पत्रकार को ‘ठोंक देने’ की धमकी देनेवाले संदीप सिंह पर खुलासा, NSUI के नेता लगाते रहे भितरघात के आरोप

प्रियंका गांधी के साथ सोनभद्र गए और पत्रकार के साथ धक्कामुक्की करनेवाला संदीप सिंह पहले भी काफी विवादित रहा है. जेएनयू और इलाहाबाद विवि से सियासत का सबक लेनेवाला संदीप कांग्रेस के लिए नया है, जबकि लेफ्ट वालों के लिए पुराना. पढ़िए और भी खुलासे.

नेताओं का पत्रकारों से बद्तमीज़ी करना आम हो चला है. उनके अनुयायियों का तो हाल और भी बुरा है. ऐसा ही एक नज़ारा मंगलवार को सोनभद्र में देखने को मिला जहां कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सोनभद्र के उभ्भा गांव पहुंची थीं. उनके दौरे की कवरेज करने के लिए मीडिया का हुजूम उमड़ आया. इसी दौरान एक टीवी चैनल के पत्रकार ने अनुच्छेद 370 के बारे में प्रियंका की प्रतिक्रिया जाननी चाही जिस पर कांग्रेस महासचिव ने चुपचाप आगे बढ़ने का फैसला लिया, लेकिन उनके पीछे चल रहा उनका निजी सचिव भड़क गया. इस शख्स का नाम संदीप सिंह बताया जा रहा है.

संदीप सिंह ने माइक पकड़े पत्रकार के साथ धक्कामुक्की तो की ही, साथ में सड़कछाप भाषा का इस्तेमाल करते हुए ‘ठोंक देने’ और ‘गिरा देने’ की धमकी भी दी. ऐसा नहीं कि संदीप को ये सब कहते-करते इल्म ना रहा हो कि कैमरा चल रहा है, उन्हें मालूम था कि हर हरकत कैद हो रही है पर निजी सचिव जी के हौसले उनके राजनीतिक कद से बड़े थे. वो साफ बोले- मुझे फर्क नहीं पड़ता. इसके अलावा अपने नियंत्रण से बाहर निकले हाथ और जुबान को न्यायसंगत ठहराने की कोशिश में उसने पत्रकार पर बीजेपी से पैसे लेकर आने के आरोप लगाए. पत्रकार नीतीश कुमार पांडेय कहता रहा कि वो किसी के कहने पर नहीं आया लेकिन निजी सचिव महोदय की अकड़ खत्म होने की जगह बढ़ती ही गई. इस पूरी घटना के दौरान वो कैमरे पर भी हाथ मारता रहा. वीडियो तो आप लोग नीचे लगे लिंक पर क्लिक करके देख ही सकते हैं मगर लगे हाथ आपको इन जनाब का परिचय भी करा दें. परिचय से पहले बता दें कि इनके खिलाफ धारा 323 और 506 के तहत रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है.

sandeep singh, पत्रकार को ‘ठोंक देने’ की धमकी देनेवाले संदीप सिंह पर खुलासा, NSUI के नेता लगाते रहे भितरघात के आरोप

यूपी के प्रतापगढ़ के रहनेवाले संदीप सिंह की शिक्षादीक्षा जेएनयू दिल्ली में हुई है और वो साल 2005 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को काले झंडे भी दिखा चुके हैं. संदीप के कंधों पर राहुल गांधी के भाषण लिखने की ज़िम्मेदारी रही है, साथ ही गठबंधन के मामलों पर भी वो राहुल को राय देते हैं. जब राहुल गांधी ने अपनी बहन को पूर्वी यूपी के मोर्चे पर भेजा तो साथ ही संदीप को भी भेजा. ये तो कोई नहीं जानता कि राहुल गांधी से संदीप सिंह की करीबी कब हुई लेकिन जानकारों का कहना है कि 2017 में उसे राहुल गांधी के ईर्दगिर्द देखा जाने लगा था.

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जेएनयू आने से पहले संदीप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई लिखाई की और वहीं सीपीआई- माले की छात्र यूनिट ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ज्वाइन कर ली. जेएनयू में वो हिंदी विभाग में पढ़ रहा था लेकिन उसके बाद दर्शनशास्त्र पढ़ने लगा. नवंबर 2005 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह जब जेएनयू आए तब कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संदीप सिंह कुछ छात्रों के साथ उन्हें काले झंडे दिखाने पहुंचा था. 2007 में वो जेएनयू छात्रसंघ का अध्यक्ष चुना गया. उसके करीबी बताते हैं कि जेएनयू से निकलने के बाद संदीप ने लेफ्ट की राजनीति से दूरी बना ली और अन्ना हज़ारे-अरविंद केजरीवाल के लोकपाल आंदोलन में कूद पड़ा. इसके बाद वो वहां भी नहीं टिका और कांग्रेस की तरफ आकर्षित हुआ. शुरू में उसका काम राहुल के भाषण लिखने तक सीमित था लेकिन धीरे धीरे उसने प्रभाव बढ़ाया. यूं तो संदीप सिंह ने काला झंडा दिखाने पर कांग्रेस से माफी मांगी थी लेकिन कांग्रेस की छात्र यूनिट ने उस पर आरोप लगाए कि वो बाद में भी अपने पुराने संगठन को प्रमोट करता रहा.

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साल 2018 में जेएनयू में NSUI  के महासचिव ने कांग्रेस कार्यसमिति को खत लिखा और संदीप के खिलाफ कैंपस में पार्टी को कमज़ोर करने की शिकायत दर्ज कराई. शिकायती चिट्ठी में लिखा था- JNUSU के पूर्व अध्यक्ष और AISA के कार्यकर्ता संदीप सिंह जो अब राहुल गांधी की टीम में हैं जेएनयू कैंपस आए और कहा कि जो भी कांग्रेस ज्वाइन करना चाहता है वो NSUI का हिस्सा ना बने, बल्कि लेफ्ट में जाए और फिर कांग्रेस में ऊंचा पद पाए. इससे हमारे सदस्य और कार्यकर्ता हतोत्साहित हुए हैं और जेएनयू में हमारी टीम कमज़ोर पड़ी है.

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संदीप सिंह की किस्मत तब चमकी जब कांग्रेस के दरवाज़े में लेफ्ट रुझान रखनेवालों के लिए खुल गए.  पिछले सालों में बहुत सारे लेफ्ट की ओर रुझान रखनेवाले लोगों ने कांग्रेस ज्वाइन की. उदाहरण के तौर पर देखें तो पिछले साल 2 सितंबर को लखनऊ में सौ से ज्यादा लेफ्ट रुझान वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं और रंगकर्मियों ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी. पार्टी के भीतरी सूत्र बताते हैं कि राहुल और प्रियंका के भाषण में कॉरपोरेट विरोधी बयानों और ट्विटर पर पोस्ट्स के पीछे संदीप सिंह ही है.