Ayodhya: महामंडलेश्वर कन्हैया करें भूल सुधार, संत कभी दलित नहीं होता: कामेश्वर चौपाल

कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal) ने कहा, "अगर रामायण (Ramayana) देखें तो पता चलता है कि किसी को लंका मिली और किसी को अन्य चीजें, लेकिन हनुमान को कुछ नहीं मिला. फिर भी उनकी पूजा हर जगह हो रही है. मंदिर (Ram Temple) बनाने के लिए भक्ति की जरूरत है."

Kameshwar Chaupal on Dalit Mahamandaleshwar, Ayodhya: महामंडलेश्वर कन्हैया करें भूल सुधार, संत कभी दलित नहीं होता: कामेश्वर चौपाल

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Janmabhoomi Trust) के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने महामंडलेश्वर कन्हैया प्रभुनंदन गिरि (Kanhaiya Prabhunandan Giri) के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संत दलित नहीं होता है. ट्रस्ट में दलित को शामिल करने की बात पर उन्होंने कहा, “मैं दलित हूं और मुझे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है.”

कन्हैया प्रभुनंदन गिरि ने लगाया था यह आरोप

दरअसल, प्रयागराज के महामंडलेश्वर स्वामी कन्हैया प्रभुनंदन गिरि ने हाल में आरोप लगाया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को हो रहे भूमि पूजन कार्यक्रम (Bhoomi Poojan) में दलित संतों की उपेक्षा की जा रही है. समारोह में उन्हें नहीं बुलाया जा रहा है. स्वामी कन्हैया का यह भी आरोप था कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में किसी दलित को सदस्य नहीं बनाया गया है. BSP सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई थी.

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कामेश्वर चौपाल ने इसे बताया आत्मविश्वास की कमी

ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal) ने विशेष बातचीत में कहा कि ‘आरोप लगाने के पीछे कहीं न कहीं आत्मविश्वास की कमी है. महामंडलेश्वर कोई खुद नहीं बन सकता है. इस पद पर नियुक्ति अखाड़ा परिषद (Akhara Council) करता है. यह चुनाव मेधा के अनुसार होता है. अखाड़ा परिषद किसी संत की जाति देखकर नहीं बल्कि गुणों के आधार पर महामंडलेश्वर के पद पर बिठाता है. अब संत होने के बाद दलित वाली बात कहां से आ गयी.’

चौपाल ने दिया अपना ही उदाहरण

चौपाल ने कहा कि ‘समाज के अंदर से भेदभाव हटाने के लिए ही VHP का उदय हुया. एक फरवरी 1989 में संतों का धर्म संसद प्रयाग (Prayag) में हुआ था. उसमें एक लाख संत थे. उस समय यह निर्णय हुआ था कि रामजन्मभूमि का शिलान्यास किसी न किसी समाज के पीछे पंक्ति (Back Row) के व्यक्ति से करवाया जाएगा. उस समय अनसूचित जाति से शिलान्यास मैंने किया था और किसी किसी धर्माचार्य ने उसका विरोध भी नहीं किया था.’

गिरि के आरोपों को बताया भेदभाव से भरा

उन्होंने बताया कि ट्रस्ट बनने के बाद यह तय किया गया कि ‘जब तक श्रीराम की मान्यता रहेगी तब तक एक अनुसूचित जाति का व्यक्ति उसमें रहेगा. हालांकि, ट्रस्ट जाति के आधार पर नहीं बनते हैं. उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर को इस तरह नहीं सोचना चाहिये. उनका यह बयान भेदभाव भरा है. उन्होंने कहा कि भूमि पूजन के लिए मेहमानों की लिस्ट जब किसी को पता नहीं है, फिर आप आरोप कैसे लगा सकते हैं कि किसे नहीं बुलाया गया.’

“ट्रस्ट में सब कुछ लोकतांत्रिक तरीके से होता है”

यह पूछने पर कि क्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में आपसी संवादहीनता (Communication Gap) है क्योंकि राम मंदिर के नींव में आपने कैप्सूल डालने की बात कही और महासचिव ने उसे खारिज कर दिया. इस पर चौपाल ने कहा, “ऐसा नहीं है, ट्रस्ट में सभी को अपनी बात रखने की आजादी है. हर मुद्दे पर अच्छे से विचार और खुलकर चर्चा होती है.”

उन्होंने आगे कहा, “कैप्सूल की बात हमने भविष्य को देखते हुये कही थी जिससे इतिहास सुरक्षित रहे. ट्रस्ट के महासचिव चाहते हैं कि इसमें और बात की जाये. सब कुछ खुलकर सामने आएं. अभी इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी. हमारे यहां सब कुछ लोकतांत्रिक तरीके से होता है. यह कोई विवाद का विषय नहीं है. पहले मंदिर के मॉडल में कोई बदलाव न करने की बातें आई थीं, लेकिन उस पर भी चर्चा होकर अब बदलाव किया जा रहा है. इसमें कोई हार जीत नहीं होती है.”

