मेरठ के प्रह्लाद नगर में स्थानीय निवासियों ने बताई हिंदुओं के पलायन की असली वजह

एक अन्य निवासी कहते हैं वो सन 1955 से ही यहां रहते हैं उनका जन्म भी यहीं हुआ था लेकिन यहां के हालात पिछले पांच सालों में ख़राब हुए हैं.


नई दिल्ली: आख़िर मेरठ में हिंदू समुदाय के लोग अपना घर-बार छोड़कर क्यों भाग रहे है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए TV9 Bharatvars ने प्रह्लाद नगर के स्थानीय लोगों से बात की और जानने की कोशिश की पलायन का सच?

मेरठ के एक युवा स्थानीय निवासी बताते हैं, ‘शरारती तत्व बाइक से आते हैं और फ़ोन छीनकर भाग जाते हैं. किसी के पास आईफोन है किसी के पास चेन है. दिनहदाड़े लड़कियों को छेड़ते हैं और फ़ायरिंग तो यहां बेहद सामान्य बात है, अभी भी सुना है.’

वहीं एक अन्य निवासी कहते हैं कि ‘सड़कों पर बाईक से स्टंट करते हैं. गलियों और मेन रोड पर तेज़ बाईक्स चलती हैं. छेड़खानी की घटना यहां अब बेहद सामान्य लगने लगी है. बच्चों में इन सबका इतना ख़ौफ़ है कि वो ट्यूशन जाने से भी कतराते हैं. बच्चे तो छोड़ दीजिए हमलोगों को भी सड़क पार करने में डर लगता है.’

हमारे संवादाता जितेंद्र शर्मा ने कॉलोनी के लोगों से बात की.

सुशील भोला कहते हैं, औरतों को काफी परेशानी है. महिलाएं या बच्चे जब भी बाहर निकलते हैं उनके साथ कोई-न-कोई हादसा होता ही है. 10 में से 9 बार उनको परेशानी झेलनी होती है. महिलाएं समस्यायें झेलकर अब उनकी आदी हो चुकी हैं कई बार तो वो अपने परिजनों को बताने में भी हिचकती हैं. करें तो क्या करें.’

एक स्थानीय महिला के मुताबिक, ‘समस्या जितनी दिख रही है असल में उससे भी ज़्यादा गंभीर है. शरारती तत्व बच्चों को बाईक से धक्का दे देतें हैं, महिलाओं को छेड़ते हैं. अगर किसी महिला ने आपत्ति ज़ाहिर कर दी तो उनपर फब्तियां कसते हैं.. वो करें तो क्या करें..’

जीतेंद्र शर्मा ने पूछा कि आपने गलियों में दरवाजे क्यों लगा रखें हैं?

इसके जवाब में स्थानीय महिला कहती हैं, ‘बच्चे जब भी खेलते हैं तो वे लोग बाइक पर स्टंट करने लग जाते हैं. जिसकी वजह से गलियों में भी बच्चे सेफ़ नहीं हैं. कई बच्चों के अपहरण का मामला भी सामने आ चुका है जिससे हमलोग दहशत में हैं.’

एक अन्य निवासी कहते हैं ‘वो सन 1955 से ही यहां रहते हैं उनका जन्म भी यहीं हुआ था लेकिन यहां के हालात पिछले पांच सालों में ख़राब हुए हैं. ये लोग दुकानों पर आते हैं कोल्ड ड्रिंक पीते हैं और आधे-पौने घंटे तक यहीं पर खड़े होकर गली मुहल्लों से गुजरने वाली महिलाओं और लड़कियों को घूरते रहते हैं. गली के बाहर गेट लगा दी है इसके बावजूद वो जान-बूझकर इधर से ही आते हैं.’

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सुशील भोला बताते हैं कि ‘विकासपुरी, श्यामनगर, लखीपुरा, और महमुदपुर पूरी तरह से ख़ाली हो चुका है अब प्रह्लाद नगर भी ख़ाली होता जा रहा है. यहां भी पांच सौ से ज़्यादा परिवार अब तक पलायन कर चुके हैं.’

एक अन्य निवासी कहते हैं, ‘सुबह 6 बजे मंदिरों मे आकर देखिए कोई लड़की माथा चेकने तक नहीं जाती. मां-बाप किसी लड़की को मंदिर नहीं जाने देते हैं. कोई महिला भी वहां नहीं जाती है. सुबह पांच बजे महिलाओं के साथ लूट-पाट की घटना होती है. उनके कान से बालियां खींच लेते हैं.’

कुल मिलाकर ख़राब क़ानून-व्यवस्था की वजह से मोहल्ले के लोगों में दहशत है.

हालांकि जब नमो एप पर इस घटना की शिकायत मिली तो पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया. मामले की छानबीन शुरू हुई और सड़को पर पुलिस का रैला दिखने लगा.

मेरठ ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) प्रशांत कुमार इस मामले को लेकर कहते हैं, ‘यहां की स्थानीय समस्यायें हैं जिसका तात्कालिक समाधान भी निकाला गया है. वहां पर बैरिकेटिंग लगाकर परमानेंट पिकटिंग की व्यवस्था की जाएगी. इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए सीसीटीवी भी लगाए जाएंगे. जिससे कि पुलिस कंट्रोल रूम से भी इलाक़े पर निगेहबानी की जा सके. इसके अतिरिक्त स्थानीय लोग अपनी समस्याएं लिख कर देंगे और हमलोग उस आधार पर परीक्षण करेंगे.’

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