केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal) को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने निशंक के खिलाफ अवमानना कार्रवाही पर रोक लगा दी है. यह मामला उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी बंगले का किराया वसूलने से जुड़ा था. बता दें कि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने किराया नहीं देने पर पूर्व सीएम के खिलाफ अवमानना कार्रवाही का ऑर्डर दिया था.

अब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को इस मामले में नोटिस जारी किया है. बता दें कि निशंक (Ramesh Pokhriyal) सरकारी बंगलों के किराए का भुगतान करने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 6 महीने के भीतर बकाया जमा करने का दिया था निर्देश

अब नैनीताल हाईकोर्ट के उस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें सरकारी बंगला नहीं खाली करने वाले मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के खिलाफ अवमानना कि कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया था. रमेश पोखरियाल निशंक ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास और अन्य सुविधाओं का बकाया 6 माह के भीतर जमा करने के निर्देश दिया था. पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा राज्यपाल (महाराष्ट्र) भगत‌ सिंह कोश्यारी को भी हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया था. उनके ‌आवास और अन्य सुविधाओं का 47 लाख 57 हजार 758 रुपये बकाया है.

उत्तराखंड स्थित बद्रीनाथ मंदिर (Badrinath Temple) के कपाट अब सर्दियों में बंद हो जाएंगे. जानकारी मिली है कि सर्दियों को देखते हुए बद्रीनाथ मंदिर (Badrinath Temple) के कपाट 19 नवंबर से बंद कर दिए जाएंगे. इस बात का फैसला रविवार सुबह 11 बजे लिया गया. बता दें कि हर साल दशहरे के दिन ही मंदिर को बंद करने वाली तारीख निकाली जाती है और उसका ऐलान किया जाता है.

चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ बीडी सिंह, बद्रीनाथ धाम के रावल ईश्वरी प्रसाद के साथ-साथ सैंकड़ों श्रद्धालु उस दिन (19 नंवबर) को बद्रीनाथ मंदिर में मौजूद रहेंगे.

केदारनाथ के द्वार 16 नवंबर को होंगे बंद

दूसरी तरफ 11वें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ मंदिर के द्वार 16 नवंबर को बंद होंगे. भगवान टुंगनाथ मंदिर के द्वार बंद होने की तारीख 4 नवंबर रखी गई है. वहीं मदमहेश्वर के द्वार 19 नवंबर को बंद होंगे.

बता दें कि अभी 5 अक्टूबर को ही बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी की गई थी. इसे अब प्रतिदिन तीन हजार कर दिया गया था. इसी के साथ गंगोत्री धाम के लिए श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या 900 और यमुनोत्री धाम के लिए 700 कर दी गयी थी.

पहले बद्रीनाथ जाने के लिये 1200, केदारनाथ के लिये 800, गंगोत्री के लिये 600 तथा यमुनोत्री के लिये अधिकतम 400 श्रद्धालुओं को ही अनुमति दी जा रही थी.

बता दें कि देवस्थानम बोर्ड ने चारधाम यात्रा के लिये पिछले दिनों प्रदेश से बाहर के यात्रियों के लिए कोरोना—मुक्त जांच रिपोर्ट लाने की बाध्यता हटा दी थी जिसके बाद धामों के दर्शन के लिए ई—पास मांगने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई. इसी के मद्देनजर बोर्ड ने चारों धामों के दर्शन हेतु तीर्थयात्रियों की अधिकतम संख्या को बढ़ा दिया.

कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के बीच उत्तराखंड (UK) सरकार ने शनिवार को राज्य में कक्षा 10 और 12 के निजी बोर्डिंग और गैर-बोर्डिंग स्कूलों (Schools) को फिर से खोलने (Reopen)  के लिए एसओपी (SOP) जारी की.

एसओपी (SOP) के तहत स्कूलों को फिर से खोलने से पहले और स्कूल बंद होने के बाद सैनिटाइज (Sanitiser) करना जरूरी होगा. स्कूल में बच्चों के लिए खासकर एंट्री गेट पर हैंड सैनिटाइटर और थर्मल स्क्रीनिंग (Thermal Screening) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.

ये भी पढ़ें- ‘अनलॉक 5.0’ में मिली छूट फिर भी दिल्ली में नहीं खुलेंगे स्कूल, केजरीवाल का फैसला

कोरोना मुक्त छात्रों को ही हॉस्टल में पहने की अनुमति

क्वारंटीन इलाकों में मौजूद निजी हॉस्टल स्कूल परिसरों में छात्रों को खाने के लिए गर्म खाना उपलब्ध कराना होगा. दरअसल उत्तराखंड बोर्डिंग स्कूलों के लिए काफी फेमस है, खासकर देहरादून में कई नामी बोर्डिंग स्कूल हैं, जहां देशभर से छात्र पढ़ने के लिए पहुंचते हैं.

एसओपी के मुताबिक कंटनमेंट जोन के बाहर स्कूल हॉस्टल में सिर्फ उन्हीं छात्रों को रहने की अनुमति दी जाएगी, जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं हों, और उनके पास कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट होनी भी अनिवार्य है.

एसओपी के मुताबिक निजी हॉस्टल स्कूलों में शिक्षक, अन्य कर्मचारियों के साथ ही छात्रों के लिए भी अलग क्वारंटीन इलाके की जरूरत होगी. जरूरत पड़ने पर अगर किसी छात्र को क्वारंटीन किया जाता है, तो उसे खाना, सुरक्षा के साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा भी मिल मिलनी जरूरी होगी.

हॉस्टल में कोरोना नियमों का करना होगा पालन

हॉस्टल के अंदर बेड के बीच दूरी सुनिश्चित करने के लिए, टेंपररी पार्टिशन्स लगाए जाएंगे . कर्मचारियों के अलावा किसी को भी हॉस्टल में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. वहीं खान बनाने और परोसने के दौरान स्कूल प्रबंधन को कोरोना नियमों का पालन करना होगा. रसोइयों का परीक्षण करना होगा, थर्मल स्क्रीनिंग के बाद भी कर्मचारियों को रसोई में जाने की अनुमति होगी.

स्कूल और हॉस्टल परिसर में कहीं भी थूकने पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसके साथ ही छात्रों को शिक्षकों की मौजूदगी में 40 सेकेंड तक हाथ धोने होंगे, करोना के मद्देनजर इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए छात्रों को गर्म खाना परोसना जरूरी होगा.

ये भी पढ़ें- Kumbh Mela 2021: रोजाना 35-50 लाख लोगों के गंगा स्नान का अनुमान: उत्तराखंड मंत्री मदन कौशिक

स्कूल खुलने से 72 घंटे पहले एप्लीकेशन के साथ स्टाफ और छात्रों को मुख्य शिक्षा अधिकारी को कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट जमा करना जरूरी होगी. कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों को स्कूल परिसर में ही रहना होगा.

उत्तराखंड (Uttarakhand) के धारचूला (Dharchula) में इंटरनैशनल सस्पेंशन ब्रिज (International Suspension Bridge) को तीन दिनों के लिए फिर से खोल दिया गया है. ये ब्रिज, भारतीय पेंशन पाने वाले उन नेपाली नागरिकों के लिए खोला गया है, जिन्होंने भारतीय सेना और अन्य भारतीय संगठनों में अपनी सेवा दी थी. इस ब्रिज को तीन दिनों के लिए केवल 5 घंटे के लिए ही खोला जाएगा, ताकि भारतीय पेंशन पाने वाले नेपाली नागरिक बैंकों में जाकर अपने पैसे निकाल सकें.

जानकारी के मुताबिक, ब्रिज को केवल तीन दिनों (21-23 अक्टूबर) के लिए ही खोला गया है. ये पेंशन केवल नेपाल के भारतीय सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलेगी, जिन्होंने भारतीय सेना और अन्य विभागों में कार्य किया था. नेपाली नागरिक, भारत में विभिन्न बैंकों और डाकघरों से अपनी पेंशन निकाल सकते हैं.

ये भी पढ़ें: असम-मिजोरम सीमा पर शांति बनाए रखने पर बनी सहमति, अमित शाह ने की सीएम सोनोवाल से बात

तहसीलदार मोहन गोस्वामी ने बताया, ‘नेपाली नागरिकों के लिए ये ब्रिज बुधवार को 5 घंटे यानी सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक खोला गया था. इस ब्रिज के खुलने के बाद 238 नेपाली नागरिकों ने सीमा पार कर भारत में पेंशन लेने के लिए प्रवेश किया था. वहीं इस दौरान 151 भारतीय नागरिकों ने भी नेपाल का रुख किया. भारत आने वाले अधिकतर नेपाली नागरिक भारत में सरकारी सेवाओं से रिटायर हुए लोग थे और अपनी पेंशन लेने के लिए वह भारत आए थे’.

धारचूला के डिप्टी कलेक्टर अनिल कुमार शुक्ला ने कहा, ‘ऐसे सभी पेंशनभोगियों को बैंकों से पैसे निकालने के लिए हर महीने यह सुविधा दी जाएगी. नेपाल के अनुरोध पर, नेपाल के भारतीय सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पुल खोले गए हैं.

ये भी पढ़ें: कश्मीर पर ‘पहले हमले’ के 73 साल, उपराज्यपाल सिन्हा बोले- पाकिस्तान का नकाब उतारने का वक्त आया

उत्तराखंड (Uttarakhand) वन विभाग द्वारा देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (Jolly Grant Airport) के विस्तार के लिए ‘थानो स्थित जंगल से दस हजार पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों ने देहरादून हवाई अड्डे (Dehradun Airport) के बाहर विरोध प्रदर्शन (Protest) किया. इस दौरान लोग ‘थानो बचाओ’ (Save Thano) के नारे लगाने के साथ पेड़ों को गले लगाते नजर आए. ‘थानो’ देहरादून का एक फॉरेस्ट एरिया है.

विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों ने बताया कि ‘किसी भी हाल में ऐसे विध्वंसकारी प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन नहीं होने देंगे, थानो जंगल अनमोल है, इसमें मौजूद हर पेड़ मायने रखता है’. मालूम हो कि उत्तराखंड वन विभाग और उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand government) ने शिवालिक ऐलिफेंट रिज़र्व की 243 एकड़ वन भूमि को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को देने का फैसला लिया है. प्रस्ताव के मुताबिक इसमें अलग-अलग प्रजातियों के कुल 9745 पेड़ काटे जाएंगे, इन पेड़ों में शीशम (2135), खैर (3405), सागौन (185), गुलमोहर (120) सहित 25 अन्य प्रजातियां शामिल हैं.

राज्य सरकार ने एयरपोर्ट का विस्तार करने के अपने फैसले का बचाव करने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से देहरादून हवाई अड्डे की निकटता का हवाला दिया है. उत्तराखंड सरकार ने कहा कि ‘उत्तराखंड चीन के साथ एक सीमा साझा करता है, रणनीतिक महत्व के लिए जॉली ग्रांट हवाई अड्डा बहुत महत्वपूर्ण हैं.

ये भी पढ़ें: लद्दाख: चीन से तनाव के बीच US से अहम सौदा, तत्काल आधार पर खरीदी गईं युद्ध संबंधी किट्स

उत्तराखंड राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड ने इस साल जून में संरक्षित गंगोत्री नेशनल पार्क के भीतर 73 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण को मंजूरी दी थी. इस क्षेत्र का उपयोग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन सड़कों के निर्माण के लिए किया जाएगा, इससे भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की आवाजाही आसान हो जाएगी.

वर्तमान में, देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर रनवे 2,140 मीटर लंबा है. एएआई (AAI) ने रनवे की लंबाई को 2,140 मीटर से 2,765 मीटर तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. इस निर्माण की लागत 353 करोड़ रुपये है, इस रनवे के विस्तार के बाद से देहरादून एयरपोर्ट की क्षमता आठ गुना बढ़ जाएगी. हालांकि, पर्यावरणविदों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि ‘थानो रेंज में 10,000 से अधिक पेड़ों की कटाई न केवल हाथी गलियारों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि इस क्षेत्र की पर्यावरण-विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित कर सकती है. यहां पेड़ों के कटान से वन में मौजूद हाथी, गुलदार, चीतल, सांभर व अन्य वन्य जीवों के भविष्य के लिए बड़ा खतरा पैदा होगा, यहीं नहीं हवाई अड्डे के विस्तार के लिए दी जाने वाली जमीन राजाजी नेशनल पार्क के इको सेंसेटिव जोन के दस किलोमीटर के दायरे में पड़ती है और इसके तीन किमी के दायरे में एलीफैंट कॉरिडोर है, इतनी भारी संख्या में पेड़ों के काटे जाने की वजह से डोईवाला क्षेत्र में मौसम में भारी बदलाव होगा.

ये भी पढ़ें: NEET Result 2020: पास प्रतिशत में दिल्ली आगे, हरियाणा दूसरे नंबर पर

पीपल फॉर एनिमल नामक एनजीओ के उत्तराखंड चैप्टर की सेक्रेटरी गौरी मौलेखी ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बताया, ‘वन और वन्यजीव ही उत्तराखंड पर्यटन और रोजगार के मुख्य स्तंभ हैं, इन्हें सुरक्षित रखना ही सरकार का मुख्य कर्तव्य होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इसके बिल्कुल उलट काम किया जा रहा है, यह प्रकृति के लिहाज से घातक होगा.’

जॉली ग्रांट एयरपोर्ट के डायरेक्टर, डीके गौतम ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि ‘उत्तराखंड सरकार, पर्यावरण मंत्रालय द्वारा लगाए गए मानदंडों के अनुसार वन आरक्षित करेगी. डीके गौतम ने कहा, ‘जहां तक ​​पेड़ों का सवाल है, किसी और जगह पर वृक्षारोपण किया जाएगा.

कोरोना महामारी की मार आज पूरी दुनिया झेल रही है. गरीब आदमी का काम पूरी तरह से ठप है, लोग अपना घर चलाने के लिए भी मोहताज हो गए हैं. ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के आगरा से सामने आया है. यहां एक गरीब महिला भगवान देवी, जो कि ‘रोटी वाली अम्मा’ के नाम से प्रसिद्ध हैं, आज अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए काफी जद्दोजहद कर रही हैं.

रोटी वाली अम्मा आगरा के सेंट जॉन कॉलेज के पास लोगों को मात्र 20 रुपए में एक वक्त का खाना मुहैया कराती हैं, और इसी काम से वह अपना घर चलाती हैं. लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उनका काम पूरी तरह से ठप पड़ा है. उन्होंने न्यूज एजेंसी से बातचीत में अपना दर्द साझा किया.

ये भी पढ़ें- 73 साल में पहली बार ‘अर्थव्यवस्था और आम आदमी’, दोनों की कमर टूटी: कांग्रेस

काम न चलने से परेशान ‘रोटी वाली अम्मा’

ये भी पढ़ें-COVID-19 महामारी में बिजनेस सेक्टर कैसे हो मजबूत? पार्लियामेंट्री कमेटी की मीटिंग में इन बातों पर फोकस

‘रोटी वाली अम्मा’,  भगवान देवी का कहना है कि वह पिछले 15 सालों से खाना बेचने का काम कर रही हैं, लेकिन मुश्किल से ही उन्होंने ऐसा समय देखा हो जब, उनका खाना न बिका हो. कोरोना महामारी की वजह से इन दिनों उनका काम पूरी तरह से ठप है, इन दिनों मुश्किल से ही कोई खरीदार उनकी दुकान पर खाना खरीदने आ रहा है. इससे उनके सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

कोरोना महामारी की वजह से ज्यादातर लोग काम न चलने से परेशान है, रोजाना कमाने खाने वालों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है.  लोग अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए काफी परेशान हैं. रोटी वाली अम्मा भी पिछले 15 साल से खाने का बिजनेस कर रही हैं, लेकिन कोरोना महामारी के बीच ग्राहक उनकी दुकान पर नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे वह बहुत परेशान हैं.

उत्तर प्रदेश (UP)  के गोंडा में पुजारी सम्राट द्वारा जमीन हड़पने और खुद पर हमला (Attack) करवाने का खुलासा होने के बाद पुलिस (Police)mने सात लोगों को गिरफ्तार (Arrest) किया है. दरअसल पुजारी सम्राट दास ने 10 अक्टूबर को खुद पर हमला (Attack) कराया था, क्यों कि वह अमर सिंह नाम के व्यक्ति को इस मामले में फंसाना चाहता था, और उसकी 120 बीघा जमीन (Land) हड़पना चाहता था

यह खुलासा होने के बाद कि, गोंडा (Gonda) में पुजारी सम्राट दास ने 10 अक्टूबर को खुद पर हमला करवाया था, क्योंकि वह अमर सिंह को झूठे मामले में फंसाना चाहता था और उसकी 120 बीघा जमीन (Land) हड़पना चाहता था, गोंडा पुलिस ने  7 आरोपियों (Accused) को गिरफ्तार किया है.

ये भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश: गोंडा में तीन दलित नाबालिग बहनों पर एसिड से हमला, एक की हालत गंभीर

आरोपियों के पास से देसी तमंचा जब्त

पुजारी पर हुए हमले को लेकर विपक्ष सीएम योगी आदित्यनाथ पर पूरी तरह से हमलावर था, लेकिन अब इस मामले में सच्चाई सामने आ चुकी है.  गोंडा पुलिस ने इस मामले में शनिवार को तिरेमनोरमा गांव के हरिद्वार सिंह बाग से मुन्ना सिंह, विपिन, नीरज सिंह, सोनू सिंह, महंत सीताराम, शिव शंकर सिंह और विनय कुमार को गिरफ्तार कर लिया. वहीं सोनू सिंह, महंत सीताराम, और मुन्ना सिंह के पास से देसी तमंचा जब्त किया गया है.

आरोपी मुन्ना सिंह ने कथित तौर पर पुजारी पर गोली चलाई थी, जिसके बाद पुजारी ने दावा किया कि अमर सिंह ने मुकेश सिंह, भयहरण सिंह और दरोगा सिंह के साथ मिलकर उस पर तब हमला किया था, जब वह 10-11 अक्टूबर की रात को मंदिर में सो रहा था.

अस्पताल से छुट्टी के बाद होगी पुजारी की गिरफ्तारी

गोंडा के एसपी शैलेष पांडेय ने कहा कि खुद पर कराए गए हमले में पुजारी सम्राट दास को कंधे पर गोली लगी है, उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. अस्पताल से छुट्टी मिलते ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

वहीं गोंडा एसपी ने कहा कि पुजारी और अमर सिंह के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, जिसके बाद पुजारी ने उसे फंसाने की योजना बनाई थी. वहीं आरोपी विनय कुमार अमर सिंह के खिलाफ आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की योजना भी बना रहा था.

ये भी पढ़ें- अंबेडकर आज होते तो हाथरस और गोंडा जैसी घटनाओं को देखकर दलितों के लिए क्‍या कदम उठाते?

