काशी विश्वनाथ मंदिर के नवीनीकरण का रास्ता साफ, SC के आदेश के बाद बनी सहमति

बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास बने कारमाइकल लाइब्रेरी भवन गिराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लाइब्रेरी भवन में बनी 6 दुकानों के लिए 16 लाख रुपए मुआवजा देने के का आदेश दिया है.

वाराणसी: बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास बने कारमाइकल लाइब्रेरी भवन गिराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विवाद को सुलझा दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनों पक्षों में सहमति बन गई.

सुप्रीम कोर्ट ने कारमाइकल लाइब्रेरी भवन में बनी 6 दुकानों के लिए 16 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए कहा है. वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर के नवीनीकरण और विस्तार का रास्ता साफ हो गया है. काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट दुकानदारों को मुआवजा देगा.

हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में कुछ किराएदारों ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पास बने कारमाइकल लाइब्रेरी भवन को गिराने के लिए कहा था. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर के नवीनीकरण के लिए अगर उनका कारमाइकल लाइब्रेरी भवन गिराया जाए तो उन्हें सरकार मुआवजा दे या फिर कहीं और दुकान दी जाए.

लाइब्रेरी प्रशासन ने SC से लगाई थी गुहार

काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण के लिए इस लाइब्रेरी भवन को हटाने की योजना थी. काशी विश्वनाथ विकास परिषद ने इसे खाली करने का नोटिस दिया था.  इस नोटिस के बाद लाइब्रेरी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी. काशी कॉरिडोर को नया और भव्य आकार देने के लिए सड़क के दोनों ओर विस्तारीकरण का काम हो रहा है. इसमें लाइब्रेरी का भवन बीच में आ रहा था.

पहली सार्वजनिक लाइब्रेरी

कारमाइकल लाइब्रेरी बनारस की पहली सार्वजनिक लाइब्रेरी मानी जाती है. इसमें दुर्लभ पुस्तकों और ग्रंथों का संग्रह है. कहा जाता है कि इस लाइब्रेरी में मुंशी प्रेमचंद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी जैसे प्रकांड विद्वानों का जमावड़ा लगता था. मौजूदा समय में इस लाइब्रेरी में एक लाख से ज्यादा पुस्तकें हैं.

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