“मंदिर बनाने के लिए समर्पण की जरूरत”

अयोध्या आंदोलन के अगुआ रहे आडवाणी, जोशी और कटियार को ट्रस्ट में जगह न मिलने की वजह पूछने पर चौपाल ने कहा कि ‘यह बात मेरे दायरे के बाहर है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सरकार ने ट्रस्ट बनाया है.’

जब यह पूछा गया कि क्या ऐसा नहीं लगता है कि ट्रस्ट को मातृ शक्ति से दूर रखा गया है? इस पर उन्होंने कहा कि ‘पहले अनसूचित, पिछड़े, फिर सामान्य भी सोचेंगे कि हमें नहीं लिया गया है. अब आप मातृ शक्ति की बात कर रहे हैं. दरअसल यह काम फायदे का नहीं, त्याग का है. यहां समर्पण की बात है.”

रामायण का दिया उदाहरण

उन्होंने कहा, “अगर रामायण (Ramayana) देखें तो पता चलता है कि किसी को लंका मिली और किसी को अन्य चीजें, लेकिन हनुमान को कुछ नहीं मिला. फिर भी उनकी पूजा हर जगह हो रही है. मंदिर बनाने के लिए भक्ति की जरूरत है. अभी ट्रस्ट से सभी संतुष्ट हैं. सभी केवल यही चाहते हैं कि वहां जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर बने.”

लोगों से अपनी क्षमता के अनुसार दान देने की अपील

यह पूछने पर कि ट्रस्ट में मना करने के बाद भी लोग चांदी-सोना दे रहे हैं, ऐसा क्यों? उन्होंने कहा कि ‘हमारे यहां बहुत पारदर्शिता (Transparency) है. चांदी और अन्य धातु दान देने वालों से अपील की जा रही है कि वे सीधे कैश दें और अकाउंट में जमा कराएं. अब तो ऑनलाइन भी पैसा दे सकते हैं. हम अपील कर रहे हैं, लोग अपनी क्षमता के अनुसार दान दें.’

‘शुद्धिकरण के लिए भूमि पूजन होना जरूरी’

‘अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के भूमि पूजन और शिलान्यास करने आने की संभावना है. इससे पहले आप शिलान्यास कर चुके हैं. आपको कैसा लग रहा है?’ इस सवाल के जवाब में चैपाल ने कहा कि ‘शिलान्यास बहुत पहले हो चुका है. अब केवल भूमि पूजन है. ट्रस्ट के अध्यक्ष भी इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं.’

उन्होंने कहा, “1989 में जब हमने शिलान्यास किया था वह संघर्ष का दौर था. उस समय वहां बाबरी मस्जिद का ढांचा खड़ा था जो 1992 में ध्वस्त हुआ. इतने सालों तक ऐसे ही रहा. इसलिये शुद्धिकरण (Purification) के लिए भूमि पूजन होना जरूरी है. मेरा योगदान रामसेतु में गिलहरी की तरह मानें. लेकिन प्रधानमंत्री के हाथों से भूमि पूजन होना गौरव की बात है, क्योंकि वह देश के सबसे बड़े नेता हैं. मैं तो शिलान्यास करके गर्व महसूस कर रहा हूं.”

‘वोट बैंक के चक्कर में नहीं आते विपक्षी’

एक दूसरे सवाल के जवाब में चौपाल ने कहा कि ‘ट्रस्ट चाहता है कि रामजन्मभूमि पर जल्द से जल्द मंदिर बनवाकर जनता को सौंप दिया जाये. मंदिर निर्माण की कमेटी (Temple Construction Committee) बन गई है. हर विषय के एक्सपर्ट्स तैनात किए गए हैं.’

भूमि पूजन कार्यक्रम में विपक्षी दलों के लोगों को न बुलाये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मंदिर निर्माण से पहले हम लोग कई बार विपक्षी दल के लोगों से धर्म संसद (Parliament of Religion) में आने का निमंत्रण देते थे, लेकिन वोट बैंक के चक्कर में वे लोग आते नहीं. ये लोग बुलाने पर भी नहीं आएंगे. जब बंगाल में ‘जय श्रीराम’ कहने पर लाठियां चल रही हैं तो इससे अंदाजा लगा लें. वैसे भी कोरोना संक्रमण के चलते कार्यक्रम बड़े सीमित दायरे में आयोजित किया जा रहा है.” (IANS)

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