पुलिस ने पुजारी के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी, और उसी दिन दरोगा और भयहरण को गिरफ्तार किया था, लेकिन अब मामला साफ होने के बाद दोनों को रिहा कर दिया जाएगा.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आज वर्चुअल तरीके से उत्तराखंड (Uttarakhand) के नए बीजेपी कार्यालय (BJP Office) का शिलान्यास किया. इस दौरान उन्होंने कई पार्टियों को घेरते हुए परिवारवाद (Familyism) के मुद्दे पर बात की. उन्होंने कहा कि अगर कार्यालय किसी नेता (Leader) के घर से चलता है तो संगठन या पार्टी एक व्यक्ति की हो जाती है. दूसरी पार्टियां परिवार की पार्टी बन गई हैं,जबकि बीजेपी में पार्टी ही परिवार है.

उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से  कांग्रेस (Congress) पर निशाना साधते हुए बीजेपी को दूसरे दलों से अलग (Different To Other Parties) बताया, और कहा कि सभी पार्टियां आज परिवार भी पार्टियां बन गई हैं, और परिवार तक ही सीमित हो गई हैं. कोई भाई-बहन तो कोई मां-बेटे को बचाने में लगा हुआ है. आज सभी राजनीतिक दल एक छोटे से परिवार के लिए सीमित होकर रह गए हैं.

ये भी पढ़ें- Bihar election 2020: विकास विरोधियों को पहचानें, बड़े-बड़े वादों से बचे जनता- जेपी नड्डा

पार्टी कार्यालय का खास महत्व-जेपी नड्डा

जेपी नड्डा ने कहा कि आने वाले 50 साल तक उत्तराखंड बीजेपी ऑफिस बहुत अच्छा काम करेगा. उन्होंने कहा कि कार्यालय में हमारे काम के लिए सही वातावरण मिलता है, यह हमारे काम को स्थायित्व देता है और विचार भी देता है.

जेपी नड्डा ने कार्यालय के महत्व को बताते हुए कहा कि किताबें तो घर में भी पढ़ी जा सकती हैं, लेकिन पार्टी की लाइब्रेरी में किताबें पढ़ने से कार्यकर्ता को प्रेरणा मिलती है.

संगठन चलाने के लिए ‘पांच क’ बहुत जरूरी

बीजेपी अध्यक्ष ने पार्टी और संगठन संचालन के लिए ‘पांच क’ को जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता, कार्यक्रम, कोष, कार्यकारणी और कार्यालय का बहुत ही महत्व है.

ये भी पढ़ें- उत्तराखंड कैबिनेट ने दिया राज्यकर्मियों को बड़ी राहत, अब नहीं कटेगी एक दिन की सैलरी

जेपी नड्डा ने उत्तराखंड की बीजेपी इकाई की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कार्यकर्ता का निर्माण किया, कार्यक्रमों को बढ़ाया, कार्यकारणी के माध्यम से संगठन को सशक्त किया, इसके साथ ही फंड का भी ध्यान रखा, और अब एक भव्य कार्यालय बनाया जा रहा है.

उत्तराखंड (Uttrakhand) की कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में बुधवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी. इसके साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) की पहल पर मंत्रिमंडल ने त्योहारी सीजन में प्रदेश के ढाई लाख कर्मिकों को बड़ी राहत दी है. अक्टूबर माह समेत आगे के महीने में अब एक दिन की वेतन कटौती नहीं होगी. अभी तक कोरोना महामारी के कारण हर महीने एक दिन की सैलरी कटती थी. हालांकि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ IAS, IPS, IFS संवर्गों के लिए वेतन कटौती जारी रखी है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई. इस दौरान 18 प्रस्ताव रखे गए. इनमें से 17 प्रस्तावों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. कैबिनेट में हुए फैसलों के बारे में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने विस्तार से जानकारी दी.

यह भी पढ़ें- मुलायम सिंह यादव को हुआ कोरोना, पत्नी की रिपोर्ट भी पॉजिटिव, मेदांता में भर्ती

उन्होंने बताया कि एक प्रस्ताव पर कमेटी बनाई गई है. वहीं, हिमालय गढ़वाल विश्वविद्यालय 2016 संशोधन प्रस्ताव पर मुहर लगी. विविव का नाम बदल कर अटल बिहारी वाजपेयी हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय किया गया है.

इन फैसलों को मिली मंजूरी

  1. आबकारी विभाग में अब शराब बिक्री के लिए ट्रेक एंड ट्रेस प्रणाली की शुरुआत की जाएगी.
  2. द्योग विभाग की सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी.
  3. उत्तराखंड पुलिस आर मोहरीर संशोधन नियमावली संशोधन 2020 को मंजूरी.
  4. उत्तराखंड नागरिक सुरक्षा चयन नियमावली में संशोधन.
  5. राजकीय सहायता प्राप्त माहविद्यालयों को अनुदान दिए जाने को लेकर कैबिनेट में चर्चा की गई. इसे लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है.
  6. उत्तराखंड नागरिक सुरक्षा अधीनस्थ चयन आयोग नियमावली में संशोधन को मंजूरी.
  7. राजकीय महाविद्यालय में छात्र निधि का समुचित उपयोग और प्रबंधन के लिए बनाई गई नियमावली.
  8. पुरुल नीति के तहत पिरुल इकट्ठा करने पर पहले एक रुपये प्रति किलो का दाम तय है, जिसे बढ़ाकर 2 रुपये किया गया है.
  9. वर्ग चार भूमि और वर्ग तीन भूमि को लेकर साल 2016 में कमेटी बनी थी, जिसके बाद फिर कुछ कमेटी बनाई गई थी, लिहाजा अब उसका निर्णय लिया गया है. निर्णय के मुताबिक वर्ग तीन की भूमि को 132 की धारा के तहत न तो रेगुलाइज किया जा सकेगा न ही इस पर मालिकाना हक दिया जाएगा. 1983 और उससे पहले के कब्जेदारों को 2004 के तहत पड़ने वाले सर्किल रेट का मात्र 5 फीसदी देना होगा.

यह भी पढ़ें- कोरोना वैक्सीन: सुरक्षा कारणों के चलते 24 घंटे में दूसरी दवा के ट्रायल पर लगी रोक

उत्तराखंड (Uttarakhand) वन विभाग घाटा पूरा करने और जंगल बढ़ाने (Afforestation) के बचे हुए काम को पूरा करने के दो सालों से उत्तर प्रदेश (UP) के बुंदेलखंड और राजस्थान (Rajasthan) के कुछ हिस्सों में भी पौधे लगा रहा है.

जंगल (Jungle) की जमीन को गैर-जंगल गतिविधियों, जैसे बाधों का विकास ( Development of Dams) , खनन और उद्योगों और सड़कों के निर्माण के लिए इस्तेमाल जमीन के पास जंगल बढ़ाया जा रहा है. प्रतिपूरक वृक्षारोपण ( Compensatory Afforestation) के तहत एक हेक्टेयर में 1,100 पौधे लगाए गए हैं. उत्तराखंड क्षतिपूरक वनरोपण फंड मैनेजमेंट और प्लानिंग अथॉरिटी (CAMPA) की संचालन समिति की हालिया बैठक में दिखाई गई रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने कुल 33,944 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 24,908 हेक्टेयर जमीन पर जंगल लगाने का काम किया, जो पिछले बचे हुए 9,035 हेक्टेयर में बदल गया.

ये भी पढ़ें- उत्तराखंड के पांच हजार से ज्यादा जल स्रोतों की होगी मरम्मत, मनरेगा के तहत पूरा होगा प्रोजेक्ट

स्थानीय अधिकारियों पर पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी

जंगल बढ़ाने के अभियान के बाद, स्थानीय अधिकारी 10 साल तक पौधों की देखभाल करते हैं, जब तक कि पौधे लंबे समय तक चलने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो जाते. अब तक उत्तराखंड पूरे राज्य में क्षतिपूर्ति वनरोपण कर रहा है. हालांकि अगर दूसरे राज्यों में जंगल बढ़ाए जाने की योजना है तो, पौधों की वृद्धि स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय पर निर्भर करेगी, यह उत्तराखंड के लिए एक नई चुनौती होगी.

पिछले बचे हुए (Backlog) काम को पूरा करने के लिए राज्य (State) ने CAMPA के तहत इस फइनेंशियल इयर (Financial Year) में 3,500 हेक्टेयर जमीन पर जंगल बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, हालांकि,5,535 हेक्टेयर के लिए उत्तराखंड के पास उचित जमीन की कमी है.

जिला अधिकारियों को देनी होगी जमीन की जानकारी

उत्तराखंड CAMPA संचालन समिति ने दूसरे राज्यों में वृक्षारोपण अभियान के प्रस्ताव पर चर्चा की. हालांकि इस प्रस्ताव को एक्जीक्यूट किए जाने से पहले उत्तराखंड सरकार को जिला अधिकारियों द्वारा राज्य के भीतर जमीन होने या नहीं होने के बारे में एक रिपोर्ट देने की जरूरत होगी.

उत्तारखंड जिला अधिकारियों को क्षतिपूर्ति जंगल लगाने के लिए भूमि बैंक बनाने के लिए कहा गया है. अगर जरूरी हुआ तो दूसरे राज्यों में भी जंगल बढ़ाने के लिए संभावनाएं देखी जाएंगी, उत्तर प्रदेश के ललितपुर और बांदा इलाकों और राजस्थान के इलाकों में भी क्षतिपूर्ति जंगल बढ़ाने के लिए संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं. उत्तराखंड CAMPA के सीईओ जे एस सुहाग ने कहा कि उत्तराखंड के यूपी से अलग होने से पहले, ललितपुर, हरदोई और उन्नाव जिलों में टिहरी बांध के लिए वन भूमि के डायवर्जन के खिलाफ क्षतिपूर्ण जंगल बढ़ाया गया था.

