‘बच्‍चा नहीं, पिता नाजायज होता है’, ये बात कहने वाले रोहित शेखर की कहानी

रोहित शेखर ने एक बार कहा था "कोई भी बच्चा नाजायज़ नहीं हो सकता, सिर्फ़ पिता ही नाजायज़ हो सकता है.

नई दिल्ली: पूर्व CM एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की मंगलवार शाम अचानक मौत हो गई. रोहित शेखर दिल्ली में डिफेंस कॉलोनी के अपने फ्लैट में मृत पाए गए. उन्हें साकेत मैक्स हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

रोहित शेखर ने अदालत से ‘नाजायज़’ बेटा का न्याय पाकर पूरे देश को अलग संदेश दिया था. जब रोहित शेखर को अदालत से न्याय मिला था तब उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, “शायद मैं दुनिया का पहला आदमी हूँ जिसने ख़ुद को नाजायज़ साबित होने के लिए मुकदमा लड़ा.”

रोहित ने सात साल तक देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक नारायण दत्त तिवारी के ख़िलाफ़ पितृत्व का केस लड़ा. एन.डी.तिवारी अपने 60 साल के राजनीतिक सफर में कांग्रेस पार्टी की सरकारों में कई बार मंत्री रहे. रोहित के अनुसार ‘नाजायज़’ शब्द अदालत में कई बार दोहराया गया.

वह कहते थे, “भारत का पितृसत्तात्मक समाज मुझे या मेरी मां को स्वीकार करने को तैयार नहीं था. यह भेदभाव और भी मुश्किल हो जाता है जब आप अमीर शहरी क्षेत्र को छोड़कर देश के अंदरूनी इलाक़े की ओर जाते हैं.”

ये था पूरा मामला-
2008 में रोहित शेखर ने एनडी तिवारी को अपना जैविक पिता बताते हुए कोर्ट में मुकदमा कर दिया था.

कोर्ट ने डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया तो एनडी तिवारी ने नमूना देने से इनकार कर दिया था. बाद में एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को बेटा मानते हुए उन्‍हें संपत्ति का वारिस भी बनाया.

इतना ही नहीं, एनडी तिवारी ने रोहित शेखर की मां उज्‍जवला से 88 साल की उम्र में शादी की थी. उज्जवला से एनडी तिवारी के प्रेम संबंध रहे, मगर उन्होंने शादी नहीं की थी. बाद में रोहित शेखर को बेटा स्‍वीकार करने के बाद शादी भी की.

एनडी तिवारी ने कहा था, ‘मुझे अपनी तरह से जिंदगी जीने का हक है. किसी को मेरी निजी जिंदगी में झांकने का हक नहीं. मेरी निजता का सम्मान करें.’ 3 मार्च 2014 को एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को बेटा माना. उन्‍होंने कहा, ‘डीएनए टेस्ट से भी साबित हुआ है कि वह मेरा जैविक पुत्र है. 14 मई 2014 को तिवारी ने रोहित शेखर की मां उज्जवला तिवारी से लखनऊ में हुए एक समारोह में शादी की थी.’

रोहित शेखर के ये विचार जिस पर वे काम करना चाहते थे-
वह कहते थे कि उन्हें एक नई जंग लड़नी है, अदालतों में कुछ शब्दों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगवाने की. उन्होंने कहा था “कोई भी बच्चा नाजायज़ नहीं हो सकता, सिर्फ़ पिता ही नाजायज़ हो सकता है. “वह चाहते थे कि एक याचिका दायर करें ताकि बच्चों को वकील और जज ‘नाजायज़’ कहना बंद करें,

उन्हें ‘रखैल’ और ‘व्यभिचारी’ जैसे शब्दों पर भी ऐतराज़ था. वह कहते थे, “भारत अब भी एक सामंती समाज है और यह महिलाओं और बच्चों के प्रति बहुत निर्मम है. मैं इसे बदलना चाहता हूं.”

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