उन्नाव कांड: काश ! सिस्टम अगर ‘सिस्टम’ से काम करता तो जिंदगी-मौत की जंग न लड़ रही होती पीड़िता

यूपी के विधायक कुलदीप सिंह सेगर के खिलाफ रेप और हत्या के मामले में सीबीआई की तीन अलग अलग चार्टशीट एक साल पहले जुलाई महीने में दाखिल हो चुकी है, लेकिन हैरत इस बात की भी है कि अभी तक किसी भी मामले में ट्रायल शुरू ही नहीं हुआ है.

नई दिल्ली: यूपी के बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की हनक और धमक के सामने नतमस्तक सिस्टम पर आज सुप्रीम कोर्ट का हंटर चला. अब जांच भी तेजी से होगी. केस भी ट्रांसफर होगा. सुनवाई भी रोज होगी और फैसला भी जल्दी होगा. काश ! ये सब पहले हुआ होता काश ! सुप्रीम कोर्ट तक उन्नाव की उस रेप पीड़िता और उसके परिवार की फरियाद पहले पहुंची होती तो शायद हालात इतने बुरे नहीं होते.

जिंदगी और मौत के बीच झूलती वो बेटी वेंटीलेटर पर न होती. उसकी चाची और मौसी की ऐसी मौत न हुई होती. गुहार तो उस रेप पीड़िता ने यूपी के पुलिसिया सिस्टम से पैंतीस बार लगाई थी, जी हां पैंतीस बार लिखित गुहार लगाई थी कि उन्हें बीजेपी विधायक सेंगर के गुंडों की तरफ से धमकाया जा रहा है. उनकी जान को खतरा है. काश ! उसकी ये गुहार किसी ने सुनी होती ! काश ! उस परिवार की गुहार नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गई होती.

वो बार-बार गुहार लगाती रही लेकिन न सिस्टम ने सुनी न सरकार ने. फिर उसने सुप्रीम कोर्ट को भी चिट्ठी लिखी लेकिन वो चिट्ठी भी चीफ जस्टिस तक वक्त रहते पहुंच नहीं पाई. चीफ जस्टिस को पता तब चला जब इतना इतनी बड़ी घटना हो गई , जिसमें दो की जान चली गई , दो जान खतरे में है . अबबीजेपी ने भी कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी ने निकालकर मुक्ति पा ली है . काश ! ये पहले हुआ होता . एक विधायक , जिसके खिलाफसीबीआई रेप और हत्या के मामले में तीन तीन चार्जशीट दाखिल कर चुकी हो , जो 15 महीने से जेल मे हो , उसे अब निकाला गया ,जब मामला सुप्रीम कोर्ट तक आ गया .

यूपी के विधायक कुलदीप सिंह सेगर के खिलाफ रेप और हत्या के मामले में सीबीआई की तीन अलग अलग चार्टशीट एक साल पहले जुलाई महीने में दाखिल हो चुकी है, लेकिन हैरत इस बात की भी है कि अभी तक किसी भी मामले में ट्रायल शुरु ही नहीं हुआ है. फैसला तो दूर की बता है . कहां तो ऐसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की बातें होती है और कहां एक साल तक सुनवाई ही शुरु नही हुई.

सुनवाई अब होगी जब सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की मियाद तक कर दी है . इस बीच सीबीआई जांच से ये भी पता चलेगा कि रायबरेलीजा रही पीड़िता और उसके परिजनों को मारने की साजिश थी या वो हादसा था . तो सवाल यही है कि बीजेपी विधायक सेंगर परइतना मेहरबान क्यों था सिस्टम ? सेंगर की धमकियों को क्यों अनसुनी करती रही सरकार ? एक रेप पीड़िता को इंसाफ के लिए दरदर क्यों भटकना पड़ा ? अपने परिवार के तीन सदस्यों की जान गंवाने के बाद पीड़िता को मिल जाएगा इंसाफ ?

ये भी पढ़ें- ये कंधा उस दरिंदे का है जिसने इस गुड़िया के साथ हैवानियत की हदें पार कीं

उन्नाव गैंगरेप: जेल में ऐसे कानून की धज्जियां उड़ा रहा MLA कुलदीप सिंह सेंगर, देखें VIDEO

पहले से ही कोमा में हैं CCD फाउंडर वीजी सिद्धार्थ के पिता, जब जानेंगे नहीं रहा बेटा तब होगा क्या?

अल कायदा का पोस्टर बॉय था हमजा, तैयार कर रहा था आतंक की यंग ब्रिगेड