Ayodhya Case: ‘औरंगजेब सबसे उदार शासकों में से एक, हिंदुओं के पास सीमित जानकारी’

माना जा रहा है कि 17 नवंबर को रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई 15 नवंबर से पहले अपना फैसला अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद मामले में दे देंगे.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आज अयोध्या मामले (Ayodhya Case) की 39वें दिन की सुनवाई ख़त्म हो गई. आइये जानते हैं कोर्ट में कौन क्या दे रहा है दलील…

  • क्या यह अदालत 500 से अधिक मस्जिदों की खुदाई करने की अनुमति देगी, जो दावा करते हैं कि वे कुछ मंदिरों पर बनाए गए हैं?: मुस्लिम पक्ष ने SC से पूछा
  • धवन ने कहा कि जब भी नई सरकार दिल्ली में सत्ता में आती है, इतिहास को दोबारा लिखने को कोशिश की जाती है. दिल्ली में सरकार बदल जाने से इतिहास को नही बदला जा सकता. भारत यूरोप की तुलना में अधिक जटिल था. युद्ध और विजय के मामले में. मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम शासकों को कैसे नाजायज कहा जा सकता है. मुग़ल बादशाह औरंगजेब को सबसे लिबरल बादशाह था.
  • धवन- औरंगजेब सबसे उदार शासकों में से एक था. धवन ने कहा कि हिंदुओं के पास बहुत सीमित जानकारी है. इस्लामिक लॉ बहुत ही जटिल है.
    हिंदू पक्षकार के वकील PN मिश्रा ने राजीव धवन की इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि राजीव धवन कैसे कह सकते हैं हमको कम जनाकारी है.CJI रंजन गोगोई ने मज़ाक़ में कहा कि राजीव धवन को अनलिमिटेड जनाकारी है.
  • धवन ने कहा कि अगर एक बार कोई संपत्ति वक़्फ़ को दे दी जाती है तो वह हमेशा के लिए उसकी हो जाती है. हमको 1528 में नहीं जाना चाहिए. हमको पता है कि वहां पर मस्जिद थी और वहा नमाज़ पढ़ी जाती थी.
  • मुस्लिम पक्ष- एक मस्जिद हमेशा एक मस्जिद रहेगी. यहां तक ​​कि तोड़फोड़ मस्जिद के चरित्र को दूर नहीं करेगी. अयोध्या में ध्वस्त संरचना अभी भी एक मस्जिद है.
  • धवन ने कहा कि जस्टिस खान और जस्टिस शर्मा की राय एक दूसरे से अलग थी. जस्टिस खान ने कहा था कि मस्जिद बनाने के लिए किसी स्ट्रक्चर को ध्वस्त नहीं किया गया था, जबकि जस्टिस शर्मा की राय इससे अलग थी.धवन- जीलानी ने सही कहा था कि 1885 से पहले के किसी भी दस्तावेज को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. 1885 से पहले के जो दस्तावेज़ हिन्दू पक्ष के पास हैं, वह विदेशी यात्रियों की किताबें, स्कंद पुराण और दूसरी किताबें हैं.धवन- कुरान के अनुवाद के लिए खास तरह की grammar और बहुत सी चीजों की ज़रूरत होती है. हिंदुओं का यह दायित्व था कि वह इसका सही अर्थ समझते और सही grammar के साथ ज़रूरी अनुवाद को कोर्ट के सामने रखते. सिर्फ कुछ बातों का अर्थ निकाल कर कुछ भी नहीं कह सकते.
  • धवन- इस्लामी कानून 15 शताब्दियों में विकसित हुआ. हमने पर्सनल लॉ तक सीमित कर दिया है. हम कानून के साथ काम कर रहे हैं. ऐसे में कुरान या हिंदू धर्मग्रंथों के कुछ हिस्सों को चुनने और बताने की जरूरत नहीं है.
  • धवन- हम भारत को एक अखंड इकाई की तरह मान रहे हैं. उत्तर भारत में प्रथाएं मूल रूप से दक्षिण से भिन्न अन्य भागों से अलग हैं, फिर भी हम एक समानता मानने की कोशिश करते हैं.
  • राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्षकार केंद्र गुम्बद के नीचे भगवान राम के जन्म स्थान को साबित करने में नाकाम रहे. एक आंदोलन इस पर आधारित है. हिंदुओं ने खुद माना है कि 1989 तक उनके पास सीमित अधिकार थे.
  • राजीव धवन- हिंदू यह साबित नहीं कर पाए कि भगवान राम का जन्म भीतरी प्रांगण के गुंबद के नीचे हुआ था. जो प्रार्थना की गई थी उसे साबित करने के लिए कुछ भी नहीं. किसी मूर्ति को छोड़कर किसी भी संरचना में विश्वास दिखाने का कोई सबूत नहीं है. राम जन्मभूमिन्यास मस्जिद को नष्ट करने के उद्देश्य से बनायीं गयी थी.
  • जस्टिस DY चंद्रचूड़- 22-23 दिसंबर को विवादित ढांचे के अंदर मूर्तियों की स्थापना की गई. मुस्लिम पूजा को इसमें स्थान नहीं दिया गया.
    राजीव धवन- हिंदुओं ने कहा कि मस्जिद को बिना प्रार्थना के छोड़ दिया गया था. प्रार्थना मालिकाना हक निर्धारित नहीं करती.धवन ने कहा कि अगर मैं दो साल के लिए बाहर चला जाऊं तो मेरे घर और ज़मीन से मेरा मालिकाना हक नहीं खत्म हो जाता.
  • धवन- 1934 के दंगों और बाबरी मस्जिद के एक गुंबद के भीतर 1949 में भगवान राम की मूर्तियों को स्थापित करने के लिए अत्याचार क्यों हुआ? अगर उनके पास पहले से ही मालिकाना हक था… तो उन्हें यह सब क्यों करना पड़ा?
  • धवन- हिंदुओं ने कहा कि मस्जिद को बिना प्रार्थना के छोड़ दिया गया था. प्रार्थना मालिकाना हक निर्धारित नहीं करती परित्याग करती है. धवन ने कहा कि अगर मैं दो साल के लिए बाहर चला जाऊं तो ज़मीन से मेरा मालिकाना हक नहीं खत्म होगा.
  • धवन ने कहा कि अगर मस्जिद में नमाज़ ना भी पढ़ी जाए तो भी उसका मस्जिद होने का अस्तित्व बरकरार रहता है.
    जस्टिस चन्द्रचूड़ ने कहा कि 23 दिसंबर 1949 के बाद वहां पर नमाज़ नहीं पढ़ी गई, लेकिन पूजा की जाती रही है.
  • धवन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष का मुकदमा लिमिटेशन के दायरे के अंदर आता है. हमने अपना मुकदमा लिमिटेशन खत्म होने के 4 दिन पहले दाखिल किया था.
  • राजीव धवन ने फैज़ाबाद कोर्ट के आदेशों के बारे में बताते हुए कहा कि अंतरिम आदेश सिर्फ स्टेटस को यानी यथास्थिति बनाए रखना होता है. अंतरिम आदेश के तहत मालिकाना हक़ नही दिया जा सकता.
  • धवन ने कहा कि कई बार हिंदुओं की ओर से अतिक्रमण किया गया. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से मुस्लिमों के अधिकार की रक्षा का निर्देश भी हुआ. यह साफ करता है कि मालिकाना हक मुस्लिमों का है.
  • हमने 6 दिसंबर 1992 को ढांचा गिराए जाने के बाद अपनी मांग बदली और हमारी यही मांग है कि हमें 5 दिसंबर 1992 की स्थिति में जिस तरह का ढांचा था उसी स्थिति में हमें मस्जिद सौंपी जाए.
  • धवन ने कहा अवैध कब्जे को लेकर मुस्लिम पक्ष कोई प्रूफ नहीं दे पाया. यह बिल्कुल गलत है. निर्मोही अखाड़े के लोगों ने 1934 में जबरन कब्जा किया.
  • धवन ने कहा कि आस्था, स्कंद पुराण, विदेशी यात्रियों के आधार पर उनको मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता. मुस्लिम का मालिकाना हक के ऊपर कभी कोई सवाल नहीं रहा. पहले उनको पूजा का अधिकार मिला. अब यह मालिकाना हक की बात कर रहे हैं.
  • धवन ने कहा कि यहां पर जिस तरह की दलीलें रखी गईं, उनका कोई तुक नहीं था. हमारी अपील हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें मालिकाना हक का बंटवारा कर दिया गया.
