‘आप लोग बैठिए मैं अभी कोलगेट करके आती हूं’, पढ़ें मायावती का रोचक किस्सा

'डेमोक्रेसी ऑन द रोड: अ 25 ईयर जर्नी थ्रू इंडिया' किताब लिखने वाले रुचिर शर्मा भारत में 27 चुनावी दौरे कर चुके हैं. उन्होंने अपनी किताब का रोचक किस्सा बताया.

नई दिल्ली: ग्लोबल इनवेस्टर और कई किताबों के लेखक रुचिर शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस के एक्सप्रेस अड्डा कार्यक्रम में कुंवारे नेताओं को लेकर बात कही. उन्होंने कहा कि देश में कुंवारे नेताओं की संख्या बढ़ रही है. रुचिर शर्मा का कहना है कि मौजूदा समय में एक तिहाई भारतीय नेता ऐसे हैं जो अविवाहित हैं और उन पर सामाजिक दबाव है कि वो शादी करें.

उनका दावा है कि अविवाहित होने की वजह से ही उनकी निजी जिंदगी में अधूरापन है. उन्होंने अपनी किताब में लिखे मायावती से जुड़े एक वाकये को बताया. उन्होंने कहा कई बार नेता अपने बेडरूम में ही लोगों से मिलने-जुलने लगते हैं.

उन्होंने कहा, ‘साल 2002 में बसपा नेता मायावती ने लोगों को सुबह-सुबह अपने बड़े से बेडरूम में ही बुला लिया था. और जब लोग पहुंचे तो वहां मायावती स्टाफ के साथ मौजूद थीं. तब उन्होंने कहा था कि आप लोग बैठिए मैं अभी कोलगेट करके आती हूं ‘ रुचिर शर्मा पहले भी राजनीतिक भविष्यवाणियां करते रहे हैं.

2019 लोकसभा चुनाव के बारे में उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि, ‘जब हमने मतदाताओं से पूछा कि वे किसे वोट करेंगे तो उनका जवाब उनके उपनाम (जाति) से ही पता चल जाता था’ उन्होंने कहा कि UP में जब यूपी में उच्च जाति या गैर-दलित ओबीसी या गैर जाटव अनुसूचित जाति के लोगों से पूंछते हैं कि वे किसे वोट देंगे, तो उनका जवाब PM मोदी होगा. जब यादव, मुस्लिम या जाटव से पूछेंगे तो उनका जवाब महागठबंधन होगा. उनका मानना है कि जातीय धुर्वीकरण से वोट का अनुमान लगाना सरल हो गया.

कौन हैं रुचिर शर्मा-

रुचिर शर्मा अमेरिका में रहते हैं. उन्होंने दिल्ली, मुंबई और सिंगापुर में पढ़ाई की है. उन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों में 27 चुनावी दौरे किए हैं. 2019 लोकसभा चुनाव में उनका 28वां दौरा है. रुचिर शर्मा ‘डेमोक्रेसी ऑन द रोड: अ 25 ईयर जर्नी थ्रू इंडिया’ किताब लिख चुके हैं. रुचिर शर्मा मॉर्गन स्टेनली इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट में इमर्जिंग मार्केट्स के प्रमुख और मुख्य वैश्विक रणनीतिकार हैं. वह अंतर्राष्ट्रीय बेस्टसेलर, ब्रेकआउट नेशंस के लेखक हैं, और वॉल स्ट्रीट जर्नल , फाइनेंशियल टाइम्स , विदेशी मामलों और अन्य प्रकाशनों में नियमित रूप से योगदान करते हैं. दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में से एक, उन्हें विदेश नीति के शीर्ष 100 वैश्विक विचारकों (2012) और ब्लूमबर्ग मार्केट के 50 सबसे प्रभावशाली विचारकों (2015) में से एक नामित किया गया था.

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