाद से वहां तक पहुंचना एक बड़ा सवाल बन गया. पुलिस उसके फरार होने के हर पहलू पर जांच कर रही है. क्राइम ब्रांच हाइवे के आसपास लगे शोरूम और दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालने में लगी है. हाइवे पर बदरपुर बॉर्डर से लेकर बल्लभगढ़ तक ऑटो चलते हैं. जिस ऑटो में विकास फरार हुआ था, उस ऑटो की भी तलाश में पुलिस टीम लगी हुई है लेकिन अभी भी कुछ हासिल नहीं हुआ है.

सूत्रों के मुताबिक ऑटो-टैक्सी अजरौंदा चौक और बाटा चौक से शहर के लिए मुड़ जाते हैं. इन रास्तों से गुड़गांव की ओर जाया जा सकता है. जबकि बल्लभगढ़ से आगरा-मथुरा के लिए जाना सबसे आसान है. बल्लभगढ़ से हरियाणा रोडवेज की बसों के अलावा मध्यप्रदेश और यूपी की बसें भी चलती हैं. वहीं प्राइवेट बसों के अलावा अवैध वाहन भी दिनभर सवारी लेकर चलते हैं. इसके अलावा हाइवे पर जाने वाले ट्रक भी सवारियां बैठा लेते हैं. माना जा रहा है कि विकास बल्लभगढ़ तक ऑटो में आया होगा और वहां से आगे का रास्ता किसी अवैध वहां से किया होगा.

फरीदाबाद से उज्जैन जाने के 3 रास्ते हैं. इनमें सबसे आसान फरीदाबाद से पलवल, मथुरा, आगरा, धौलपुर, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी और गुणा होते हुए उज्जैन का 763 किलोमीटर लंबा रास्ता है. दूसरा रास्ता फरीदाबाद से गुडगांव होते हुए नीमराणा, कोटपुतली, जयपुर, वनस्थली, कोटा, झालावाड़, अगार होते हुए उज्जैन का 788 किलोमीटर लंबा रास्ता है. तीसरा भिवाडी, तिजारा, अलवर, राजगढ, दौसा, वनस्थली, टौक और कोटा होते हुए 798 किलोमीटर लंबा रास्ता है.

और…मारा गया कानपुर वाला विकास

उज्जैन में गिरफ्तारी के पहले वो एक शराब व्यवसाई के यहां रुका था ऐसी भी जानकरी पुलिस के पास है लेकिन गुत्थी अभी सुलझी नहीं है कि वो वहां कैसे पहुंचा. कल नौ बजे के आसपास उज्जैन से कानपूर के लिए पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर लेकर निकली थी. इस दौरान कई बार गाड़ियां आगे पीछे की गईं. दो बार उसको अलग-अलग गाड़ी में शिफ्ट किया गया. पुलिस के मुताबिक कानपुर में टोल क्रास करने के बाद गाड़ी आगे पीछे ली जा रही थी उसी दौरान बरसात के चलते एक गाड़ी पलट गई. जिसके बाद विकास ने विवेचक रमाकांत पचौरी की पिस्टल लेकर फरार होने की कोशिश की. पुलिस ने उसे घेरकर आत्मसमर्पण के लिए कहा लेकिन विकास ने गोली चला दी, जिसके बाद जवाबी कार्यवाही में कानपुर वाला विकास मारा गया.

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