  • धवन ने कहा कि महज आस्था के नाम पर कानून के तहत किसी को विवादित स्थल पर अधिकार नहीं दिया जा सकता. धवन ने कहा कि बोर्ड की अपील पर बेवजह के पक्षों को बोलने का समय नहीं दिया जाए. सिर्फ वास्तविक पक्षकारों को मौका दिया जाए. धवन ने कहा कि हमारी अपील मालिकाना हक, धर्म निभाने और कब्जा वापस दिलाने को लेकर है.
  • धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष के पास कोई मालिकाना हक का दस्तावेज़ नहीं है और ना ही था. यह वक्फ की संपत्ति अंग्रेजों के समय से है और हिंदुओं ने जबरन कब्जा किया. धवन ने कहा कि क्यों उन्हें पूजा का और सेवादार होने का अधिकार दिया गया जबकि उनके पास मालिकाना नहीं था.
  • धवन ने कहा कि इससे उन्हें निर्देशात्मक अधिकार तो मिलेगा, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं. जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि कई दस्तावेज हैं जो दिखाते हैं कि वह बाहरी आंगन में रहते थे. धवन ने कहा कि किसी के पास एक भी दस्तावेज नहीं है जो दर्शाता हो कि उनका इस जमीन पर मालिकाना हक है.
  • धवन ने कहा कि विवादित ज़मीन पर लगातार हमारा कब्जा रहा है और हिंदू पक्ष ने बहुत देर से दावा किया. 1989 से पहले हिंदू पक्ष ने कभी ज़मीन पर मालिकाना दावा पेश नहीं किया. 1986 में रामचबूतरे पर मंदिर बनाने की महंत धर्मदास की मांग को फैज़ाबाद कोर्ट खारिज कर चुका है.
  • जस्टिस चंद्रचूड़ के सवाल पर जवाब देते हुए धवन ने कहा कि 1886 के रिकॉर्ड यह साफ करते हैं कि भूमि किसकी है. प्वाइंट ये है कि इसमें हमारा अधिकार है. जब हिंदुओं की तरफ से अधिकार का सवाल 1886 में उठाया गया, तब मजिस्ट्रेट ने वह सिविल सूट खारिज कर दिया. लेकिन रेस ज्यूडी काटा होने के बाद फिर अवैध कब्जे के बाद दावा किया गया.
  • जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने राजीव धवन से हिंदुओं के बाहरी अहाते पर कब्ज़े के बारे में पूछा. जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि 1858 के बाद के दस्तावेजों से पता चलता है कि राम चबूतरा की स्थापना की गई थी, उनके पास अधिकार था.राजीव धवन ने कहा कि इस केस की सुनवाई के दौरान सभी सवाल हमसे ही किये जाते थे. कभी हिंदू पक्ष से सवाल नहीं किया जाता. सुनवाइयों के दौरान यह बहुत विचित्र चीज़ हुई.
  • धवन ने कहा कि यहां पर दरवाजे इसलिए खुलवाए गए, क्योंकि वहां पर लोगों की जान खतरे में थी और पूर्व के न्यायिक आदेशों को इसमें नजरअंदाज किया गया. धवन ने कहा कि हिंदुओं ने दावा किया कि वहां पर मंदिर बनाएंगे.
  • धवन- पुरातत्व एक विज्ञान है. ये कोई विचार नहीं है. पुरातत्व विभाग का जो नोट सबूत के तौर पर कोर्ट ने स्वीकार किया, उसे कोर्ट द्वारा परखा जाना और ASI द्वारा उसकी सत्यता साबित किया जाना जरूरी है. इसे मुस्लिम पक्षकारों ने नकारा है.धवन- ब्रिटिश सरकार ने मस्जिद के रखरखाव के लिए 1854 से ग्रांट देना शुरू किया था. ये हमारे मालिकाना हक को दर्शाता है. यहां तक कि 1854 से 1989 तक किसी भी हिंदू पक्षकार ने विवादित जमीन पर अपने मालिकाना हक का दावा कोर्ट में नहीं किया.
  • धवन ने कहा कि ताला खुलने के बाद भी हिंदुओं का वहां पर कब्ज़ा नहीं रहा. हिंदुओं के पास सिर्फ पूजा का अधिकार रहा है.
