जानें, EC ने क्‍यों रद्द कर दी वाराणसी सीट से तेजबहादुर यादव की उम्‍मीदवारी

पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से नॉमिनेशन भरने वाले तेजबहादुर यादव को चुनाव आयोग से सर्टिफिकेट लाना था, जिसके लिए बुधवार 11 बजे तक का समय दिया गया था, जानिए कौन सा था वो सर्टिफिकेट और किस एक्‍ट में फंस गए तेजबहादुर.
why EC rejects BSF jawan nomination, जानें, EC ने क्‍यों रद्द कर दी वाराणसी सीट से तेजबहादुर यादव की उम्‍मीदवारी

वाराणसी: पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी में महागठबंधन (सपा-बसपा-आरएलडी) के प्रत्‍याशी घोषित किए गए बर्खास्‍त बीएसएफ जवान तेजबहादुर यादव का नॉमिनेशन बुधवार को रद्द कर दिया गया.

सपा ने तेजबहादुर यादव को उम्‍मीदवार घोषित करने से पहले वाराणसी सीट पर शालिनी यादव को टिकट दिया था, लेकिन ऐन मौके पर तेजबहादुर को उम्‍मीदवार बना दिया गया. यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन नामांकन रद्द होने के चलते महागठबंधन की किरकिरी हो गई है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है आखिर क्‍यों तेजबहादुर यादव का नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया? आइए आपको बताते हैं:

वाराणसी के डीएम ने बताया कि उनके पास 102 लोगों ने 119 नामांकन पत्र आए थे, जिनमें 31 नामांकन पत्र स्‍वीकृत कर लिए गए. इनमें तेजबहादुर का नाम भी शामिल था, जिन्‍होंने दो नामांकन दाखिल किए थे.

डीएम ने बताया कि उनकी स्‍क्रूटनी को डेफर किया गया था और कोई भी व्‍यक्ति जो सेंट्रल गवर्नमेंट यानी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया या स्‍टेट गवर्नमेंट में नौकरी कर रहा हो और उससे डिसमिस हुआ हो और उस डिसमिसल की तारीख पांच साल के अंदर की हो, यानी पांच साल खत्‍म नहीं हुए हों. ऐसे सभी केसेज में सेक्‍शन- 9 ऑफ रिप्रेजेंटेशन पीपुल एक्‍ट और सेक्‍शन 33 के सब-क्‍लॉज- 3, इन दोनों में ये बाध्‍य है कि वो कैंडिडेट एक सर्टिफिकेट लाएगा. यह सर्टिफिकेट इलेक्‍शन कमीशन ऑफ इंडिया देगा.

डीएम ने बताया कि जो भी व्‍यक्ति है, वह देश के खिलाफ कोई काम करने की वजह से बर्खास्‍त न हुआ हो और उसकी बर्खास्‍तगी की वजह भ्रष्‍टाचार भी न हो.

डीएम ने बताया कि तेजबहादुर को हमने मौका भी दिया, आज 11 बजे तक का, लेकिन कोई सर्टिफिकेट नहीं आया, पूरी सुनवाई के बाद तेजबहादुर का नामांकन रद्द कर दिया गया.

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तेजबहादुर को कर दिया गया बर्खास्‍त

तेज बहादुर यादव का नाम देश के लिए नया नहीं है. दो साल पहले उनका एक वीडियो खूब वायरल हुआ और मीडिया में चर्चा का विषय बना. इस वीडियो में तेज बहादुर यादव बतौर फौजी उस खाने की शिकायत कर रहे थे जो उन्हें ड्यूटी के दौरान मिलता था.

उस वीडियो में तेज बहादुर ने अफसरों की भी शिकायत की थी. गृहमंत्रालय तक लिखी गई उनकी चिट्ठी का कुछ नहीं हुआ तो तेज बहादुर यादव ने मोबाइल से वीडियो बनाकर वायरल कर दिया.

वीडियो फैला तो सेना से लेकर फौज पर सियासत करनेवालों तक में खलबली मची. सेना की ओर से जांच के आदेश दिए गए और अनुशासनहीनता के आरोप में तेज बहादुर यादव को ही बीएसएफ से निकाल दिया गया.

इसके बाद तेज बहादुर एक बार फिर सुर्खियों में आए जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ वाराणसी से उम्मीदवारी का ऐलान किया था. तेज बहादुर के मुताबिक पीएम मोदी सिर्फ फौजियों की बातें करते हैं जबकि असल में उनके लिए कुछ नहीं करते.

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