Ayodhya: राम जन्मभूमि के आसपास 10 मस्जिद और दरगाह, देते हैं एकता का संदेश

सभी ने राम जन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार किया है. 500 साल पुराने खानकाहे मुजफ्फरिया मकबरे के सज्जादा नशीन और पीर, सैयद अखलाक अहमद लतीफी ने कहा कि अयोध्या (Ayodhya) के मुस्लिम सभी धार्मिक रस्में आजादी से निभाते हैं.
Ram Janmabhoomi and Mosque, Ayodhya: राम जन्मभूमि के आसपास 10 मस्जिद और दरगाह, देते हैं एकता का संदेश

राम जन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) के आसपास मौजूद आठ मस्जिदें और दो ‘दरगाह’ अयोध्या में दो समुदायों की एकता का संदेश दे रहे हैं, जहां राम मंदिर का निर्माण होना है. मुस्लिम इबादत के ये स्थान किलेबंद क्षेत्र के 100 से 200 मीटर के दायरे में स्थित हैं, जहां एक साथ अजान और रामायण पाठ का साउंड सुनाई देता है, जो कि अयोध्या की मिलीजुली संस्कृति का सबूत है.

राम जन्मभूमि से सटी मस्जिदों में होती है नमाज

बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) में जहां 23 दिसंबर 1949 को नमाज बंद हो गई थी, राम जन्मभूमि से सटे इन सदियों पुराने इस्लामिक ढांचों में लगातार पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है, जिसमें एक शिया मस्जिद और इमामबाड़ा शामिल है. इसके अलावा इसमें तहरीबाजार जोगियों की मस्जिद भी शामिल है.

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राम जन्मभूमि के 70 एकड़ के परिसर के पास लगभग आठ मस्जिदें और दो मकबरे हैं. राम जन्मभूमि परिसर से सटी इन मस्जिदों में स्थानीय हिंदुओं की ओर से बिना किसी आपत्ति के इन दिनों अजान और नमाज अदा की जा रही है.

हाजी असद अहमद ने इसे अयोध्या की महानता कहा

राम जन्मभूमि परिसर के पास मौजूद आठ मस्जिदें- मस्जिद दोराहीकुआं, मस्जिद माली मंदिर के बगल, मस्जिद काजियाना अच्छन के बगल, मस्जिद इमामबाड़ा, मस्जिद रियाज के बगल, मस्जिद बदर पांजीटोला, मस्जिद मदार शाह और मस्जिद तेहरीबाजार जोगियों की हैं. दो मकबरों के नाम खानकाहे मुजफ्फरिया और इमामबाड़ा है.

रामकोट वार्ड के काउंसलर हाजी असद अहमद (Haji Asad Ahmed) ने कहा, “यह अयोध्या की महानता है कि राम मंदिर के आस-पास स्थित मस्जिदें पूरी दुनिया को सांप्रदायिक सहयोग का मजबूत संदेश दे रही हैं.” राम जन्मभूमि परिसर अहमद के वार्ड में आता है.

उन्होंने कहा, “मुस्लिम बारावफात का ‘जुलूस’ निकालते हैं, जो राम जन्मभूमि परिसर  से होकर गुजरता है. मुस्लिमों के सभी कार्यक्रमों और रस्मों का उनके साथी नागरिक सम्मान करते हैं.”

“केवल बाबरी मस्जिद के ढांचे को लेकर था विवाद”

राम जन्मभूमि परिसर से सटी मस्जिदों के बारे में टिप्पणी करते हुए मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (Satyendra Das) ने कहा, “हमारा विवाद बस उस ढांचे से था, जो बाबर (मुगल शासक) के नाम से जुड़ा था. हमें अयोध्या में अन्य मस्जिदों और मकबरों से कोई दिक्कत कभी नहीं रही. यह वह नगरी है जहां हिंदू-मुस्लिम शांति से रहते हैं.”

दास ने कहा, “मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं और हम अपनी पूजा करते हैं. राम जन्मभूमि परिसर से सटी मस्जिदें अयोध्या के सांप्रदायिक सद्भाव और एकता को मजबूत करेंगी और शांति कायम रहेगी.” उन्होंने कहा, “हिंदू और मुस्लिम दोनों ने राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार किया है. हमारा एक-दूसरे से कोई विवाद नहीं है.”

अयोध्या के मुस्लिम आजादी से निभाते हैं धार्मिक रस्में

500 साल पुराने खानकाहे मुजफ्फरिया मकबरे के सज्जादा नशीन और पीर, सैयद अखलाक अहमद लतीफी ने कहा कि अयोध्या के मुस्लिम सभी धार्मिक रस्में आजादी से निभाते हैं. उन्होंने कहा, “हम खानकाहे की मस्जिद में पांच बार नमाज पढ़ते हैं और सालाना ‘उर्स’ का आयोजन करते हैं.”

राम जन्मभूमि परिसर से सटे सरयू कुंज मंदिर के मुख्य पुजारी, महंत युगल किशोर शरण शास्त्री (Kishor Sharan Shastri) ने कहा, “कितना बेहतरीन नजारा होगा- एक भव्य राम मंदिर जिसके आस-पास छोटी मस्जिदें और मकबरे होंगे और हर कोई अपने धर्म के हिसाब से प्रार्थना करेगा. यह भारत की वास्तविक संस्कृति का परिचय देगा.” (IANS)

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