यूपी : बांदा की सरकारा गौशाला में तीन दिन के भीतर 17 गोवंशों की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी आने के बाद मृत गायों को ट्रैक्टर पर लदवाकर आनन-फानन में गौशाला से हटवा शान्तिधाम स्कूल के पीछे जंगल मे दूर फिंकवाया गया, जिसमें 10 गोवंश मरे हुए पड़े थे.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोवंश को संरक्षित करने के कड़े निर्देशों के बावजूद अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. बांदा के अतर्रा की सरकारी कान्हा गौशाला में इलाज न मिलने और भूख प्यास से तड़पकर एक साथ कई गायों की मौत का मामला सामने आया है.

शुक्रवार को 7 और गायों की मौत

कान्हा गौशाला में भूख और मेडिकल चिकित्सा के अभाव में शुक्रवार को सात गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई. नगरपालिका का स्टाफ उनके शवों को फेंकने जा रहा है. बांदा के डीएम हीरालाल इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं.

स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि बीते दो दिनों में यहां 23 गायों की मौत हो गयी है और रोजाना 3-4 गायों की मौत हो रही है. मौत के बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से न गुजारकर बिना पोस्टमार्टम कराए ट्रैक्टर में डलवाकर दूर कहीं फिंकवा दिया जाता है.

मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी आने के बाद मृत गायों को ट्रैक्टर पर लदवाकर आनन-फानन में गौशाला से हटवा शान्तिधाम स्कूल के पीछे जंगल मे दूर फिंकवाया गया, जिसमें 10 गोवंश मरे हुए पड़े थे.

टीवी9 भारतवर्ष की टीम जब अतर्रा कान्हा गौशाला के अंदर पहुंची तो गौशाला इंचार्ज पिछले दो दिन में सिर्फ दो गायों की मौत की बात स्वीकार कर रहे हैं. हां, इंचार्ज ने ये जरूर स्वीकार किया कि 16 गायों की मौत इलाज न मिलने की वजह से हुई.

गौशाला में अभी भी लगभग 11गायें इलाज के अभाव में पड़ी तड़प रही हैं. पूरे मामले में सीएम योगी स्वयं पिछले 8 दिसम्बर को तिंदवरी गौशाला का निरीक्षण किया था और काफी नाराजगी जाहिर करते हुऐ सुधार की बात कही थी,लेकिन अधिकारी सुनने के लिऐ तैयार नहीं हैं.

Kanha Gaushala in Atra Uttar Pradesh, यूपी : बांदा की सरकारा गौशाला में तीन दिन के भीतर 17 गोवंशों की मौत

अतर्रा नगरपालिका द्वारा संचालित कान्हा गौशाला में इंचार्ज के पद पर तैनात संतोष के मुताबिक यहां 446 पशु रखे गए हैं. जबकि एंट्री रजिस्टर में 12 दिसम्बर की तारीख तक सिर्फ 416 पशु दर्ज हैं. इसके बाद से अब तक वहां कोई गोवंश नहीं लाया गया.

उन्होंने बताया कि कई बार बुलाने के बावजूद इस गौशाला में पशु डॉक्टर आया. मृत जानवर का पोस्टमार्टम नहीं हुआ. ऐसे में हम बीमार पशुओं को इलाज दे पाने में असमर्थ हैं.

गौशाला में कई गायों की मौत के बाद उन्हें अज्ञात स्थान पर फेंकने जा रहे ट्राली चालक ने बताया कि वह अब तक दो महीने में कुल 66 से अधिक गायों को यहां से ले जाकर नहर के पास खाली जमीन में फेंक चुका है, जहां जंगली जानवर उन्हें नोचकर खा जाते हैं. इन गायों का कोई हिसाब नहीं होता. प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार एक माह में लगभग 66 गौवंश की मौत हो चुकी है.

एस डी एम अतर्रा सौरभ शुक्ल ने अपना सरकारी पक्ष बताने से मना कर दिया और बोले जिलाधिकारी ने बाइट देने से मना किया है.