  • धवन ने कहा कि डोम के पूर्वी द्वार मुस्लिमों के प्रयोग में थे. हिंदुओं को सिर्फ पूजा का अधिकार मिला था और ऐसे में मालिकाना हक उन्हें नहीं मिल जाता. राजीव धवन ने कहा कि हमने कभी कब्ज़ा नहीं गंवाया और उसी का सही कब्ज़ा होता है जिसके पास पहले से कब्ज़ा रहा हो. हिदुओं के पास कभी भी कब्ज़ा नहीं रहा. वह बाहर चबूतरे पर पूजा करते थे. डोम के भीतर पूजा का अधिकार दिए जाने से पहले.
  • राजीव धवन ने कहा कि ASI की रिपोर्ट में किसी मंदिर के ध्वस्त करने की बात नहीं कही गई. धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष की तरफ से जिन फैसलों का हवाला दिया गया है, उसमें तथ्य सही नहीं थे.
  • राजीव धवन ने कहा कि अवैध कब्जा होने की स्थिति में वास्तविक मालिक को अधिकार मिलता है और निर्मोही अखाड़ा 1934 से अपना कब्जा स्पष्ट करता है. ऐसे में सुन्नी वक्फ बोर्ड का मालिकाना हक छीना नहीं जा सकता.
  • धवन ने कहा कि पुरातत्व विभाग की एक रिपोर्ट मस्जिद को ढहाए जाने के बाद आई. इसमें यह सामने नहीं आया कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई थी.
  • धवन ने कहा कि 1885- 86 में जब उनके दावे को मंजूरी नहीं मिली तो अब उनका दावा नहीं बनता.
  • धवन ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर रामलला विराजमान की ओर से दी गई दलील पर कहा कि विभाग सिर्फ विशेष राय देता है. उसे पुख्ता नहीं माना जा सकता. परंपरा और आस्था कोई दिमाग का खेल नहीं है. इन्हें अपने मुताबिक नहीं ढाला जा सकता है.
  • धवन ने कहा कि वह आज पूरा दिन दलील देंगे. 2 घंटे में वह अपनी बात पूरी तरह से नहीं रख पाएंगे.
  • इसके बाद धवन ने कहा कि एक को जब कोई विशेष छूट मिलती है तो अन्य फायदा उठाते हैं. अनुशासन नहीं रहता. इसी वजह से अक्सर मैं देखता हूँ कि कुछ नॉन एक्रीडेटेड मीडियाकर्मी और उनके संपादक अपनी बाउंड्री क्रॉस कर कोर्ट रिपोर्टिंग के लिए कोर्ट रूम में आगे तक आ जाते हैं, जबकि उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है.नियम अनुसार उन्हें केवल विजिटर गैलरी में खड़े होने की अनुमति है. कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए. नियम सभी के लिए एक होने चाहिए. चाहे वो कोई भी हो. CJI ने इस पर कुछ नहीं कहा. राजीव धवन ने अपनी दलीलें शुरू की.
  • धवन ने हिंदू पक्षकारों के साथ पहली कतार में सुब्रह्मण्यम स्वामी के बैठने पर आपत्ति जाहिर की. उन्होंने कहा कि जब विजिटर को गैलरी से आगे आने की अनुमति नहीं है तो इन्हें क्यों आगे बैठने दिया जा रहा है. कोर्ट को अनुशासन बरकरार रखना चाहिए. इस पर सुब्रह्मण्यम स्वामी कुछ नहीं बोले. सीजेआई ने कहा हम देखेंगे.
  • धवन ने कहा कि मुख्य मांग यह थी कि मस्जिद का उपयोग नहीं किया जाए. लेकिन मस्जिद पर अवैध कब्जा किया गया और उसके बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. धवन ने अवैध कब्जे पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया.
  • राजीव धवन की दलीलों पर रामलला विराजमान के वकील ने उठाया सवाल, कहा फिर से पुराना बोल रहे हैं
  • सुन्नी वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट को तीन नोट सौंपे.
  • अयोध्या में संतों ने रिसीवर को पत्र लिखकर मांगी दीवाली पर राम जन्मभूमि पर दीप जलाने की अनुमति.