क्या बिकरू में विकास दुबे के भूत का है साया? गांववालों का दावा रात में आती है गोलियों की आवाज

बिकरू हत्याकांड (Bikru Encounter) को हुए लगभग ढाई महीने हो चुके हैं, जिसमें आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे. बिकरू के लोग हालांकि, पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि वे अब भी रात में गोलियों की आवाज सुनते हैं.

  • IANS
  • Publish Date - 7:36 pm, Mon, 14 September 20

कानपुर का बिकरू गांव, जहां जैसे ही सूरज डूबता है, लोग जल्दी-जल्दी अपने घर लौट लगते हैं और घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं. ये दास्तां उत्तर प्रदेश के उस गांव की है, जिसने हाल के दिनों में सबसे भायवह खूनखराबा वाला मंजर देखा था. अब पहले की तरह लोग दिन में या शाम को बैठकर बातें नहीं करते हैं. सूरज डूबते ही एक भयानक सन्नाटा बिकरू को घेर लेता है.

IANS न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बिकरू हत्याकांड को हुए लगभग ढाई महीने हो चुके हैं, जिसमें आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे. बिकरू के लोग हालांकि, पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि वे अब भी रात में गोलियों की आवाज सुनते हैं.

गांव के एक युवक ने नाम जाहिर न करने का आग्रह करते हुए कहा, “आज भी गोलियों की आवाज सुनाई देती है. सब जानते हैं, पर बोलता कोई नहीं. कुछ लोगों ने तो विकास भैया (विकास दुबे) को देखा भी है.” स्थानीय लोगों ने दबी जुबान में दावा किया कि उन्होंने अक्सर विकास दुबे को उसके घर के खंडहर में बैठा देखा है. दो-तीन जुलाई की रात को बिकरू हत्याकांड के बाद विकास दुबे के घर को सरकार ने तोड़ दिया था.

“हमने विकास को वहां बैठे और मुस्कुराते हुए देखा”

एक बुजुर्ग ने दावा किया, “हमने उसे वहां बैठे और मुस्कुराते हुए देखा है. यह कुछ ऐसा है, जैसे वह हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है. हमें यकीन है कि वह अपनी मौत का बदला लेगा.” विकास दुबे के ध्वस्त घर के पास रहने वाले एक परिवार का दावा है कि उन्होंने कई तरह की आवाजें भी सुनी हैं.

एक महिला ने कहा, “एक से ज्यादा मौकों पर, हमने खंडहर में लोगों को किसी बात पर चर्चा करते हुए सुना है, हालांकि आवाज साफ सुनाई नहीं दी. बीच में थोड़ा हंसी-मजाक भी चलने का आभास हुआ. यह काफी हद तक वैसा ही था, जैसा विकास के जिंदा रहने के दौरान घर में होता था.”

गांव में तैनात पुलिसवालों ने किया इनकार

हत्याकांड के बाद बिकरू गांव में चार पुलिसकर्मी- दो पुरुष और दो महिलाएं तैनात हैं. उनमें से किसी ने भी रिकॉर्ड पर, गोलियों की आवाज सुनने या विकास दुबे को देखने की बात नहीं स्वीकारी. उनमें से एक ने कहा, “हमें अपनी ड्यूटी करने में कोई दिक्कत नहीं है” और आगे बात करने से इनकार कर दिया. एक स्थानीय पुजारी का कहना है कि स्थानीय लोगों के दावों को खारिज नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा, “ऐसे मामलों में जहां अकाल मृत्यु हुई होती हैं, ऐसी घटनाएं होती हैं. विकास दुबे के मामले में अंतिम संस्कार ठीक से नहीं किया गया और मृत्यु के बाद की रस्में भी नहीं की गईं. ऐसा ही उसके पांचों साथियों के साथ हुआ है, जो मुठभेड़ों में मारे गए थे.”

ग्रामीण कराना चाहते हैं विशेष पूजा

ग्रामीणों ने एक स्थानीय पुजारी से ‘परेशान भटकती आत्माओं’ की शांति के लिए ‘पितृ पक्ष’ की अवधि में विशेष पूजा कराने के लिए कहा, लेकिन पुजारी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह पुलिस के रडार पर नहीं आना चाहते. एक ग्रामीण ने कहा, “हम नवरात्रि के दौरान पूजा कराने की कोशिश करेंगे, ताकि हत्याकांड और उसके बाद के मुठभेड़ में मारे गए सभी लोगों, पुलिसकर्मियों की आत्मा को शांति मिल सके.”