उत्तर प्रदेश: अयोध्या के संत चाहते हैं राम मंदिर के मॉडल में बदलाव

1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान मंदिर के विश्व हिंदू परिषद् मॉडल को मंजूरी दी गई थी. मॉडल को अयोध्या (Ayodhya) में कारसेवकपुरम (Karsevakpuram) में जनता के देखने के लिए रखा गया है. संत चाहते हैं कि पुराने मॉडल में कुछ बदलाव किए जाएं.

saints want to change ram mandir model, उत्तर प्रदेश: अयोध्या के संत चाहते हैं राम मंदिर के मॉडल में बदलाव

अयोध्या (Ayodhya) में संतों के एक समूह ने भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय विधायक वेद प्रकाश गुप्ता को एक ज्ञापन देकर राम मंदिर के मौजूदा मॉडल में बदलाव करने की मांग की है. दिगंबर अखाड़ा के प्रमुख महंत सुरेश दास के नेतृत्व में संतों ने रविवार शाम को विधायक के साथ इस बारे में बात की.

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विधायक ने सोमवार को कहा, “संतों ने एक ज्ञापन दिया है, जिसमें मौजूदा डिजाइन के बजाय नए भव्य डिजाइन के हिसाब से राम मंदिर का निर्माण कराने के लिए कहा है.” उन्होंने आगे कहा, “संतों ने मुझसे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को यह ज्ञापन भेजने का अनुरोध किया है, जो मैं भेज दूंगा.” संतों ने यह भी मांग की है कि राम जन्मभूमि स्थल पर चल रहे मंदिर निर्माण कार्य के पहले उनसे सलाह ली जानी चाहिए.

सूत्रों ने बताया कि रविवार को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से मिलने के लिए संतों ने कार्यक्रम निर्धारित किया था, लेकिन विश्व हिंदू परिषद् नेता राजेंद्र सिंह ‘पंकज’ ने हस्तक्षेप किया और संतों को इस मुद्दे को दबाने के लिए मना लिया. राम मंदिर के मौजूदा मॉडल को बदले जाने का मुद्दा उठाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले रामविलास वेदांती को भी इसके बाद किनारे कर दिया गया.

राम मंदिर का विश्व हिंदू परिषद् मॉडल 

1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान मंदिर के विहिप मॉडल को मंजूरी दी गई थी. मॉडल को अयोध्या में कारसेवकपुरम में जनता के देखने के लिए रखा गया है. संत अब चाहते हैं कि मंदिर का नया मॉडल बनाया जाए, ताकि यह और भव्य हो. वे चाहते हैं कि मंदिर भव्यता में अद्वितीय हो.

केंद्र सरकार के देशभर में निर्माण कार्य की अनुमति दिए जाने के बाद 11 मई को अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ. राम जन्मभूमि स्थल पर अभी जमीन के समतलीकरण का काम चल रहा है. राम मंदिर का वास्तविक निर्माण ‘भूमिपूजन’ के बाद शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया जाएगा. हालांकि, अभी तक आयोजन की कोई तारीख तय नहीं की गई है.

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