यूपी में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, बच्चों को भेजीं एक्सपायर्ड दवाइयां

स्कूलों में खराब दवा के पहुंचने की खबर मिलते ही अफसरों में हड़कंप मच गया

बांदा: यूपी के बांदा में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है. राष्ट्रीय कृमि दिवस पर बच्चों को पेट के कीड़ा मारने वाली दवा एलवेंडा जोल वितरण के लिए बीआरसी में जो दवा भेजी गई है उसमें कुछ डिब्बे एक्सपाएरी डेट के मिले.

इससे बड़ोखर बीआरसी प्रभारी ने फोन कर क्षेत्र के सभी स्कूलों में दवा खिलाने पर रोक लगा दी. बीएसए को भी सूचित किया है. स्कूलों में खराब दवा के पहुंचने की खबर मिलते ही अफसरों में हड़कंप मच गया और मामला लीपापोती तक पहुंच गया.

जो दवा भेजी थी वह ठीक थी…

इस मामले में सीएमओ का कहना है कि हमने जो दवा भेजी थी वह ठीक थी तो एक्सपायर दवा कहाँ से आई इसकी जांच चल रही है वहीं स्कूल और शिक्षा विभाग के अधिकारी कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.

दवा खा चुके बच्चों की निगरानी

फिलहाल जिले के 1396 बेसिक और 641 जूनियर हाईस्कूल के 2,25,184 सरकारी स्कूली बच्चों की जान आफत में फंसी रही. शिक्षा विभाग को आनन फानन में सभी स्कूलों को दवा न खाने की चेतावनी जारी करनी पड़ी, और दवा खा चुके बच्चों की निगरानी के आदेश दिए गए.

स्वास्थ्य विभाग के अफसर कर रहे जांच 

फिलहाल स्वास्थ विभाग के अफसर जांच कर रहे हैं लेकिन कोई भी ठोस बात करने की बजाय अपना दामन पाक साफ बताने के प्रयास अधिक हो रहे हैं. यह अभियान 19 वर्ष तक कि आयु के लोगों में नेशनल प्रोग्राम के रूप में साल में दो बार चलाया जाता है और यह 29 अगस्त से 4 सितंबर तक चलेगा.

दवा खाने का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं

फिलहाल 29 डिब्बों की 5800 एक्सपायर डेट की टेबलेट्स को वापस ले लिया गया है लेकिन कितने बच्चों ने खराब दवा खा ली इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, अधिकारी बस यही दुआ कर रहे हैं कि किसी बच्चे की हालत न बिगड़े.

एक्सपायर डेट के बॉक्स मिले

जिले के 8 ब्लाकों में से बड़ोखर ब्लॉक की बीआरसी से सरकारी स्कूलों को भेजी गयी दवा के गत्तों से कई में एक्सपायर डेट के बॉक्स मिले थे जिनमें मार्च अप्रैल 2019 की अंतिम तारीख पड़ी थी.

एक्सपायर टेबलेट लौटाईं

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ संतोष ने बताया कि “किसी बच्चे ने एक्सपायर टेबलेट नहीं खायी है, हमने वर्ष 2022 को एक्सपायर होने वाली दवा सप्लाई की थी 2019 वाले डिब्बे कहाँ से आये हम यह पता करवा रहे हैं, लेकिन हमने इन्हें नही भेजा.”

उन्होंने कहा कि दवा की क्षमता कम हो सकती है लेकिन यह जानलेवा नहीं है. वहीं दूसरी ओर स्कूलों ने एक्सपायर दवाएं लिखित तौर पर स्वास्थ विभाग को लौटा दी हैं.

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