ये भी पढ़ें- केदारनाथ मंदिर के पास बन रही वाटिका, जानें सालों में एक बार खिलने वाले दिव्‍य फूल की खासियत

बतादें कि साल 2019 में लंबे इंतजार के बाद बिना नुकसान के जंगल बढ़ाने और निधि योजना के तहत केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के लिए 2675 करोड़ रुपए की धनराशि जारी की थी.

कोरोना काल के लॉकडाउन का असर हिमालय के फूलों का राजा कहलानेवाले ब्रह्म कमल (Brahma Kamal) पर भी पड़ता दिख रहा है. साल में सिर्फ एक रात को खिलनेवाला यह फूल अब अक्टूबर महीने में खिलता देखा गया है. यह हैरान करनेवाली बात इसलिए है क्योंकि ब्रह्म कमल के खिलने का सही वक्त जुलाई से अगस्त का होता है.

अब जो फोटोज और वीडियो सामने आए हैं वह उत्तराखंड के चमोली का है. जहां कई सारे ब्रह्म कमलों (Brahma Kamal Photos) को एकसाथ इस महीने में खिलता देखा गया है. एक्सपर्ट भी यह चीज देखकर हैरान हैं. माना जा रहा है कि कम टूरिस्ट के पहुंचने और प्रदूषण के कम होने के चलते ऐसा हुआ होगा.

दो घंटे में पूरा खिलता है ब्रह्म कमल

ब्रह्म कमल इसलिए ही खास है क्योंकि यह साल की एक रात को सिर्फ रात में खिलता है. साथ ही साथ सिर्फ उत्तराखंड के हिमालय के ऊंचे स्थानों पर भी पाया जाता है. बता दें कि ब्रह्म कमल को पूरी तरह से खिलने में दो घंटे लग जाते हैं. इसमें यह 8 इंच तक खिल जाता है. यह सिर्फ कुछ घंटे तक ही खिला रहता है. इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.

पढ़ें – केदारनाथ मंदिर के पास बन रही वाटिका, जानें सालों में एक बार खिलने वाले दिव्‍य फूल की खासियत

एक कमाल की बात यह भी है कि हरबार जहां ब्रह्म कमल 3500-4800 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में मिलता था, वहीं इसबार इन्हें 3000 मीटर की ऊंचाले वाले इलाकों में भी देखा गया है.

पढ़ें – खतरों की खिलाड़ी है ये दादी, 68 साल की उम्र में पार की खड़ी चढ़ाई

बता दें कि तिब्बत में ब्रह्म कमल को दवाओं और आयुर्वेद से जुड़ी चीजें बनाने में काम में लाया जाता है. किसी तरह के घाव को भरने के लिए उत्तराखंड के लोग भी इसका इस्तेमाल करते हैं.

अगर आप भी वर्क फ्रॉम होम से बोर हो गए हैं तो ये खबर आपको खुश करने वाली है. जो लोग घर में काम करते हुए बोर हो चुके हैं उनके लिए उत्तराखंड पर्यटन एक सुनहरा मौका लेकर आयी है. आप यहां अपने काम के साथ -साथ छुट्टियां भी एन्जॉय कर पाएंगे.

उत्तरखंड पर्यटन वर्ककेशन (Workcation) की एक अनूठी पहल को बढ़ावा दे रहा है जो आपको हरे- भरे पेड़ों और पहाड़ों के बीच में काम करने की अनुमति देगा.

इस पैकेज की खास बात यह है कि आपको यहां काम करने का रिवार्ड भी दिया जाएगा. उत्तराखंड पर्यटन (Uttarakhand Tourism) टूरिस्ट इन्सेंटिव कूपन स्कीम लॉन्च कर रहे है. इस स्कीम के तहत तीन दिन तक होटल बुकिंग करने वाले सभी लोगों को 3000 रुपये तक की छूट दी जाएगी.

Ranking Revealed : किस देश का पासपोर्ट है सबसे ताकतवर? भारत की है ये रैंकिंग

चूंकि आप लोगों को रिमोर्ट लोकेशन में काम करने की जरूरत है जहां इंटरनेट कनेक्शन हो. उत्तराखंड पर्यटन आपको सभी सुविधाएं मुहैया कराएगा. जैसे कि आरामदायक रहना, बिजली बैक अप के साथ साफ – सुथरे रिसॉर्ट, होटल और होमस्टेश की पेशकश कर रहा है.

उत्तराखंड के पर्यटन सचिन दिलीप जवालकर ने कहा कि वर्ककेशन एक ट्रेंडिंग कॉन्सेप्ट बन गया है. कोरोना काल के समय में घर से काम करना लोगों की जरूरत बन गई है और छुट्टी के मौके पर आप बिना किसी स्ट्रेस के अपने काम को शानदार तरीके से कर सकते हैं. इसी के तर्ज पर उत्तराखंड पर्यटन अपने विजिटर को लैंसडाउन, जिम कॉर्बेट, कौसानी, मसूरी, नैनीताल, देहरादून और अल्मोड़ा के अलग- अलग होटल, रिसॉर्ट और होम स्टे में रहने की पेशकश कर रहा है.

 सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में क्या ?

विजिटर इस बात का ख्याल रखे कि कोविड-19 के सभी नियमों और प्रोटोकॉल का पालन किया जाए. इसके आलाव जो लोग राज्य में प्रवेश करना चाहते हैं उन्हें स्मार्ट सिटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.

देश में रेप (Rape) के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, आरोपी विदेशी मेहमानों को भी अपना शिकार बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं.  ताजा मामला ऋषिकेश (Rishikesh) का है, यहां एक विदेशी महिला (Foreign Women) के साथ रेप का मामला सामने आया है. पुलिस ने बताया कि 37 साल की एक अमेरिकी महिला (US Women) योगा सीखने के लिए ऋषिकेश में रह रही थी, इसी दौरान एक स्थानीय पुरुष (Local Resident) ने योगा सिखाने के बहाने कथित तौर पर उसके साथ कई बार रेप किया.

मुनि की रेती पुलिस थाना प्रभारी आरके सकलानी (RK Saklani) ने कहा कि पीड़िता (Victim) द्वारा दर्ज किए गए मामले के मुताबिक ऋषिकेश (Rishikesh) का ही रहने वाला अभिनव रॉय 5 अक्टूबर को अपनी बालकनी से जबरन महिला के कमरे में घुस गया, और उसके साथ रेप किया.

ये भी पढ़ें- दिल्‍ली में विदेशी महिला के साथ गैंगरेप, टूरिस्‍ट वीजा पर आई थी इंडिया

योगा सिखाने के बहाने विदेशी महिला से रेप

पुलिस अधिकारी ने कहा कि पीड़ित महिला ने शिकायत में यह भी कहा है कि इससे पहले भी आरोपी ने योगा सिखाने के बहाने उसे कई बार अपने फ्लैट पर बुलाया, और उसके साथ रेप किया. विदेशी महिला ने पुलिस को बताया कि ड्रग और योगा के लिए उनकी एक्साइमेंट की वजह से वह आरोपी के करीब आ गई थी.

पुलिस के मुताबिक विदेशी महिला ने शिकायत में यह भी कहा है कि रेप के आरोपी अभिनव के पिता पीड़िता पर केस वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं.

ये भी पढ़ें- बकाया सैलरी देने के बहाने बुलाया, ड्रग्‍स देकर रेप किया फिर कोठे पर छोड़ आया मालिक

बतादें कि देश में हर दिन रेप के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है, देश में कोई भी राज्य ऐसा नहीं हैं, जहां से रेप की खबरें सामने नहीं आती हों. हालही में हाथरस और बलरामपुर में दलित लड़कियों के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था, गैंगरेप के बाद आरोपियों ने पीड़िता के साथ क्रूरता की, जिसके बाद दोनों लड़कियों की मौत हो गई, वहीं अतिथि देवों भव: की परंपरा वाले भारत में विदेशी मेहमानों के साथ रेप के मामले सामने आना बहुत ही शर्मनाक है.

कोरोना काल के बीच इस बार कुंभ मेले (Kumbh Mela Haridwar) में कितने लोगों को एंट्री मिलेगी इसपर संशय बना हुआ है. इस बीच उत्तराखंड के मंत्री मदन कौशिक ने एक बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि कुंभ मेले के दौरान रोजाना 35 से 50 लाख लोगों के गंगा स्नान का अनुमान है. बता दें कि कुंब मेला 2021 में हरिद्वार में लगना है.

कुंभ मेले में स्नान की तारीखें पहले ही घोषित हो चुकी हैं. 14 जनवरी (Kumbh Mela Haridwar 2021 Dates) से यह शुरू होगा. मीडिया से बात करते हुए मदन कौशिक ने बताया है कि सरकार हर सावधानी बरतेगी.

कितने बड़ा होगा कुंभ, अभी फैसला नहीं

कुंभ मेले को कितने इलाके में लगाया जाएगा इसका अखिरी फैसला अखाड़े जल्द करेंगे यह भी बताया गया. यह तय होना है कि कोरोना काल में भी कुंभ को उतने बड़े पैमाने पर ही किया जाए या फिर इसका दायरा छोटा होगा. इससे पहले उत्तराखंड सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा था कि कोविड-19 की वजह से कुंभ के दौरान साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा.

पढ़ें – करोड़ या कुछ हजार श्रद्धालु, कोरोना के बीच हरिद्वार कुंभ में कितनों को मिलेगी इजाजत?

