कमलेश तिवारी हत्याकांड: सुलझ गई गुत्थी लेकिन 100 घंटे बाद भी नहीं पकड़े गए दोनों संदिग्ध

हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी ने वर्ष 2017 जनवरी में ही हिंदू समाज पार्टी की स्थापना की थी. उन्होंने पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.

हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष और हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी (Kamlesh Tiwari murder case) की हत्या के लगभग 100 घंटे बाद भी दोनों संदिग्ध फरार हैं. हालांकि यूपी और गुजरात पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 लोगों को साज़िश रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया है.

इस दौरान शाहजहांपुर से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें हत्यारों को देखे जाने की बात सामने आ रही है. सूत्रों की मानें तो पुलिस को एक होटल के सीसीटीवी से दोनों आरोपियों का फुटेज मिला है. ये आरोपी शाहजहांपुर में रुके थे, लेकिन एसटीएफ के पहुंचने की भनक मिलते ही अंडरग्राउंड हो गए. एसटीएफ ने आरोपियों की कार के ड्राइवर को अरेस्ट किया है और उससे पूछताछ कर रही है.

वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद से ही एसटीएफ ने होटलों और मदरसों के मुसाफिरखानों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है.

फुटेज सामने आने के बाद से एसटीएफ शाहजहांपुर में डेरा जमाए हुए है. सूत्रों की मानें तो कमलेश तिवारी हत्या के संदिग्ध हत्यारे लखीमपुर जिले के पलिया से इनोवा गाड़ी बुक कराकर शाहजहांपुर पहुंचे थे.

रेलवे स्टेशन पर होटल पैराडाइज में लगे कैमरे की सीसीटीवी फुटेज में इन दोनों संदिग्ध हत्यारों को देखे जाने का दावा किया जा रहा है. दोनों संदिग्धों ने रेलवे स्टेशन पर इनोवा गाड़ी छोड़ दी और पैदल रोडवेज बस स्टैंड की तरफ जाते हुए दिखाई दिए. एसटीएफ ने इनोवा गाड़ी के ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है. इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि संदिग्ध शाहजहांपुर में ही कहीं छिपे हुए हैं. एसटीएफ की छापेमारी से होटल वाले सकते में हैं.

फेसबुक के जरिये जुड़ा था हत्यारा

कमलेश तिवारी (Kamlesh Tiwari murder case) की हत्या का एक प्रमुख संदिग्ध उनसे एक फर्जी फेसबुक अकांउट के जरिए मित्र बना था. उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स सूत्रों के अनुसार, उनके गुजरात के समकक्षों ने पाया कि हमलावारों में से एक की पहचान अशफाक हुसैन के रूप में हुई है, उसने ‘रोहित सोलंकी’ के नाम से अकांउट बनाया और तिवारी से दोस्त बना.

तिवारी ने सोलंकी से 18 अक्टूबर को मिलने की सहमति जताई थी. 18 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे के क़रीब तिवारी की हत्या हुई.

हुसैन व मोइनुद्दीन पठान की मुख्य हमलावरों के रूप में पहचान की गई है. उनकी पहचान की पुष्टि जिस होटल में वे ठहरे थे उसके सीसीटीवी फुटेज के जरिए की गई है और पुलिस ने उनके कमरे से खून के धब्बों वाला कपड़ा व एक तौलिया बरामद किया है.

इस बीच यूपी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने हत्या के आरोपी फरीद उर्फ मोइन खान पठान और अशफाक खान पठान पर ढाई-ढाई लाख रुपये का इनाम घोषित किया है.

क्या हुआ था 18 अक्टूबर को

शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) को लखनऊ में दिन दहाड़े कमलेश तिवारी (Kamlesh Tiwari murder case) की गोली मारकर हत्या कर दी गई. उन्हें तत्काल ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. खबरों के मुताबिक, कमलेश तिवारी से नाका के खुर्शीद बाग स्थित ऑफिस में दो लोग मिलने पहुंचे थे. ये दोनों मिठाई का डिब्बा लिए हुए थे, जिसमें चाकू और बंदूक थी. बताया जा रहा है कि दोनों ने कमलेश तिवारी से मुलाकात की. बातचीत के दौरान दोनों बदमाशों ने कमलेश के साथ चाय भी पी. इसके बाद उनकी हत्या करके फरार हो गए. तिवारी को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

कौन है कमलेश तिवारी(Kamlesh Tiwari murder case)

हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी (Kamlesh Tiwari murder case) ने वर्ष 2017 जनवरी में ही हिंदू समाज पार्टी की स्थापना की थी. उन्होंने पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के उद्देश्य से किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं व धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना) के तहत उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया और उन्हें एक साल तक जेल में रहना पड़ा. 2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनके खिलाफ एनएसए रद्द कर दिया था. बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया.

तिवारी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के स्वयंभू अध्यक्ष थे और उनके इस दावे का कई बार महासभा ने विरोध किया था.

आखिरकार 2017 में तिवारी ने हिंदू समाज पार्टी बनाई और हिंदू कट्टरपंथी के रूप में उभरने के लिए कई प्रयास किए. इसी क्रम में तिवारी ने सीतापुर में अपनी पैतृक जमीन पर नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का ऐलान किया था. लेकिन वह कभी शुरू नहीं हो सका.

तिवारी ने 2012 में भी चुनावी राजनीति में उतरने का असफल प्रयास किया था. वह लखनऊ से विधानसभा चुनाव लड़े थे और हार गए थे. राम जन्मभूमि मामले में वह सुप्रीम कोर्ट में कुछ दिनों तक हिन्दू महासभा की तरफ से पक्षकार भी रहे थे.