UP में राम बनाम परशुराम, समाजवादी पार्टी करेगी ब्राह्मणों को साधने की कोशिश

परशुराम (Parshuram) एक ब्राह्मण आइकन हैं और उनकी मूर्ति को खड़ा करने का कदम स्पष्ट रूप से सपा (SP) का ब्राह्मणों (Brahmins) को अपने पक्ष में कर लेने की एक कोशिश है, जिनकी आबादी UP में लगभग 11 प्रतिशत है और वह सरकार बनवाने और गिराने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
Ram vs parshuram in Uttar Pradesh, UP में राम बनाम परशुराम, समाजवादी पार्टी करेगी ब्राह्मणों को साधने की कोशिश

उत्तर प्रदेश (UP) के राजनीतिक अखाड़े में अब एक नई लड़ाई शुरू हो गई है. इस बार राजनीतिक जंग भगवान राम और परशुराम के बीच देखने को मिल रही है. पिछले हफ्ते राम मंदिर के भूमिपूजन (Bhoomi Pujan) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ताओं को काफी उत्साहित किया था, जो अब राम मंदिर (Ram Temple) का श्रेय लेने के लिए कमर कस रहे हैं.

BJP चुनावों में उठाएगी राम मंदिर का मुद्दा

पार्टी राम मंदिर के मुद्दे को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में उठाने की कोशिश करेगी, क्योंकि उसने मंदिर निर्माण को लेकर लाखों हिंदुओं से वादा किया था, जिसकी आधारशिला अब रखी जा चुकी है. पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव तक इस मुद्दे को बनाए रखने की हर संभव कोशिश करेगी.

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BJP के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “जब 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे, तो राम मंदिर ने आकार ले लिया होगा और 2024 तक, जब लोकसभा चुनाव होंगे, तब मंदिर का उद्घाटन होगा.”

सपा ने उठाया ब्राह्मणों की नाराजगी का मुद्दा

राम मंदिर के साथ, BJP एक बार फिर अपने ‘हिंदू पहले’ अभियान को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है, जो OBCs और दलितों को अपने हिस्से में लाएगी. इसका मुकाबला करने के लिए समाजवादी पार्टी (SP) ने पिछले महीने एक कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए खूंखार अपराधी विकास दुबे (Vikas Dubey) के मुद्दे पर BJP के खिलाफ ब्राह्मणों में बढ़ती नाराजगी के मुद्दे को उठाने की कोशिश की है.

पिछले दिनों हुई कुछ मुठभेड़ों में जो अधिकतर अपराधी मारे गए हैं, वे ब्राह्मण थे और इसी वजह से कहीं न कहीं ब्राह्मण समुदाय ने अपने आपको निशाने पर और ‘कम महत्व’ होना महसूस किया है.

राम बनाम परशुराम/ब्राह्मण-ठाकुर की लड़ाई

राम बनाम परशुराम की लड़ाई वास्तव में ब्राह्मण-ठाकुर की लड़ाई को दर्शाता है, जो दशकों से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर हावी है. राम क्षत्रिय समुदाय से माने जाते हैं, जबकि परशुराम ब्राह्मण समुदाय से. दोनों को भगवान विष्णु का अवतार कहा जाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) भी क्षत्रिय समुदाय से हैं और ब्राह्मण उनके शासन में खुद को उपेक्षित (Neglected) महसूस कर रहे हैं.

सपा बनवाएगी परशुराम की 108 फीट ऊंची मूर्ति

इस बीच समाजवादी पार्टी ने घोषणा की है कि वह लखनऊ में भगवान परशुराम (Parshuram) की 108 फीट ऊंची मूर्ति बनवाएगी और एक एजुकेशनल रिसर्च सेंटर के अलावा एक भव्य मंदिर भी बनाया जाएगा. सपा नेता अभिषेक मिश्रा (Abhishek Mishra) ने कहा कि अभी इस प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है और ‘परशुराम चेतना पीठ’ प्रोजेक्ट की देखरेख करेगा जो कि लोगों के सहयोग से पूरा होगा.

उन्होंने कहा, “मैं सपा का हिस्सा हूं और यह स्पष्ट है कि पार्टी परियोजना का एक हिस्सा है. सपा ब्राह्मण समुदाय से अलग नहीं है. वह अखिलेश यादव की सरकार थी, जिसने परशुराम जयंती पर छुट्टी घोषित की थी और इसे बाद में योगी आदित्यनाथ सरकार ने रद्द कर दिया था.”

मिश्रा ने कहा कि वह अखिलेश सरकार ही थी, जिसने लखनऊ में जनेश्वर मिश्र पार्क (Janeshwar Mishra Park) का निर्माण करवाया था और पार्क में ब्राह्मण नेता की बड़ी से बड़ी प्रतिमा स्थापित की थी.

ब्राह्मणों को अपनी तरफ करने के लिए परशुराम का सहारा

परशुराम एक ब्राह्मण आइकन हैं और उनकी मूर्ति को खड़ा करने का कदम स्पष्ट रूप से समाजवादी पार्टी का ब्राह्मणों को अपने पक्ष में कर लेने की एक कोशिश है, जिनकी आबादी उत्तर प्रदेश में लगभग 11 प्रतिशत है और वह सरकार बनवाने और गिराने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

परशुराम अभियान में सपा के नेतृत्व करने के बाद, बहुजन समाज पार्टी (BSP) अध्यक्ष मायावती भी पीछे नहीं रहीं. मायावती ने रविवार को घोषणा की कि जब उनकी पार्टी सत्ता में आएगी, तो वह परशुराम की ‘बड़ी’ मूर्ति स्थापित करवाएंगी.उन्होंने कहा, अगर सपा को परशुराम की चिंता है, तो उन्हें सत्ता में रहते हुए उनकी मूर्ति स्थापित करनी चाहिए थी.

दूसरी ओर कांग्रेस (Congress) ने फिलहाल ब्राह्मणों और परशुराम पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पार्टी का एक बड़ा हिस्सा एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ब्राह्मणों को अपनी तरफ करने की कोशिश जरूर कर रहा है. (IANS)

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