‘मैं आपका एहसान नहीं भूलूंगा’, मुलायम के कहते ही मिट गईं 24 साल की दूरियां

मैनपुरी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. इसी मैनपुरी में मायावती ने अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के साथ संयुक्त रैली की.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में चुनावी रैली में समाजवादी पार्टी (सपा) संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमो मायावती के साथ मंच साझा किया. माया-मुलायम 1995 में हुए गेस्टहाउस कांड के बाद पहली बार एक मंच पर आए. इस रैली में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे. राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह रैली में नहीं पहुंच सके. अगली संयुक्त रैली आंवला में है. आइए जानते हैं इस रैली में किसने क्या कहा-

मुलायम सिंह के भाषण की बड़ी बातें-

  • SP कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि वे मायावती का हमेशा सम्‍मान करें. मैनपुरी की जनता से कहूंगा कि ताली पीटकर मायावती का स्‍वागत करें.
  • मैनपुरी हमारा होम ग्राउंड है. हम पहले से ज्यादा वोट से जीतेंगे.
  • मुझे और मेरे साथियों को जिता देना.
  • आखिरी बार लड़ रहा हूं आपके कहने पर, मुझे जिता देना.
  • महिलाओं के साथ शोषण हो रहा. हमने लोकसभा में सवाल उठाया. महिलाओं का शोषण नहीं होने दिया जाएगा.
  • हम मायावती जी का स्वागत करते हैं. मायावती जी ने हमेशा हमारा साथ दिया. मुझे ख़ुशी है कि हम साथ आए. मैं आपके एहसान को नहीं भूलूंगा.
  • चुनाव में हमें बहुमत मिलेगा.

मायावती ने क्या कहा-

  • मुलायम सिंह जी को रिकॉर्डतोड़ वोटों से जितायें. मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव की जीत तय है.
  • देशहित में कभी-कभी कठिन फैसले लेने होते हैं. गेस्टहाउस कांड के बाद भी हम साथ चुनाव लड़ रहे.
  • मुलायम सिंह यादव जी असली पिछड़े हैं, न कि वो प्रधानमंत्री मोदी की तरह नकली पिछड़े वर्ग के है. मोदी ने गुजरात में अपनी सरकार के दौरान अपनी जाति को पिछड़े वर्ग में डाला था. मोदी की तरह मुलायम नकली पिछड़े वर्ग के नहीं है
  • सपा से गठबंधन पर अब सफाई नहीं दूंगी. पिछड़ों के असली व वास्तविक नेता मुलायम सिंह यादव को एक बार फिर संसद में चुनकर भेजना है.
  • कांग्रेस के शासनकाल में काम न होने के कारण उन्होंने सत्ता खोई.
  • छोटे-छोटे सभी चौकीदार मिलकर भी मोदी सरकार को दोबारा नहीं ला सकते हैं.
  • 15 लाख का झूठा प्रलोभन दिया. किसी को ये पैसे नहीं मिले. इस बार चौकीदार की नई नाटकबाजी नहीं चलेगी.
  • कांग्रेस, भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियां चुनाव में कई प्रलोभन देंगी. लेकिन आप को इनके झांसे में नहीं आना है.
  • कांग्रेस का कहना है कि गरीबों की आर्थिक मदद की जाएगी. लेकिन ये सिर्फ दिखावा है.
  • कालेधन पर मोदी चुप क्यों है.  दो चरण के चुनाव में बीजेपी की हवा ख़राब हो गई है. आगे के चरणों में उनकी हालत और ख़राब हो जाएगी.
  • आखिरी सांस तक मुलायम सिंह यादव जी मैनपुरी की सेवा करना चाहते हैं.
  • साइकिल के चुनाव चिन्ह को भूलना नहीं. जय भीम जय लोहिया जय भारत.

अखिलेश यादव ने क्या कहा-

  • आदरणीय  मायावती जी का बहुत-हुत धन्यवाद. ये ऐतिहासिक छड़ है.
  • भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने व्यापर ख़त्म कर दिया.
  • सपा और बसपा के राज में गांवों का विकास हुआ.
  • मोदी सरकार में देश के युवाओं का भविष्य अंधकार में है.
  • मैनपुरी और दिल्ली को सपा-बसपा ने एक्सप्रेसवे से करीब ला दिया. तो ये मैनपुरी वालों की जिम्मेदारी है कि वो हमें दिल्ली के करीब ले जाएं.
  • आज कानून व्यवस्था चौपट है. हमारे बाबा मुख्यमंत्री ने पता नहीं क्या कर दिया 100 नंबर को.
  • एक-एक वोट साइकिल के पक्ष में जाए. और जहां जहां बसपा लड़ रही है, वहां हमारे साथ हाथी के चुनाव निशान को जिताएं.
  • वो कागज में पिछड़े हैं और हम सब लोग जन्म से पिछड़े हैं.

24 साल बाद एक मंच पर आए माया-मुलायम 

मैनपुरी में अखिलेश यादव, मायावती और मुलायम सिंह यादव एक मंच पर थे. बता दें कि अरसे पहले यूपी में सपा-बसपा (कांशीराम और मुलायम) के बीच अच्छी खासी दोस्ती थी, लेकिन गेस्ट हाउस कांड के बाद से दोनों पार्टियों में फूट पड़ गई थी. 2 जून 1995 को सपा बसपा के रास्ते एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हो गए और दोनों पार्टियों में कोल्ड वार शुरू हो गया. बावजूद इसके 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई वहीं 2012 के चुनाव में सपा भारी मतों के साथ जीत हासिल की.

मुलायम सिंह यादव, ‘मैं आपका एहसान नहीं भूलूंगा’, मुलायम के कहते ही मिट गईं 24 साल की दूरियां
सपा-बसपा उत्तर प्रदेश की 38-38 सीटों पर मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं.

मैनपुरी सीट की बात करें तो यहां पर मुलायम सिंह की पकड़ काफी मजबूत है. लंबे समय से वो इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और जीतते भी आए हैं. हो सकता है कि मुलायम सिंह इस सीट से दोबारा जीत जाते लेकिन मायावती का समर्थन मिलने के बाद जीत की उम्मीद दोगुनी हो चुकी है.

मैनपुरी की खास बात ये है कि भाजपा को इस सीट से कभी भी जीत का ताज नहीं मिला है, जबकि कांग्रेस 4 बार चुनाव जीत चुकी है. मुलायम सिंह यादव भी इस सीट से 1996, 2004, 2009 और 2014 के चुनावों में फतह कर चुके हैं.