पिछले कुंभ में आए थे 1 करोड़ 50 लाख से ज्यादा लोग

बता दें कि आखिरी कुंभ 14 अप्रैल 2010 में लगा था. तब शाही स्नान के वक्त 1.5 करोड़ लोग वहां कुंभ में मौजूद थे. लेकिन इसबार ऐसा होना मुश्किल है. उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहले ही इसके संकेत दिए हैं कि जुटनेवाले लोगों की संख्या पर पाबंदी हो सकती है. इसबार पास आदि से मेले में जाने की व्यवस्था हो सकती है, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा सके.

कोरोनावायरस महामारी के अभी जल्दी में खत्म होने के कोई चांस नहीं दिख रहे. इस बीच 11 साल में एक बार लगनेवाले कुंभ मेले (Kumbh Mela 2021) की तैयारियां उत्तराखंड में जारी हैं. हरिद्वार में लगनेवाले कुंभ के लिए फिलहाल 51 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है लेकिन इस बीच इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि कोरोना काल के इस कुंभ में कितने लोगों को इजाजत होगी.

बता दें कि अगले साल यानी 2021 में हरिद्वार में कुंभ मेला (Kumbh Mela 2021) लगना है. 11 साल बाद होनेवाला यह मेला 12 मार्च को शाही स्नान से शुरू होना है. वैसे तो इस मेले में पहुंचनेवाले लोगों की कोई सीमा नहीं होती लेकिन कोरोना काल में ऐसा नहीं हो पाएगा. मेले में कितने लोगों को आने दिया जाएगा फिलहाल प्रशासन इसपर विचार कर रहा है.

पिछले कुंभ में आए थे 1 करोड़ 50 लाख से ज्यादा लोग

बता दें कि आखिरी कुंभ 14 अप्रैल 2010 में लगा था. तब शाही स्नान के वक्त 1.5 करोड़ लोग वहां कुंभ में मौजूद थे. लेकिन इसबार ऐसा होना मुश्किल है. उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहले ही इसके संकेत दिए हैं कि जुटनेवाले लोगों की संख्या पर पाबंदी हो सकती है. इसबार पास आदि से मेले में जाने की व्यवस्था हो सकती है, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा सके.

पढ़ें – रावण पर कोरोना का साया, पुतला कारीगरों को नहीं मिला एक भी ऑर्डर

चार धाम यात्रा पर था पाबंदी का असर

इससे पहले चार धाम यात्रा पर भी पाबंदियों का असर देखा गया था. जहां हर बार इसमें 9 लाख के करीब श्रद्धालु होते हैं, इसबार यह संख्या हजार तक भी नहीं थी. ऐसा ही कुंभ के दौरान भी देखने को मिलेगा.

पढ़ें – इस बार ऑनलाइन होगी काशी की पपेट रामलीला, कोरोना काल में नहीं टूटेगी सदियों पुरानी परंपरा

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कोरोना लॉकडाउन में यहां भी काम रुका था लेकिन पहले अनलॉक के बाद फिर शुरू हो गया. वहां करीब 51 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इनके लिए 320 करोड़ रुपये अलॉट हुए हैं और 15 दिसंबर तक की डेडलाइन दी गई है. फिलहाल 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) मंगलवार यानी आज 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उत्तराखंड (Uttarakhand) में नमामि गंगे (Namami Gange) के तहत 6 बजे प्रोजेक्ट का शिलान्यास करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरिद्वारा के जगजीतपुर, सराई में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा जगजीतपुर में सीवेज प्रोजेक्ट का शिलान्यास करेंगे.

प्रधानमंत्री ऋषिकेश के लकड़घाट पर 26 MLT एसटीपी का उद्घाटन करेंगे. हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र से करीब 80 प्रतिशत अपशिष्ट जल गंगा में जाता है. ऐसे में इन प्रोजेक्ट्स की गंगा को साफ रखने में अहम भूमिका होगी.

30 योजनाएं पूरी

मुनि की रेती शहर में, चंद्रेश्वर नगर में 7.5 MLD एसटीपी देश में पहला 4 मंजिला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होगा. इसकी ऊंचाई 21 मीटर है. इसकी लागत 12 करोड़ रुपये है.

यह भी पढ़ें- दिल्ली हवाई अड्डे पर युवक के बैग में मिला जिंदा कारतूस, पुलिस ने किया गिरफ्तार

प्रधानमंत्री चोरपानी में 5 MLD एसटीपी और 1 MLD की क्षमता वाले दो एसटीपी और बद्रीनाथ में 0.01 एमएलडी का उद्घाटन करेंगे.

यह भी पढ़ें- IGI एयरपोर्ट टर्मिनल-2: एक अक्टूबर से फिर शुरू होगा घरेलू उड़ानों का परिचालन

उत्तराखंड में गंगा नदी के पास 17 शहरों से प्रदूषण को कम करने के लिए 30 परियोजनाएं अब पूरी हो गई हैं, जो ऐतिहासिक उपलब्धि है.

गंगा अवलोचन का भी करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री मोदी गंगा नदी में किए गए संस्कृतिक, जैव विविधता और कायाकल्प गतिविधियों को प्रदर्शित करने के लिए गंगा के पहले संग्रहालय ‘गंगा अवलोचन’ का भी उद्घाटन करेंगे. यह संग्रहालय चंडीघाच, हरिद्वारा में स्थि है.

उत्तराखंड (Uttarakhand) के आईएएस अधिकारी (IAS Officer) और महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक वी षणमुगम दो दिन से लापता हैं. अधिकारी के गायब होने का मामला उस वक्त सामने आया जब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने देहरादून (Dehradun) के DIG अरुण मोहन जोशी को पत्र लिखा. उन्होंने पत्र में आईएएस अधिकारी के लापता होने का जिक्र करते हुए उनके अपहरण की आशंका भी जताई है.

रेखा आर्य ने लिखा कि वी षडमुगम उनके विभाग में अपर सचिव और निदेशक के पद पर काम कर रहे हैं, लेकिन दो दिन से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है. उन्हें फोन किया जा रहा है, लेकिन उनका फोन बंद है. 20 सितंबर से उनसे कोई संपर्क नहीं हो रहा है, ऐसे में या तो वो खुद गायब हो गए हैं, या उनका अपहरण कर लिया गया है.

टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

मंत्री रेखा आर्य सचिव पर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया है. उन्होंने लिखा है कि विभाग में मानव संसाधन आपूर्ति के लिए एक टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें धांधली की बात सामने आ रही थी. ऐसे में हो सकता है  संभावना हो कि वो इस मामले से बचने के लिए खुद ही गायब हो गए हों.

आपको बता दें कि इससे पहले रेखा आर्य ने मामले में विभाग के निदेशक वी षणमुगम को तलब करते हुए एक पत्र भी उन्हें लिखा था. उन्होंने महिला एवं बाल विकास में आउसोर्सिंग एजेंसी में गड़बड़ी की शिकायत सामने आने पर निदेशक को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखने को कहा था.

उन्होंने षडमुगम से पत्र में कहा था कि कुछ फर्मों ने गड़बड़ी के संबंध में शिकायत की है, जिसको लेकर दो दिन से आपसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन आपका फोन नहीं उठा. इस संबंध में सचिव को फोन किया गया तो उन्होंने भी फोन नहीं उठाया.

उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने ‘अनलॉक 4’ (Unlock 4) के तहत लोगों की राज्य में आवाजाही के संबंध में गाइडलाइंस जारी की हैं. उत्तराखंड सरकार द्वारा शनिवार को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है, जिला प्रशासन सीमा चौकियों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और सीमावर्ती जिला बस अड्डों पर सभी इनबाउंड व्यक्तियों की थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था करेगा.

अगर किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण पाए जाते हैं तो उसका एंटीजन टेस्ट किया जाएगा. वहीं अगर ये टेस्ट पॉजिटिव आता है तो ज़रूरी एसओपी का पालन किया जाएगा. सार्वजनिक जगहों पर हर वक्त, प्रत्येक व्यक्ति को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही मास्क पहनना होगा. दिशानिर्देशों के अनुसार यात्रा से पहले स्मार्ट सिटी वेब पोर्टल पर सभी इनबाउंड व्यक्तियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है. सभी इनबाउंड लोगों को अनिवार्य रूप से आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना होगा. पंजीकरण के दौरान मांगे गए ज़रूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे.

हिमाचल को है ये उम्मीद

वहीं हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनलॉक 4 के तहत इंटर स्टेट मूवमेंट पर प्रतिबंध हटाने के फैसले से राज्य के पर्यटन उद्योग के फिर से शुरू होने की उम्मीद जताई है. सरकार के मुताबिक ये छूट छुट्टियां बिताने के लिए पर्यटन पर लोगों को सोचने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

रविवार को भी शिमला के प्रसिद्ध माल रोड की सड़कों पर लोग सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करते हुए और मास्क पहनकर टहल रहे थे. कुछ दिन पहले हिमाचल प्रदेश सरकार ने कोरोनोवायरस महामारी के कारण लगाए गए यात्रा-संबंधी प्रतिबंध हटा दिए थे. राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों को अब पास या पंजीकरण की ज़रूरत नहीं होगी.

प्रतिबंधों की यह ढील क्षेत्र की सुस्त अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए उठाए गए बड़े कदम के तौर पर मानी जा रही है. राज्य पर्यटन पर बहुत निर्भर करता है और यहां पर्यटकों की तादात बहुत ज़्यादा होती है. सर्दियां आते ही लोग यहां बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए आते हैं.

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन (India-China) के बीच जारी तनाव के दौरान उत्तराखंड (Uttrakhand) के सीमांत इलाकों में भी भारतीय सेना पूरी तरह अलर्ट है. उत्तरकाशी में चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी (Chinyalisaur airbase) पर सेना की गतिविधियां बढ़ गई हैं. सीमा की ओर जाने वाले जवान चिन्यालीसौड़ में रूके हुए हैं और पिछले कुछ दिनों से उनकी आवाजाही जारी है.

भारत-चीन के बीच उत्तराखंड में 345 किमी लंबी सीमा है. इसमें से 122 किमी हिस्सा उत्तरकाशी (Uttarkashi) में पड़ता है. इस सीमा पर चौकसी की जिम्मेदारी सेना के ऊपर है.

बता दें कि शनिवार को चुशूल में भारत-चीन के बीच हुई बातचीत भी अनिर्णायक रही, मगर दोनों पक्ष उच्च सैन्य स्तर पर बातचीत के लिए भी सहमत हैं. भारत और चीन की सेना पूर्वी लद्दाख में चार महीने से आमने-सामने हैं. कई स्तरों के संवाद के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली है और गतिरोध जारी है.

भारतीय सैनिकों ने भांपी स्थिति

बता दें कि पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर PLA के सैनिकों ने फिंगर-4 के क्षेत्र पर भी यथास्थिति बदलने और कब्जा करने की मंशा को जारी रखा हुआ है. वहीं भारतीय सैनिकों ने स्थिति को भांपते हुए इलाके के कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर अपनी पहुंच स्थापित कर ली है. एक सूत्र ने कहा, “हमारे सैनिकों ने PLA के कब्जे वाले स्थानों को देखते हुए कुछ ऊंचाई वाली जगहों पर पहुंच स्थापित कर ली है.”

झील के उत्तरी किनारे को आठ ‘फिंगर्स’ में विभाजित किया गया है. भारत फिंगर-8 तक के क्षेत्र को वास्तविक नियंत्रण रेखा मानता है और फिंगर-4 तक के क्षेत्र पर उसकी पकड़ बनी रही है, लेकिन चीनी यहां भी यथास्थिति बदलने के प्रयास में हैं. यही वजह है कि चीनी सेना फिंगर-4 पर शिविर लगा रही है और उसने फिंगर-5 और फिंगर-8 के बीच किलेबंदी की है.

उत्तराखंड सरकार ने फैसला किया है कि इस साल राज्य के पांच हजार से ज्यादा जल स्रोतों के पुनर्जीवित यानी इनमें दोबारा से पानी लाया जाएगा. इसमें खास बात यह है कि सरकार इस पूरे प्रोजेक्ट को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत पूरा करेगी. इसके अलावा स्थानीय स्तर की समितियों की मदद से इन जल स्रोतों की कम से कम दो साल तक निगरानी भी की जाएगी.

मनरेगा के स्टेट कोऑर्डिनेटर मोहम्मद असलम ने कहा, “जैसे ही प्रवासी मजदूर राज्य में लौटने लगे, हमने उन्हें नौकरी देने के लिए रास्ते निकालने की कोशिश की. हमने विभिन्न विभागों के क्षेत्रों को बदल कर उनके लिए काम किया. इसी योजना का पालन करते हुए, यह परियोजना वन, श्रम और पेयजल विभागों की मदद से शुरू की जाएगी. ”

असलम ने कहा कि उत्तराखंड जल संस्थान ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 5,000 धाराओं और रिचार्ज प्वाइंट्स की पहचान की है, जिनका कायाकल्प करने की जरूरत है. इसके लिए एसओपी तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है.

परियोजना में पूरे किए जाएंगे ये काम

असलम ने आगे कहा, “परियोजना के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट पहले ही राज्य सरकार को प्रस्तुत की जा चुकी है और जल्द ही एक आदेश जारी किया जाना है. हर स्ट्रीम या वॉटर रिचार्ज पॉइंट को उसके स्थान के आधार पर एक अलग तरह के मरम्मत की आवश्यकता होगी. हम इसमें फील्ड विशेषज्ञों की मदद भी लेंगे, जो हमें यह समझने में मदद करेंगे कि किस दृष्टिकोण से अच्छे परिणाम मिल सकें. इस परियोजना के हिस्से के रूप में खाइयों, तालाबों, वृक्षारोपण, कायाकल्प करने वाले कैचमेंट एरिया का निर्माण किया जाएगा.”

मनरेगा के तहत प्रवासी मजदूरों के मिलेगा काम 

मालूम हो कि सरकार ने लॉकडाउन में रोजगार छोड़ वापस आए प्रवासी मजूदरों के मनरेगा के तहत नौकरी देने का फैसला किया. इसी योजना के तहत अब इन से लोगों के इन जस्रोतों के पुनर्जीवन का का काम कराया जाएगा. करीब 80 प्रतिशत प्रवासी मजदूर नौकरी छोड़कर उत्तराखंड वापस आ गए हैं.

इस योजना के तहत अप्रैल से अब तक 10,300 लोगों को नए जॉब कार्ड प्रदान किए गए हैं. उनमें से 80,000 से अधिक लोगों को रोजगार की पेशकश की गई है. राज्य मनरेगा कोऑर्डिनेटर मोहम्मद असलम ने कहा कि जैसे ही लोग राज्य छोड़कर वापस आने लगे, उन्होंने प्रयास किया कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके.

उन्होंने बताया कि टिहरी गढ़वाल जिले (12750) में सबसे अधिक नौकरियां दी गई. इसके बाद उधम सिंह नगर में 11,739 नौकरियां दी गई. नैनिताल जिले में 2,048 नौकरिया दी गई हैं, यहां सबसे कम लोगों को रोजगार मिला.

इस साल मनरेगा स्कीम में 2 लाख लोग बढ़े 

उन्होंने कहा, ”इस साल हमें 700 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, जिसमें से करीब 340 करोड़ रुपये मजदूरी पर खर्च किए गए हैं. मनरेगा के तहत गतिविधियों से जुड़े लोगों की संख्या पिछले साल की तुलना में इस साल अप्रैल से सितंबर तक लगभग 2 लाख बढ़ी है.” राज्य में 7,36,000 से अधिक मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं.

ये भी पढ़ें: कोरोना काल में उत्तराखंड लौटे 80 प्रतिशत प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत मिला रोजगार

उत्तराखंड सरकार ने गुरुवार को बताया कि राज्य में एक डॉक्टर, जो पहले जुलाई में कोरोना पॉजिटिव था, लेकिन एंटीजन टेस्ट में वो एक बार फिर संक्रमित पाया गया है. करीब एक महीने पहले ही देहरादून के रहने वाले इस डॉक्टर की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई थी, जिसके बाद एंटीजन टेस्ट में उसकी दूसरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.

हालांकि, मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, संदिग्ध कोरोना रिइंफेक्शन के मामलों में एक जीनोमिक टेस्ट से यह पता लगाने की आवश्यकता होती है कि क्या मरीज वास्तव में कोरोना से दोबारा संक्रमित हुआ है या नहीं, लेकिन इस मामले ऐसा नहीं किया गया है.

इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोजेक्ट के राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ. पंकज सिंह ने कहा, “यह शायद पहली बार है कि उत्तराखंड में कोविद-19 से दोबारा संक्रमित होने का मामला सामने आया है. पॉजिटिव पाया गया व्यक्ति लगातार लोगों के संपर्क था, हो सकता है कि वह उस वजह से फिर से संक्रमित हो गया हो.”

कोरोना सैंपल की देखभाल करता है संक्रमित

यह मरीज देहरादून जिले में स्वास्थ्य विभाग के Covid-19 सैंपल्स के संग्रह की देखभाल करता है. पहली बार यह 23 जुलाई को पॉजिटिव पाया गया था, जिसके बाद इसका दूसरा टेस्ट (एंटीजन टेस्ट) सोमवार को फिर से पॉजिटिव आया था.

“आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए भी सैंपल लिया”

नाम ने उजागर करने की शर्त पर डॉक्टर ने बताया “पहली बार 23 जुलाई को मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद मैं ठीक हो गया था. 10 अगस्त के आसपास, मेरा आरटी-पीसीआर टेस्ट भी नेगेटिव आया था. सप्ताहांत के आसपास, मुझे हल्का बुखार और खांसी थी और क्योंकि मैं कोविद-19 के लिए सैंपल लेने की प्रक्रिया में शामिल हूं, मैंने सोचा कि मुझे खुद का परीक्षण करवाना चाहिए. सोमवार को, मेरा एंटीजन टेस्ट में फिर से पॉजिटिव आया और मैंने खुद को घर पर आइसोलेट कर लिया.”

हालांकि, दूसरी बार पॉजिटिव पाए जाने वाले इस डॉक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए भी उसका सैंपल लिया है, जिसके जरिए वे वायरल स्ट्रेन का भी पता लगाने की कोशिश करेंगे.

ये भी पढ़ें: कोरोना काल में उत्तराखंड लौटे 80 प्रतिशत प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत मिला रोजगार

उत्तराखंड सरकार (Uttrakhand Government) संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए ‘संस्कृत ग्राम’ (Sanskrit Gram) का निर्माण करने जा रही है. अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती दौर में प्रयोग के तौर पर संस्कृत ग्राम का निर्माण चमोली जिले के किमोथा गांव और बागेश्वर जिले के भंटोला में किया गया था.

बोलचाल की भाषा के लिए संस्कृत के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने राज्य भर में ‘संस्कृत ग्राम’ विकसित करने का निर्णय लिया है. इन गांवों में लोग बातचीत के लिए संस्कृत भाषा का इस्तेमाल करेंगे.

