कमलेश तिवारी मर्डर केस: पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, कमलेश तिवारी को कम से कम 15 बार चाकू मारा गया था. हत्‍यारे मिठाई के डिब्‍बे में चाकू छिपाकर लाए थे.

हिंदू समाज पार्टी नेता कमलेश तिवारी की सनसनीखेज हत्‍या के आरोपी पकड़े गए हैं. इसी बीच अटॉप्‍सी रिपोर्ट भी सामने आई है. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्‍टर्स के मुताबिक, तिवारी को कम से कम 15 बार चाकू मारा गया था. हत्‍यारे मिठाई के डिब्‍बे में चाकू छिपाकर लाए थे. 18 अक्‍टूबर को तिवारी की लखनऊ के नाका हिंडोला इलाके में हत्‍या कर दी गई थी.

पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि छाती पर बायीं तरफ एक ही जगह पर चाकू के सात वार किए गए. तिवारी के शरीर में करीब 3-4 सेंटीमीटर तक चाकू भीतर गया. चाकू से वार सिर्फ 10 सेंटीमीटर के भीतर जबड़े से लेकर छाती तक किए गए हैं. सीने, जबड़े पर चाकुओं से वार के बाद गला रेता गया. पीठ पर भी चाकू के निशान मिले.

कमलेश तिवारी, कमलेश तिवारी मर्डर केस: पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
कमलेश तिवारी की पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट.

पीएम रिपोर्ट यह भी बताती है कि तिवारी के चेहरे पर एक गोली भी मारी गई, सिर के पीछे हिस्से में 32 बोर की गोली फंसी मिली. गला रेतने के दो गहरे जख्म मिले हैं. पुलिस को यह बात समझ नहीं आ रही कि घर के ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद तिवारी की पत्‍नी और गार्ड को गोली चलने की आवाज कैसे नहीं सुनाई दी.

कौन थे कमलेश तिवारी?

हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी ने वर्ष 2017 जनवरी में ही हिंदू समाज पार्टी की स्थापना की थी. उन्होंने पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी अत्यधिक विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के उद्देश्य से किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं व धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना) के तहत उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया और उन्हें एक साल तक जेल में रहना पड़ा. 2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनके खिलाफ एनएसए रद्द कर दिया था. बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया. तिवारी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के स्वयंभू अध्यक्ष थे और उनके इस दावे का कई बार महासभा ने विरोध किया था.

आखिरकार 2017 में तिवारी ने हिंदू समाज पार्टी बनाई और हिंदू कट्टरपंथी के रूप में उभरने के लिए कई प्रयास किए. इसी क्रम में तिवारी ने सीतापुर में अपनी पैतृक जमीन पर नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का ऐलान किया था. लेकिन वह कभी शुरू नहीं हो सका. तिवारी ने 2012 में भी चुनावी राजनीति में उतरने का असफल प्रयास किया था. वह लखनऊ से विधानसभा चुनाव लड़े थे और हार गए थे. राम जन्मभूमि मामले में वह सुप्रीम कोर्ट में कुछ दिनों तक हिन्दू महासभा की तरफ से पक्षकार भी रहे थे.

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