राम मंदिर से महज 37km की दूरी पर मोदी की रैली, पीएम बनने के बाद पहली बार पधारेंगे अयोध्या

2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने यहां का दौरा किया था, लेकिन तब वे प्रधानमंत्री पद के सिर्फ दावेदार थे.

अयोध्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अयोध्या दौरे पर हैं. पीएम बनने के बाद ये पहला मौका होगा जब मोदी अयोध्या की धरती में होंगे. हालांकि, वह हनुमानगढ़ी मंदिर या अस्थायी राम मंदिर नहीं जाएंगे.

पीएम मोदी आज अयोध्या पर होंगे लेकिन वो राम मंदिर नहीं जाएंगे. स्थानीय लोगों के बीच ये मसला चर्चा का विषय बन चुका है कि आखिरकार पीएम मोदी अयोध्या से इतनी दूरी क्यों बरते हुए हैं. जहां पर पीएम मोदी की रैली प्रस्तावित है वहां से महज कुछ दूरी पर ही राम मंदिर है लेकिन पीएम मोदी यहां नहीं आ रहे हैं.

महज 37km की दूरी पर है जनसभा
पीएम नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा अयोध्या जिले के गोसाईंगंज ब्लॉक के मया बाजार में प्रस्तावित है. यह जिला मुख्यालय से करीब 37 किमी दूरी पर है. पीएम की सभा का असर फैजाबाद लोकसभा सीट के अलावा इससे सटी हुई अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, आजमगढ़, बस्ती, जौनपुर और प्रतापगढ़ सीटों पर देखने को मिलेगा.

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2014 में जीती थी यहां की सभी सीटें
इससे पहले पीएम मोदी ने बहराइच व बाराबंकी में जनसभा की. जिसके जरिए उन्होंने बाराबंकी, बहराइच के अलावा कैसरगंज, श्रावस्ती और गोंडा जैसी सीटों के मतदाताओं को साधा है. 2014 में इन सारी सीटों को भाजपा जीतने में कामयाब रही थी.

पांचवे चरण का मतदान
लोकसभा चुनाव में चार चरणों के मतदान हो चुके हैं और 6 मई को पांचवे चरण का मतदान होना है. पांचवे चरण में फैजाबाद सीट के अलावा धौरहरा, सीतापुर, मोहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, बांदा, फतेहपुर, कौशाम्बी, बाराबंकी, बहराइच, कैसरगंज और गोंडा लोकसभा सीटों पर मतदान होना है. पीएम मोदी अयोध्या रैली से भाजपा को आस-पास की सीटों पर फायदा मिल सकता है.

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रामलला के मुख्य महंत सतेंद्र दास का पीएम पर हमला
पीएम मोदी के अयोध्या दौरे से पहले रामलला के मुख्य महंत सतेंद्र दास ने कहा, ‘रामलला के लिए कांग्रेस ने बहुत कुछ किया. इंदिरा जब पीएम थी तब राममन्दिर निर्माण के लिए रथ यात्रा का संकेत मिला था, तब अगर दिल्ली में बात हो जाती तो मंदिर बन जाता. फिर शिला पूजन भी कांग्रेस ने किया. बाबरी ढांचा जब ढहाया गया तब भी कांग्रेस की सरकार थी. आज जो राम चबूतरा बना है कांग्रेस. ही थी जो बन गया. बीजेपी और वीएचपी तो सत्ता के लिए ही राममन्दिर आंदोलन चलाती रही है. मोदी जी को संकोच है क्योंकि राम के लिए तो कुछ किया नहीं अब यहां कैसे आएंगें.’