Ayodhya: हनुमान गढ़ी से शुरू होगा भूमि पूजन कार्यक्रम, पढ़ें 166 साल के इंतजार की पूरी Timeline

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 9 नवंबर, 2019 को फैसला दिया कि विवादित भूमि हिंदुओं को मंदिर निर्माण (Ram Temple Construction) के लिए दी जाएगी. और मस्जिद के निर्माण के लिए मुसलमानों को अयोध्या (Ayodhya) में अलग से 5 एकड़ जमीन दी जाएगी.
history of ayodhya ram mandir, Ayodhya: हनुमान गढ़ी से शुरू होगा भूमि पूजन कार्यक्रम, पढ़ें 166 साल के इंतजार की पूरी Timeline

भगवान हनुमान को अयोध्या और राम भक्तों का रक्षक कहा जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जब बुधवार को ‘भूमिपूजन’ के लिए अयोध्या आएंगे, तो सबसे पहले हनुमान गढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे.

हनुमान गढ़ी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत राजू दास (Raju Das) के अनुसार, “भूमिपूजन’ के लिए जाने से पहले प्रधानमंत्री हनुमान गढ़ी मंदिर में लगभग सात मिनट तक पूजा-अर्चना करेंगे. उनके लिए यहां एक विशेष पूजा की व्यवस्था की गई है. भूमिपूजन कार्यक्रम (Bhoomi Pujan) वास्तव में 4 अगस्त से हनुमान गढ़ी में शुरू होगा. ऐसा माना जाता है कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले, हनुमान की पूजा-अर्चना करनी चाहिए और रक्षा का आशीर्वाद मांगना चाहिए.”

1853 में शुरू हुआ था मंदिर पर विवाद

बुधवार को ‘भूमिपूजन’ होने के साथ लगभग 166 साल पुराना विवाद खत्म हो जाएगा. मंदिर पर विवाद 1853 में शुरू हुआ था. मस्जिद के निर्माण के बाद, हिंदुओं ने आरोप लगाया कि मस्जिद का निर्माण जिस स्थान पर हुआ है, वह पहले भगवान राम का मंदिर था, जिसे मस्जिद के निर्माण के लिए ढहा दिया गया था.

देखिये परवाह देश की सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 10 बजे

1885 में मामला पहली बार पहुंचा अदालत

1885 में यह मामला पहली बार अदालत में पहुंचा जब महंत रघुबर दास (Raghubar Das) ने बाबरी मस्जिद से सटे राम मंदिर बनाने की अनुमति के लिए फैजाबाद अदालत में अपील दायर की. ब्रिटिश सरकार ने 1859 में विवादित भूमि के अंदरूनी और बाहरी परिसर में मुसलमानों और हिंदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की अनुमति देने के लिए एक तार की बाड़ लगाई.

1949 में रखी गई राम की मूर्ति

23 दिसंबर, 1949 को इस केंद्रीय स्थान पर भगवान राम की एक मूर्ति रखी गई थी. इसके बाद हिंदुओं ने रोजाना उस स्थान पर पूजा करना शुरू कर दिया, जबकि मुसलमानों ने वहां नमाज अदा करना बंद कर दिया. 16 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में अपील दायर की, जिसमें राम लला (Ram Lala) की पूजा करने की विशेष अनुमति मांगी गई.

कुछ महीनों बाद, 5 दिसंबर 1950 को महंत परमहंस राम चंद्र दास (Paramahamsa Ram Chandra Das) ने भी हिंदू प्रार्थनाओं को जारी रखने और विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे जाने के लिए मुकदमा दायर किया.

1961 में मूर्तियों को मस्जिद परिसर से हटाने की मांग

नौ सालों बाद, 17 दिसंबर 1959 को निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल को ट्रांसफर करने के लिए मुकदमा दायर किया और 18 दिसंबर, 1961 को उत्तर प्रदेश के सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी मुकदमा दायर कर बाबरी मस्जिद के स्वामित्व (Ownership) को मांगा और मूर्तियों को मस्जिद परिसर से हटाने की मांग की.

