BSP से कांग्रेस में शामिल हुए थे MLC नसीमुद्दीन सिद्दीकी, गंवाई UP विधान परिषद की सदस्यता

10 मई, 2017 को BSP के दबंग नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी (Nasimuddin Siddiqui) और उनके बेटे को मायावती ने पार्टी से बर्खास्त कर दिया था. मायावती (Mayawati) ने सिद्दीकी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया था.
Nasimuddin Siddiqui disqualified, BSP से कांग्रेस में शामिल हुए थे MLC नसीमुद्दीन सिद्दीकी, गंवाई UP विधान परिषद की सदस्यता

बहुजन समाज पार्टी (BSP) से कांग्रेस में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी (Nasimuddin Siddiqui) को मंगलवार को UP विधान परिषद की सदस्यता गंवानी पड़ी. विधान परिषद (Legislative Council) के चेयरमैन रमेश यादव ने दलबदल कानून (Defection Law) के तहत उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया.

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IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नसीमुद्दीन सिद्दीकी BSP के टिकट पर 23 जनवरी, 2015 को विधान परिषद के सदस्य बने थे. वह 22 फरवरी, 2018 को BSP छोड़कर कांग्रेस (Congress) में शामिल हो गए थे, जिसके बाद BSP ने नसीमुद्दीन की सदस्यता समाप्त करने के लिए विधान परिषद के चेयरमैन के सामने अर्जी दी, जिस पर मंगलवार को फैसला लिया गया.

15 दिन के भीतर चेयरमैन को फैसला लेने का निर्देश

इस मामले में 9 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ ने 15 दिन के भीतर विधान परिषद के चेयरमैन को फैसला लेने का निर्देश दिया था. इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि 15 दिनों में फैसला नहीं लिया जाता तो याचिका में मांगे गए अंतरिम अनुतोष (Interim Satisfaction) पर विचार किया जाएगा. नसीमुद्दीन सिद्दीकी 23 जनवरी, 2015 को BSP कोटे से MLC बने थे.

एक साल पूरा होने के बाद भी नहीं सुनाया फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता दिनेश चंद्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र मिश्रा और उनके सहयोगी वकील सुनील कुमार चौधरी ने दलील दी कि सदस्यता समाप्त करने की मांग वाली अर्जी पर तीन माह के भीतर फैसला सुनाने के सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी UP विधान परिषद के चेयरमैन ने बीते 29 मई, 2019 को नसीमुद्दीन की सदस्यता समाप्त करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जो एक साल पूरा होने के बाद भी नहीं सुनाया जा रहा है.

दोनों ने लगाए थे एक-दूसरे पर आरोप

बता दें कि 10 मई, 2017 को BSP के दबंग नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे को मायावती ने पार्टी से बर्खास्त कर दिया था. मायावती (Mayawati) ने सिद्दीकी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया था. इसके बाद सिद्दीकी ने मायावती पर 50 करोड़ रुपये की मांग का आरोप लगाते हुए कई ऑडियो मीडिया के सामने लाए थे. 10 महीने बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस जॉइन की थी.

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