‘अब तक हुई वोटिंग में कांग्रेस-महागठबंधन के बीच बंट गया मुस्लिम वोट’, सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से मुकेश राजपूत 20 साल बाद फर्रुखाबाद सीट पर कमल खिलाने में कामयाब रहे थे.

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक इंटरव्यू के दौरान ऐसी बात बोली है जिससे पार्टी को दिक्कत हो सकती है. खुर्शीद ने कहा कि लोकसभा चुनावों में अब तक हुई वोटिंग में मुस्लिम वोटों में महागठबंधन और कांग्रेस के बीच बंटवारा हो गया है.

2019 लोकसभा चुनावों में अब तक छ: चरणों के मतदान हो चुके हैं. सातवें चरण का मतदान 19 मई को होने वाला है. उससे पहले खुर्शीद का ये बयान सियासी मौसम में गर्मी पैदा कर सकता है.

‘मुस्लिम समुदाय ने नहीं बनाई रणनीति’
एक न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के दौरान बहस के मुद्दे को बदल रहे हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि ‘हार रहे हैं और हताश हैं. उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से चुनाव लड़ रहे खुर्शीद ने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने इस फैले हुए राज्य में रणनीति बनाकर वोट नहीं डाला है, जैसा कि इसने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में किया था और कई जगहों पर वोट बंटे हुए हैं.

बंट गया वोट बैंक
उन्होंने कहा, “मुस्लिम वोट बिखरे हुए हैं. कई जगहों पर यह कांग्रेस को मिला है. कुछ जगहों पर यह गठबंधन और कांग्रेस के बीच बंट गया है. कुछ जगहों पर यह मजबूती के साथ गठबंधन को मिला है. लेकिन मुस्लिमों ने उस तरह से वोट नहीं किया है जैसा उन्होंने पिछली बार बिहार में किया था. बिहार में रणनीति बनाकर वोट दिया गया था, वहां खंडित वोट नहीं दिए गए थे.”

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उनका वोट बंटना एक अच्छा विचार नहीं है- खुर्शीद
कांग्रेस नेता ने कहा कि अल्पसंख्यकों को वोट बंटना एक दुखद मामला है. उन्होंने कहा, “मुस्लिम मतदाता कई जगहों पर असमंजस की स्थिति में हैं, जो एक खराब बात है, क्योंकि यह संसदीय चुनाव है और उनका भविष्य पूरी तरह से कांग्रेस या राष्ट्रीय पार्टी के साथ है. उनका वोट बंटना एक अच्छा विचार नहीं है, लेकिन आप मतदाताओं पर आरोप नहीं लगा सकते. मतदाता अपने स्थानीय मुद्दे और अन्य चीजों को लेकर चिंतित हैं.”

विवादास्पद बयान पर बोले खुर्शीद
सैम पित्रोदा और मणिशंकर अय्यर के विवादास्पद बयान पर उन्होंने कहा, “मीडिया ने इसे उछाल दिया और पार्टी के पास सिवाय स्टैंड लेने के कोई उपाय नहीं बचा. सच कहूं तो यह गैर-मुद्दे हैं. ये वे मामले हैं जो पहले हो चुके हैं. इन सब मुद्दों पर कांग्रेस का क्या पक्ष है ये सभी जानते हैं.”

फर्रुखाबाद का राजनैतिक इतिहास
फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर पहली बार 1957 में चुनाव हुआ और कांग्रेस के मूलचंद दूबे यहां से जीतकर सांसद पहुंचे. इसके बाद 1962 में भी मूलचंद जीतने में सफल रहे, लेकिन 1962 में ही चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के राममनोहर लोहिया ने जीत हासिल की है. हालांकि 1967 में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और 1971 तक दबदबा कायम रहा, लेकिन 1977 में भारतीय लोकदल के दयाराम शाक्य ने कांग्रेस के अवधेश चन्द्र सिंह को हराकर कब्जा जमाया. इसके बाद कांग्रेस ने 1984 में वापसी की और खुर्शीद आलम खान सांसद बने, लेकिन पांच साल के बाद 1989 में हुए चुनाव में संतोष भारतीय जनता दल से जीतने में कामयाब रहे.

2014 में खिला था कमल
साल 1991 में कांग्रेस ने यहां वापसी की और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने जीत दर्जकर संसद पहुंचे. साल 1996 और 1998 में बीजेपी से स्वामी सच्चिदानद हरी साक्षी महाराज सांसद चुने गए, लेकिन 1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी से चंद्रभूषण सिंह उर्फ मुन्नू भईया जीत हासिल की. 2009 के चुनाव में कांग्रेस से सलमान खुर्शीद एक बार फिर जीतने में कामयाब रहे. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से मुकेश राजपूत 20 साल बाद फर्रुखाबाद सीट पर कमल खिलाने में कामयाब रहे.