1984 में शुरू हुआ ताले खोलने के लिए अभियान

1984 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने विवादित ढांचे के ताले खोलने के लिए एक अभियान शुरू किया. इसके लिए एक समिति भी बनाई गई थी. फैजाबाद के जिला न्यायाधीश के.एम. पांडे ने 1 फरवरी, 1986 को हिंदुओं को विवादित जगह पर पूजा करने की अनुमति दी. ताले फिर से खोल दिए गए, लेकिन इसने कुछ मुस्लिम संगठनों को नाराज कर दिया और उन्होंने विरोध करने के लिए बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया.

1989 में रामलला के नाम पर 5वां मुकदमा दायर

1989 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने VHP को औपचारिक समर्थन देने की घोषणा की, जिससे मंदिर आंदोलन को एक नया जीवन मिला. यह वह स्टेज था जब राम मंदिर के लिए एक बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू हुआ, जिसने आने वाले सालों में राष्ट्रीय राजनीति की रूपरेखा बदल कर रख दी. 1 जुलाई 1989 को भगवान रामलला विराजमान के नाम पर पांचवा मुकदमा दायर किया गया.

1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा शुरू

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ने 9 नवंबर, 1989 को विवादित ढांचे के पास ‘शिलान्यास’ (शिलान्यास करने) की अनुमति दी. जैसे ही मंदिर आंदोलन को रफ्तार मिली, सितंबर 1990 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा शुरू की.

लालू यादव सरकार ने आडवाणी को करवाया गिरफ्तार

लालू यादव सरकार ने आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार करवा दिया. अक्टूबर 1991 में उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार ने विवादित ढांचे के पास 2.77 एकड़ भूमि का अधिग्रहण (acquired) किया और इसे राम जन्मभूमि ट्रस्ट को पट्टे (lease) पर दे दिया. हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने आदेश दिया कि कोई भी स्थायी ढांचा वहां नहीं बनाया जाएगा.

1992 में कारसेवकों ने किया मस्जिद को ध्वस्त

मंदिर आंदोलन 6 दिसंबर, 1992 को उस समय चरम पर पहुंच गया जब एक साथ आए हजारों ‘कारसेवकों’ ने विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया, जिससे देश भर में सांप्रदायिक दंगे (communal riots) हुए. मस्जिद को तोड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच के लिए कुछ दिनों बाद लिब्रहान आयोग (Liberhan Commission) का गठन किया गया.

अटल बिहारी वाजपेयी ने शुरू किया अयोध्या विभाग

जनवरी 2002 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग (Ayodhya department) शुरू किया. इस विभाग का काम हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद को हल करना था. उसी साल अप्रैल महीने में 3 न्यायाधीशों वाली पीठ ने अयोध्या में विवादित स्थल के स्वामित्व पर सुनवाई शुरू की.

2003 में खुदाई शुरू और 2010 में फैसला

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के तहत 2003 में अयोध्या में खुदाई शुरू की. ASI ने दावा किया कि विवादित ढांचे के नीचे मंदिर के अवशेष (remains) होने के सबूत थे, लेकिन मुसलमानों की इसके बारे में अलग-अलग राय थी.

सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया और विवादित भूमि को तीन भागों में बांट दिया- एक हिस्सा राम मंदिर को दिया गया, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड को और तीसरा निर्मोही अखाड़ा को मिला.

9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और विवाद को सुलझाने के सौहार्दपूर्ण प्रयासों के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 9 नवंबर, 2019 को अपना फैसला दिया कि विवादित भूमि हिंदुओं को मंदिर निर्माण के लिए दी जाएगी. और मस्जिद के निर्माण के लिए मुसलमानों को अयोध्या में अलग से 5 एकड़ जमीन दी जाएगी.

अयोध्या के धन्नीपुर में मुसलमानों को 5 एकड़ जमीन

कोर्ट ने मंदिर निर्माण की देखरेख के लिए सरकार को एक ट्रस्ट तैयार करने के लिए कहा. मंदिर निर्माण शुरू करने के लिए इस साल फरवरी में श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट (Ram Janmabhoomi Trust) बनाया गया. अगर कोरोना महामारी (Coronavirus) और देशव्यापी लॉकडाउन नहीं होता, तो अप्रैल में राम नवमी पर मंदिर का निर्माण शुरू हो जाता. इस बीच, राज्य सरकार ने अयोध्या में धन्नीपुर में मुसलमानों को 5 एकड़ जमीन दी है. (IANS)

देखिये फिक्र आपकी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 9 बजे

Related Posts