एक आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने हरिद्वार स्थित संस्कृत अकादमी को राज्य के जिलों और फिर ब्लॉक स्तर पर संस्कृत ग्राम विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी है. त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंगलवार को संस्कृत अकादमी में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया.

बैठक में तय हुआ कि संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है. देश की प्राचीन संस्कृति को संरक्षण देने के लिए युवा पीढ़ी को इसके प्रति लुभाने की आवश्यकता है. बैठक में अकादमी का नाम बदलकर उत्तराखंड संस्कृत संस्थान करने का भी निर्णय लिया गया.

अधिकारियों ने कहा कि प्रयोग के तौर पर ये परियोजना पहले चमोली जिले के किमोथा और बागेश्वर के भांटोला में चलाई गई थी. अब इस गांवों के निवासी संस्कृत भाषा को न सिर्फ दैनिक बातचीत के लिए इस्तेमाल करते हैं बल्कि लोकगीत भी इसी भाषा में गाते हैं. उन्होंने कहा कि परियोजना के शुरुआती चरण की सफलता के बाद सरकार ने इसे बड़े पैमाने पर लागू करने का फैसला लिया है.

बता दें कि इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने फैसला लिया था कि अब स्टेशनों के नाम उर्दू के बजाए संस्कृत में होंगे. अभी तक स्टेशनों के नाम हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू में होते थे जो अब उत्तराखंड में संस्कृत में लिखे जाएंगे. उत्तराखंड ने 2010 में संस्कृत को दूसरी राजकीय भाषा के रूप में स्वीकार किया था.

रेलवे स्टेशनों के नाम संस्कृत से हिंदी में किस तरह अलग होंगे, इसके जवाब में एक संस्कृत अध्यापक ने बताया है कि दोनों भाषाओं में देवनागरी लिपि का इस्तेमाल होता है इसलिए बहुत ज्यादा अंतर आने की उम्मीद नहीं है. देहरादून को देहरादूनम्, हरिद्वार को हरिद्वारम् और रुड़की को रुड़की: लिखा जाएगा. यानी बिंदियों की वजह से बस नाम अलग लगेंगे.

चारधाम सड़क परियोजना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के दिशानिर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया. सरकार की‌ ओर से एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि इसमें चीन से जुड़ा सीमा क्षेत्र भी है. ऐसे में सेना के वाहन भी जाएंगे तो सड़क की चौड़ाई 5 मीटर की जगह 7 मीटर रखने की मंजूरी दी जाए. सुप्रीम कोर्ट (SC) ने कहा कि 2018 के सर्कुलर के मुताबिक चलें.  2018 के सर्कुलर में रोड की चौड़ाई 5.5 मीटर अधिकतम रखी गई थी.‌

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चार धाम निर्माण के कारण वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई के लिए पौधारोपण करने का भी निर्देश दिया गया है. सरकार ने कहा कि पौधारोपण का काम लगातार चल रहा है. लेकिन अदालत 2018 के सर्कुलर में छोटा सा बदलाव करने की मंजूरी देने से पीठ ने इनकार कर दिया.

 हर मौसम में यात्री कर सकेंगे चार धाम की यात्रा

बता दें कि चार धाम (Char Dham) परियोजना (Project) का मकसद सभी मौसम में पहाड़ी राज्य के चार पवित्र स्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ (Kedarnath) और बद्रीनाथ (Badrinath) को जोड़ना है. इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद हर मौसम में चार धाम की यात्रा की जा सकेगी.

इस परियोजना के तहत 900 किलोमीटर लम्बी सड़क परियोजना का निर्माण हो रहा है. अभी तक 400 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जा चुका है. एक अनुमान के मुताबिक अभी तक 25 हजार पेड़ों की कटाई हो चुकी है जिससे पर्यावरणविद् नाराज हैं.

देहरादून पुलिस ने रविवार को बीजेपी विधायक महेश सिंह नेगी (Mahesh Singh Negi) के खिलाफ रेप (Rape) मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है. महिला ने आरोपी विधायक के खिलाफ 16 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. इस मामले में विधायक की पत्नी रीता नेगी का नाम भी शामिल है. पुलिस ने यह जानकारी दी है.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के एफआईआर दर्ज कराने के आदेश के बाद रविवार को पुलिस ने आईपीसी की धारा 307 (रेप) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामल दर्ज कर लिया है. दरअसल शनिवार को एसीजेएम कोर्ट ने विधायक महेश नेगी और उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का फैसला सुनाया था.

महिला ने विधायक पर बलत्कार करने का आरोप लगाया

महिला ने अपनी शिकायत में द्वारहाट के MLA महेश नेगी पर बलात्कार का आरोप लगाया और साथ ही दावा किया है कि विधायक से उसकी एक बच्ची भी है, जिसे साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट की मांग की है. महिला की वकील एसपी सिंह, जिन्होंने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट में याचिका दायर की थी. उन्होंने कहा कि “कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया है.”

विधायक की पत्नी ने महिला पर ब्लैकमेलिंग का लगाया आरोप

इससे पहले विधायक की पत्नी ने महिला के खिलाफ ब्लैकमेल करने की शिकायत दर्ज कराई थी. विधायक की पत्नी ने पुलिस को बताया कि महिला ने मेरे पति से 5 करोड़ रुपये की मांग की है और नहीं देने पर झूठे केस में फसाने की धमकी दी थी. नेगी की पत्नी की शिकायत के आधार पर महिला, उसके पति, और भाभी पर आईपीसी की धारा 306 और 389 के तहत केस दर्ज है.

कोविड-19 (Covid-19) महामारी के दौरान मार्च महीने में लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से 80 प्रतिशत प्रवासी मजदूर नौकर छोड़कर उत्तराखंड वापस आ गए थे. इन सभी लोगों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण गांरटी योजना (मनरेगा) के तहत नौकरी दी गई है. मनरेगा (MNREGA) के अधिकारी ने इसकी जानकारी दी.

इस योजना के तहत अप्रैल से अब तक 10,300 लोगों को नए जॉब कार्ड प्रदान किए गए हैं. उनमें से 80,000 से अधिक लोगों को रोजगार की पेशकश की गई है. राज्य मनरेगा कोऑर्डिनेटर मोहम्मद असलम ने कहा कि जैसे ही लोग राज्य छोड़कर वापस आने लगे, उन्होंने प्रयास किया कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके. टिहरी गढ़वाल जिले (12750) में सबसे अधिक नौकरियां दी गई. इसके बाद उधम सिंह नगर में 11,739 नौकरियां दी गई. नैनिताल जिले में 2,048 नौकरिया दी गई हैं, यहां सबसे कम लोगों को रोजगार मिला.

इस साल मनरेगा स्कीम में 2 लाख लोग बढ़े 

उन्होंने कहा, ”इस साल हमें 700 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, जिसमें से करीब 340 करोड़ रुपये मजदूरी पर खर्च किए गए हैं. मनरेगा के तहत गतिविधियों से जुड़े लोगों की संख्या पिछले साल की तुलना में इस साल अप्रैल से सितंबर तक लगभग 2 लाख बढ़ी है.” राज्य में 7,36,000 से अधिक मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं.

उत्तराखंड के ऋषिकेश (Rishikesh) में गंगा नदी पर बने लक्ष्मण झूले (Laxman Jhula) पर, अश्लील वीडियो शूट करने के मामले में पुलिस ने एक फ्रांसीसी युवती को गिरफ्तार किया है. महिला ने वह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए थे. पुलिस पूछताछ के दौरान विदेशी युवती ने अश्लील वीडियो शूट करने की बात को स्वीकार कर लिया है. हालांकि, महिला ने दावा किया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि भारत में यह अवैध है.

शुक्रवार को एक 27 वर्षीय फ्रांसीसी युवती लक्ष्मण झूला और होटल के कमरे में शूट किए एक अश्लील वीडियो के मामले में गिरफ्तार की गई है. विदेशी महिला पर न्यूड वीडियो शूट करने का भी आरोप लगा है. पुलिस ने स्थानीय निवासी गजेंद्र सजवान की शिकायत के बाद केस दर्ज किया था. जिसमें उन्होंने बताया कि कुछ विदेशी नागरिक लक्ष्मण झूले पर अश्लील वीडियो बनाकर उसे विज्ञापन के तौर पर सोशल मीडिया में प्रचारित कर रहे हैं. उनका आरोप है कि इससे देश की छवि को नुकसान पहुंच रहा है.

महिला के खिलाफ धारा 67 और 294 के तहत केस दर्ज

दूसरी ओर फ्रांसीसी युवती का कहना है कि उसने अपने बिज़नेस के लिए प्रमोशनल फोटोशूट किया था. उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि भारत में यह अवैध है. फ्रांसीसी युवती और वीडियो में दिखाई देने वाली दूसरी महिला के खिलाफ धारा 67 और 294 के तहत केस दर्ज किया गया है. फ्रांसीसी महिला को गिरफ़्तारी के कुछ घंटों बाद ही जमानत मिल गई. वहीं वीडियो में दिखाई देने वाली दूसरी महिला का पता अभी पुलिस नहीं लगा पाई है. ऋषिकेश के कुछ स्थानीय निवासियों के नाम भी FIR में दर्ज हैं.

बताया जा रहा है कि विदेशी महिला ऋषिकेश में मार्च से रह रही थी. उसने स्थानीय फोटोग्राफर्स की मदद से होटल के कमरे में कुछ न्यूड फोटोग्राफ भी शूट किए. महिला ने वह  न्यूड फोटोग्राफ और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए थे.  इस संबंध में फ्रांसीसी दूतावास को भी सूचित कर दिया गया है.

