कमलेश तिवारी हत्‍याकांड: पाकिस्‍तान भागने वाले थे हत्‍यारे, इस वजह से लौट आए

पकड़े गए संदिग्‍धों की पहचान अशफाक हुसैन जाकिर हुसैन शेख (34) और मोइनुद्दीन खुर्शीद पठान (27) के रूप में की गई है.

हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी के संदिग्‍ध हत्‍यारे अरेस्‍ट कर लिए गए हैं. गुजरात की एंटी टेररिस्‍ट स्‍क्‍वाड (ATS) ने मंगलवार को राजस्‍थान से गुजरात में एंट्री कर रहे दोनों मुख्य आरोपियों को अरेस्‍ट किया. पूछताछ में पता चला है कि दोनों नेपाल के रास्‍ते पाकिस्‍तान भागने की फिराक में थे. हालांकि उनका प्‍लान सफल नहीं हो सका.

संदिग्धों की पहचान अशफाक हुसैन जाकिर हुसैन शेख (34) और मोइनुद्दीन खुर्शीद पठान (27) के रूप में की गई है. दोनों गुजरात-राजस्थान सीमा स्थित सूरत के शामलजी के रहने वाले हैं. एटीएस ने कहा कि दोनों उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से नेपाल पहुंचे और वहां से राजस्थान होते हुए गुजरात में प्रवेश कर रहे थे.

कमलेश तिवारी हत्‍याकांड: कैसे फेल हुआ संदिग्‍ध हत्‍यारों का प्‍लान

अधिकारियों ने बताया कि 18 अक्‍टूबर को हत्‍या को अंजाम देकर दोनों नेपाल भाग गए. वहां से वे मध्‍य प्रदेश बॉर्डर पर ट्रक में लिफ्ट लेकर यूपी के शाहजहांपुर आए. खुद के पास एक रुपया ना होने की बात कहते हुए वह लिफ्ट मांगते-मांगते गुजरात पहुंचे. शुरुआती जांच बताती है कि दोनों ने पाकिस्‍तान भाग जाने की योजना बनाई थी.

भागने के चक्‍कर में दोनों आरोपियों के पास पैसे खत्‍म हो गए. उन्‍होंने परिवार के लोगों और जानने वालों से संपर्क कर रुपयों का इंतजाम करने को कहा. टेक्निकल सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस की मदद से दोनों को पकड़ा गया.

ATS ने कहा कि शेख मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम करता है, जबकि पठान फूड डिलिवरी ब्यॉय (खाना पहुंचाने वाला) का काम करता है. ATS की शुरुआती जांच में पता चला है कि उन्होंने तिवारी के आपत्तिजनक बयान के प्रतिशोध में इस अपराध को अंजाम दिया.

DIG हिमांशु शुक्ला के नेतृत्व वाली गुजरात ATS टीम ने कहा कि दोनों को परिवार के सदस्यों से पूछताछ और तकनीकी व फिजिकल सर्विलांस के आधार पर पकड़ा गया. दोनों को यूपी पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा.

कौन थे कमलेश तिवारी?

हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी ने वर्ष 2017 जनवरी में ही हिंदू समाज पार्टी की स्थापना की थी. उन्होंने पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी अत्यधिक विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के उद्देश्य से किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं व धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना) के तहत उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया और उन्हें एक साल तक जेल में रहना पड़ा. 2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनके खिलाफ एनएसए रद्द कर दिया था. बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया. तिवारी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के स्वयंभू अध्यक्ष थे और उनके इस दावे का कई बार महासभा ने विरोध किया था.

आखिरकार 2017 में तिवारी ने हिंदू समाज पार्टी बनाई और हिंदू कट्टरपंथी के रूप में उभरने के लिए कई प्रयास किए. इसी क्रम में तिवारी ने सीतापुर में अपनी पैतृक जमीन पर नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का ऐलान किया था. लेकिन वह कभी शुरू नहीं हो सका. तिवारी ने 2012 में भी चुनावी राजनीति में उतरने का असफल प्रयास किया था. वह लखनऊ से विधानसभा चुनाव लड़े थे और हार गए थे. राम जन्मभूमि मामले में वह सुप्रीम कोर्ट में कुछ दिनों तक हिन्दू महासभा की तरफ से पक्षकार भी रहे थे.

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