‘चौकीदारों का गांव है, यहां चोरों का आना वर्जित’, प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव में लगे पोस्टर

प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच साल के कार्यकाल में वाराणसी के चार गांवों को गोद ले चुके हैं.

वाराणसी. ‘चौकीदार चोर है’ का नारा देने वाली कांग्रेस का नारा उसके लिए ही गले की फांस बनता जा रहा है. अभी तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता ही इस नारे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रहे थे, पर अब पीएम नरेंद्र मोदी के गोद लिए गांव के ग्रामीणों ने कांग्रेस के नारे पर निशाना साधा है. नरेंद्र मोदी के सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गांव ककरहिया में लगा एक पोस्टर अब चर्चा का विषय बन गया है.

ग्रामीणों ने गांव में जगह-जगह लगाए पोस्टर

ग्रामीणों ने गांव में जगह-जगह ‘यह चौकीदारों का गांव है, यहां चोरों का आना वर्जित’ लिखा पोस्टर लगाया है. गांव में रहने वाले भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2017 को ककरहिया गांव गोद लिया था. उनके इस गांव को गोद लेने से इसका कायाकल्प हो गया. यह देश-दुनिया में चर्चित हो गया. यहां काफी विकास भी हुआ है.

एक ग्रामीण ने बताया, “प्रधानमंत्री को चोर कहकर संबोधित करने वालों ने पूरे देश की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. ऐसे लोगों का हमारे गांव में कदम नहीं पड़े इसलिए ऐसे पोस्टर लगाए हैं.” इससे पहले जो भी सांसद व विधायक जीत कर आता था वह हमारे गांव के विकास को दरकिनार कर देता था, लेकिन मोदी ने गांव का कायाकल्प कर दिया.

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ककरहिया गांव वाराणसी की रोहनिया विधानसभा में आता है. ये वाराणसी से 22 किलोमीटर की दूरी पर है. इस गांव को पहलवानों का गांव माना जाता है. इस गांव की आबादी लगभग तीन हजार है. पीएम मोदी ने अपने पांच साल के कार्यकाल में 4 गांव गोद लिए हैं. ककरहिया के अलावा पीएम मोदी ने जयापुर,नागेपुर और डोमरी गांव गोद लिया है.

बता दें कि, ‘चौकीदार चोर है’ वाले नारे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांग चुके हैं. इसके बाद भी अभी भी विपक्षी पीएम पर निशाना साधने के लिए इस नारे का इस्तेमाल कर रहे हैं.