रेलवे इंजीनियर राजेश सेक्‍स चेंज करा बन गया सोनिया, अब आ रही ये दिक्‍कत

सेक्स चेंज ऑपरेशन कराकर लड़की बन जाने वाले राजेश पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जत नगर मंडल के कार्यालय में तकनीकी ग्रेड 1 पर तैनात हैं.

लखनऊ. रेलवे में काम करने वाले एक 35 वर्षीय आदमी ने 2017 में अपना सेक्‍स चेंज ऑपरेशन करवाया था, अब इस शख्स को रेलवे में अपने आधिकारिक रिकॉर्ड को बदलने के लिए जूझना पड़ रहा है. पुराने पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज उसे अभी भी आदमी ही दिखा रहे हैं, जिससे नई पहचान के साथ उसे आधिकारिक काम में कठिनाई हो रही है.

पूर्वोत्तर रेलवे (NER) में काम करने वाले राजेश पांडेय इज्जत नगर (बरेली) वर्कशॉप में इंजीनियर हैं. राजेश ने अपने नाम (सोनिया पांडे) और सेक्स (महिला) में बदलाव की मांग करते हुए गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे महाप्रबंधक के कार्यालय से संपर्क किया है. इस मांग को शीर्ष रेलवे के पास भेज दिया गया है, क्योंकि ये पहली बार है कि कोई कर्मचारी आधिकारिक रिकॉर्ड में अपना सेक्स और नाम बदलना चाहता है.

बरेली जिले के रहने वाले पांडेय ने सबसे पहले इज्जत नगर वर्कशॉप के महाप्रबंधक के पास आवेदन भेजा था, लेकिन जब मुद्दा नहीं सुलझ सका तो पांडेय ने मामले को NER महाप्रबंधक (गोरखपुर) के ध्यान में लाया. इज्जत नगर डिवीज़न NER के अंतर्गत आता है, जिसका मुख्यालय गोरखपुर में है.

NER के जनसंपर्क अधिकारी सीपी चौहान ने कहा, “यह एक तकनीकी मुद्दा है और हम कानूनी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं.” पांडेय जोकि चार बहनों में अकेले भाई थे, उनको 2003 में पिता की मृत्यु के बाद आश्रित के रूप में नौकरी पाई थी. 

सर्जरी कराने से पहले पांडेय ने एक स्थानीय महिला से शादी भी की थी, लेकिन यह शादी लंबे समय तक नहीं चल सकी. राजेश के ये कबूलने के बाद कि वह एक पुरुष के शरीर में सहज महसूस नहीं करते, जोड़े ने तलाक का निर्णय किया.

राजेश अब सोनिया है और वह मेकअप लगाकर, साड़ी पहनकर ऑफिस पहुंचती है. पांडेय ने बताया, “जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मुझे महसूस हुआ कि मैं एक ऐसा व्यक्ति हूं जिसकी आत्मा को एक गलत शरीर में डाल दिया गया है. नारी विचार मेरे पास आते और मैं मेकअप में रुचि लेती. मेरे परिवार ने मुझे शादी करने के लिए मजबूर किया लेकिन मैंने अपनी पत्नी को सच्चाई बता दी और वह तलाक के लिए तैयार हो गई.” पांडेय ने ये भी बताया कि “मैंने खुदकुशी की भी कोशिश की, लेकिन किसी के सेक्स बदलने के सुझाव के बाद मैंने सर्जरी कराई. इससे मुझे आशा मिली, लेकिन मेरी मां और मेरी बहनों इस निर्णय का विरोध किया. मेरे लिए यही सही था क्योंकि रोज घुटने से अच्छा था कि मैं लिंग बदलवा लूं. इसको दो साल बीत गए हैं और अब मैं साधारण महसूस करती हूं.”

नए लिंग और नए नाम के साथ नौकरी में आ रही कठिनाइयों के निवारण के लिए राजेश ने रेलवे से अधिकारिक कागजातों में नाम और लिंग बदलने की अपील की. इसके लिए सोनिया संघर्ष कर रहीं है.

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