हर मंडल में 6 माह में स्थापित करें मॉडर्न लैब: योगी आदित्यनाथ

“जो ब्लड बैंक मानक को पूरा कर रहे हैं उनको प्रोत्साहन दें और जो मानक के अनुरूप नहीं हैं उनकी जांच कर उनको दंडित करें.”

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोकभवन में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि थोक एवं फुटकर दवा लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में होने वाली देरी पर नाराजगी जताई.

उन्होंने कहा कि ये प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है, लेकिन फॉर्मासिस्ट के अलावा कुछ और चीजें हैं जिसके नाते व्यापारी परेशान हो रहे हैं. इसको पूरी तरह से पारदर्शी बनाएं. आवेदन के हफ्ते भर बाद लाइसेंस मिल जाना चाहिए. अगर नहीं मिलता है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित कराएं. जो ब्लड बैंक मानक को पूरा कर रहे हैं उनको प्रोत्साहन दें और जो मानक के अनुरूप नहीं हैं उनकी जांच कर उनको दंडित करें. यह सुनिश्चित कराएं कि पेशेवर रक्तदाता ब्लड बैंक का लाभ न उठा सकें.

मुख्यमंत्री ने कहा कि, हर मंडल में एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला 6 महीने के अंदर तैयार करें, जिससे नमूनों की नियमित जांच और निगरानी हो सके. बोतल बंद पानी और जार को लेकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह पानी कितना शुद्ध है इसकी जांच कराने के लिए व्यापक अभियान चलाएं. लोगों को जागरुक किया जाए कि आखिरकार यह पानी कितने समय तक पीने लायक रहता है, इसकी शुद्धता क्या है. किसी को पानी के नाम पर जहर पिलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी. अगर आप शुद्ध पानी मुहैया करा देते हैं तो आधी बीमारियां ऐसे ही खत्म हो जाती है.

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने औषधि नियंत्रक कंट्रोलर की नियुक्ति न होने पर नाराजगी जताई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाए. लंबित वादों को लेकर भी योगी नाखुश नजर आए. उन्होंने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जाए जिसमें साफ निर्देश हो कि वो निगरानी कमेटी की बैठक में जिला जज के सामने इस मुद्दे को उठाएं, अगर वहां से कोई दिक्कत हो तो शासन को लिखें, शासन चीफ जस्टिस से इस मुद्दे पर विचार विमर्श कर लेगा.

मुख्यमंत्री ने वाराणसी और लखनऊ में ‘क्लीन स्ट्रीट फूड हब’ विकसित किए जाने का निर्देश दिया. यह भी कहा कि आटा, दूध और नमक आदि में अलग से विटामिन मिलाने ( फोर्टिफाइड) से पहले शोध के जरिए यह सुनिश्चित कर लें कि वाकई में किस क्षेत्र में किस विटामिन की कमी है. अनावश्यक रुप से कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त विटामिन न मिलाएं.

बैठक में विभागीय मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह( मोती सिंह), मुख्य सचिव, डॉ. अनूप चंद्र पाण्डेय, अपर मुख्य सचिव, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अनिता भटनागर जैन और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे.