अमेठी में राहुल हारे तो कन्‍नौज में डिंपल, जानिए यूपी की VIP सीट्स पर क्‍या रहे नतीजे

कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी पुश्‍तैनी सीट नहीं बचा सके. डिंपल यादव भी मोदी लहर में कन्‍नौज से हार गईं.

नई दिल्‍ली: 2019 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्‍तर प्रदेश की राह कहीं से आसान नहीं थी. भले ही 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को यूपी में बंपर सीटें मिली हों, मगर दो साल बाद हालात बदल चुके थे. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ मिलकर बीजेपी से लड़ने को तैयार थे. जातिगत समीकरण ऐसे बैठे कि सबको लगा कि यूपी में ही भाजपा को सबसे ज्‍यादा नुकसान होगा, मगर नतीजों में वैसा नहीं दिखा.

एक-दो सीटों पर हार से बीजेपी को थोड़ी निराशा जरूर हुई होगी, मगर ओवरऑल उसका प्रदर्शन शानदार रहा. यूपी की 80 में से बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने 64 सीटें जीतीं. आइये जानते हैं कि यूपी की वीआईपी सीटों पर क्‍या नतीजे रहे.

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब पौने पांच लाख सीटों के अंतर से दोबारा संसद पहुंचे. सपा प्रत्‍याशी शालिनी यादव और कांग्रेस के अजय राय कहीं से भी मोदी को चुनौती देने की स्थिति में नहीं दिखे.

अमेठी: इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर हुआ अमेठी में. कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी अपनी पुश्‍तैनी सीट नहीं बचा सके. केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी ने राहुल को 55,210 वोटों के बड़े अंतर से हराया. ईरानी 2014 में यहां से हारने के बाद से लगातार क्षेत्र में बनी रहीं और लोगों को साथ जोड़ती रहीं. राहुल की हार इसलिए और भी बड़ी हो जाती है क्‍योंकि सपा-बसपा ने यहां उम्‍मीदवार नहीं उतारा था. मायावती ने अपने कैडर से राहुल गांधी को जिताने की अपील भी की थी. राहुल की बहन प्रियंका गांधी लगातार अपने भाई के लिए प्रचार करती दिखीं मगर चुनाव परिणाम पर उसका फर्क नहीं पड़ा.

रायबरेली: कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर सोनिया गांधी साख बचाने में कामयाब रहीं. पूरे प्रदेश में यही एक सीट है जहां कांगेस जीती है. सोनिया ने बजेपी उम्‍मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 1,67,178 वोटों से हराया. अमेठी की तरह यहां भी सपा-बसपा ने उम्‍मीदवार नहीं उतारा था.

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लखनऊ: गृहमंत्री राजनाथ सिंह दोबारा सांसद चुने गए. गठबंधन ने यहां से शत्रुघ्‍न सिन्‍हा की पत्‍नी पूनम सिन्‍हा को उतारा था, जबकि कांग्रेस बाहर से प्रमोद कृष्‍णम को लेकर आई थी. लखनऊ की जनता ने बाहर उम्‍मीदवार को नकार दिया. सिंह ने रिकॉर्ड वोट से जीत दर्ज की.

मैनपुरी: सपा संस्‍थापक मुलायम सिंह यादव प्रचार के दौरान कहते थे कि यह उनका आखिरी चुनाव है, रिकॉर्ड मतों से जिता दें. बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्‍य ने उनको कड़ी टक्‍कर दी. आख‍िर अपने गढ़ में मुलायम 94,389 वोटों से जीतने में सफल रहे.

आजमगढ़: सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव के सामने बीजेपी ने भोजपुरी अभिनेता दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ को उतारा था. 2014 में यहां से मुलायम जीतकर संसद पहुंचे थे. इस बार अखिलेश ने ‘निरहुआ’ को दो लाख से ज्‍यादा मतों के अंतर से हराया.

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गोरखपुर: मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के गढ़ में बीजेपी के रवि किशन ने बंपर जीत दर्ज की. पहले राउंड से रवि किशन ने जो बढ़त बनाई वो आखिर तक जारी रही. उनकी जीत ऐसी जोरदार थी कि नजदीकी सपा उम्‍मीदवार रामभुआल निषाद के मुकाबले रवि किशन को 3 लाख ज्‍यादा वोट मिले.

कन्‍नौज: पूर्व यूपी सीएम अखिलेश यादव की पत्‍नी डिंपल यादव मोदी लहर में अपनी सीट नहीं बचा सकीं. 2014 में हारने वाले बीजेपी के सुब्रत पाठक ने उन्‍हें इस बार हरा दिया. डिंपल ने चुनावी रैली के दौरान मायावती के पैर छूकर दलितों को साधने की कोशिश की थी, मगर जनता ने उन्‍हें नकार दिया.

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रामपुर: सपा के आजम खां अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहे. बीजेपी ने यहां से अभिनेत्री जया प्रदा को उतारा था. चुनाव प्रचार के दौरान जया पर आपत्तिजनक टिप्‍पणी कर आजम को चुनाव आयोग से फटकार और प्रतिबंध झेलना पड़ा था. आजम ने करीब एक लाख वोट के अंतर से जया को हराया है.

गाजीपुर: यहां से केंद्रीय राज्‍य मंत्री मनोज सिन्‍हा गठबंधन के प्रत्‍याशी अफजाल अंसारी से हार गए. माफिया मुख्‍तार अंसारी के भाई, अफजाल को सीट के जातिगत समीकरणों का फायदा मिला.

फतेहपुर सीकरी: कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष राजबब्‍बर बुरी तरह से हारे. बीजेपी के राज कुमार चाहर ने राजबब्‍बर को लगभग पौने चार लोग वोट के अंतर से हराया. बीजेपी ने यहां से मौजूदा सांसद बाबूलाल चौधरी का टिकट काटा था.

फिरोजाबाद: यहां चाचा-भतीजे की आपसी लड़ाई का फायदा बीजेपी ने उठाया. शिवपाल सिंह यादव और अक्षय यादव की उम्‍मीदवारी से यादव परिवार की लड़ाई का अखाड़ा बनी यह सीट बीजेपी के चंद्रदेव जादौन के हिस्‍से में गई.

मुजफ्फरनगर: राष्‍ट्रीय लोकदल प्रमुख चौधरी अजित सिंह चुनाव हार गए. बीजेपी के डॉ संजीव बालियान ने उन्‍हें हराया. वे दूसरी बार यहां से सांसद चुने गए हैं.

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