उत्तराखंड के भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत कोरोना (Corona) संक्रमित पाए गए हैं. उन्होंने शुक्रवार को कोरोना की जांच करवाई थी जिसके बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. शनिवार को बंशीधर भगत ने यह जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट पर दी. बंशीधर भगत ने ट्वीट किया, “मेरा कल कोरोना टेस्ट किया गया था जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. जो भी पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता पिछले सप्ताह मेरे संपर्क में आए हैं, मैं उन सभी से अपील करता हूं कि वे अपना कोरोना टेस्ट करवा लें. आप सभी के आशीर्वाद से आपके बीच जल्द ही लौटूंगा.”

भगत के बेटे विकास भगत भी COVID-19 की चपेट में आ गए हैं. सूत्रों के अनुसार, विकास भगत को तीन दिन से बुखार था. शुक्रवार को उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल में प्राइवेट रूम में भर्ती किया गया. जहां उनका सैंपल जांच के लिए  भेजा गया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई. भाजपा के उपाध्यक्ष देवेंन्द्र भसीन ने बताया कि जल्दी ही पार्टी ऑफिस को सैनीटाइज किया जाएगा.

भगत की गृह प्रवेश की पार्टी में शामिल लोगों की बढ़ी चिंता

बंशीधर भगत और उनके बेटे की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन सभी लोगों में चिंता है जो उनके गृह प्रवेश की पार्टी में शामिल हुए थे. भगत ने 21 अगस्त को यमुना कालोनी के अपने सरकारी आवास में गृह प्रवेश पर भोज का आयोजन किया था. हालांकि कहा जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया था. सभी अतिथि आयोजन में मास्क लगाकर पहुंचे थे.

कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सरकार के कुछ मंत्री और पत्रकार भी मौजूद थे. भाजपा के उपाध्यक्ष देवेंन्द्र भसीन भी वहां उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि पार्टी में मौजूद सभी अतिथियों और पत्रकारों का रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया जाएगा.

 

उत्तराखंड के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्यक्ष बंशीधर भगत (Banshidhar Bhagat) ने विधायकों से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की लोकप्रियता के सहारे पार्टी 2022 में राज्य के विधानसभा चुनाव (Uttrakhand Assembly Election) को नहीं जीत सकती है, इसलिए उन्हें वोट चाहिए, तो उन्हें मेहनत करनी होगी.

बंशीधर भगत ने कहा कि अगले विधानसभा चुनावों में लोग मोदी के नाम पर वोट देंगे. उन्होंने पहले ही उसके नाम पर पर्याप्त मतदान कर दिया है. आपका प्रदर्शन अकेले आपको वोट दिला सकता है. बंशीधर ने यह भी कहा कि जो ये उम्मीद कर रहे हैं कि मोदी के नाम के सहारे उनकी नैया पार हो जाएगी, तो वो गलत हैं.

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव जीतना बीजेपी का प्रमुख उद्देश्य

यह बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मीडिया के उस सवाल के जवाब पर कही, जिसमें उनसे पूछा गया था कि 2022 के विधानसभा चुनाव में क्या विधायक मोदी के नाम पर वोट पाने के लिए निर्भर हैं.

भगत ने कहा कि 2022 का उत्तराखंड विधानसभा चुनाव जीतना बीजेपी का प्रमुख उद्देश्य है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों के अलग-अलग हिस्सों में जाना होगा और कड़ी मेहनत करनी होगी. टिकट बंटवारे को लेकर उन्होंने कहा कि यह विधायकों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा.

कांग्रेस का बीजेपी पर हमला

वहीं, बंशीधर भगत के इस बयान के बाद सियासी दलों में उथल-पुथल मच गई है. इस मसले पर कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी ने माना है कि उत्तराखंड में मोदी लहर समाप्त हो गई है और बंशीधर भगत को सही बयान जारी करने के लिए बधाई.

उत्तराखंड के कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि हम भगत को एक सही बयान जारी करने के लिए बधाई देते हैं, जो कि वो शायद ही कभी देते हैं. उन्होंने स्वीकार किया है कि मोदी लहर समाप्त हो गई है, इसलिए वह अपने विधायकों और नेताओं को वोट के लिए प्रदर्शन करने की सलाह दे रहे हैं.

हमेशा विवादों में रहने वाले उत्तराखंड के विधायक प्रणव सिंह चैंपियन (Pranav Singh Champian) की बीजेपी में वापसी पर घमासान मच गया हैं. राज्य में मचे सियासी तूफान के कारण दिल्ली तर हलचल मच गई है. पार्टी की राज्य इकाई के कुछ नेता इस मसले पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलकर शिकायत करने की तैयारी में हैं. पार्टी नेताओं का मानना है कि प्रणव सिंह चैंपियन एक नहीं कई बार अपनी हरकतों से पार्टी की किरकिरी करा चुके हैं. सरेआम कई बार गोलियां चलाने के लिए कुख्यात हो चुके विधायक की वापसी से बीजेपी की छवि पर खराब असर पड़ेगा.

विधायक के डांस का वीडियो वायरल होने पर पार्टी ने 6 साल के निकाला था

2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. पिछले साल तमंचे पर डिस्को करता वीडियो वायरल (Video Viral) होने पर चैंपियन को बीजेपी ने छह साल के लिए निकाल दिया था. दरअसल, उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की खानपुर सीट से विधायक प्रणव सिंह चैंपियन का विवादों से पुराना नाता रहा है. पिछले साल जुलाई में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें वह शराब पीने के साथ तमंचे और कई बंदूकों के साथ डांस कर रहे थे. वीडियो वायरल होने पर काफी किरकिरी हुई तो पार्टी ने छह साल के लिए चैंपियन को निकाल दिया.

इससे एक महीने पहले जून में विधायक प्रणव सिंह चैंपियन दिल्ली में एक पत्रकार को जान से मारने की धमकी देने के कारण विवादों में घिरे थे, तब भी पार्टी ने उन्हें तीन महीने के लिए निलंबित किया था. दो महीने के अंदर दो संगीन गतिविधियों में घिरने के बाद पार्टी ने छह साल के लिए उन्हें निकाल दिया.

 चैंपियन की वापसी से बीजेपी के कई नेता नाराज

IANS की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच प्रणव सिंह चैंपियन पार्टी में वापसी को लेकर लगातार प्रयासरत रहे. उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का भी चक्कर काटा. बीते 23 अगस्त को देहरादून के बीजापुर सेफ हाउस में हुई पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में प्रणव सिंह चैंपियन की वापसी की अर्जी पर चर्चा हुई.

सूत्रों का कहना है कि कोर कमेटी के कई नेताओं ने इस पर सख्त एतराज जताया. कहा कि अगर प्रणव सिंह चैंपियन को वापस लिया गया तो वह चुनाव के पहले फिर पार्टी को किसी संकट में डाल सकते हैं. हालांकि, कुछ नेताओं के वीटो पॉवर के चलते उनकी वापसी को हरी झंडी मिल गई.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से कर सकते हैं शिकायत

पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष और कोर कमेटी के इस फैसले के खिलाफ पार्टी के अंदरखाने में नाराजगी है. पार्टी के कुछ नेता जल्द उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा (J.P Nadda) से इस मसले की शिकायत करने की तैयारी में हैं.

उत्तराखंड के एक पार्टी नेता ने कहा, “प्रणव सिंह चैंपियन का भाजपा की विचारधारा से दूर-दूर का नाता नहीं है. वह 2016 में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत कर बीजेपी में आए थे. पहले भी विवादों में रहे और बीजेपी में आने के बाद लगातार अपनी हरकतों से पार्टी को संकट में डालते रहे. 2022 में चुनाव होना है, ऐसे में उनकी वापसी कर राज्य इकाई ने खतरा मोल लिया है. राष्ट्रीय नेतृत्व से इसकी शिकायत होगी.

 कई विवादों में घिरे हुए हैं प्रणव सिंह चैंपियन

2013 में राज्य के कैबिनेट मंत्री के घर पर आयोजित डिनर पार्टी में फायरिंग कर प्रणव सिंह चैंपियन सुर्खियों में आए थे. 2006 में उन पर एक रोडवेज बस के ड्राइवर पर फायरिंग का आरोप लगा था. 2010 में कर्नाटक के मंगलौर में फायरिंग करता वीडियो वायरल हुआ था. 2015 में हरिद्वार के पथरी में खनन को लेकर हुए विवाद में उन पर गांव वालों पर गोलियां चलाने का आरोप लग चुका है.

 

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) जिले में सोमवार को ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर पत्थर गिरने से दो लोगों की मौत हो गयी. वहीं एक व्यक्ति के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है. रविवार को ITBP कैंप के निकट लैंड-स्लाइड (Landslide) होने की वजह से चमोली जिले के निकट बद्रीनाथ हाईवे पहले ही बंद था. फ़िलहाल हाईवे पर से मलबा हटाने का काम जारी है.

अबतक मिली जानकारी के अनुसार कौंडिल्य एरिया के पास एक शख्स के मलबे में दबे होने की आशंका है. फ़िलहाल इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पायी है. गौचर इलाके के निकट हाईवे पर से मलबा हटाने का काम जारी है.

न्यूज़ एजेंसी ANI के अकाउंट पर Tweet किए गए वीडियो में चट्टान से बड़े-बड़े पत्थर के टुकड़े गिरते देख कर लोग इधर उधर भागते दिखाई दे रहे हैं.

भारी बारिश की वजह से चट्टानों के गिरने से कई जगह पर सड़कें बंद

भारी बारिश की वजह से देहरादून- बद्रीनाथ-केदारनाथ-यमुनोत्री के बीच चट्टानों के गिरने से कई जगह पर सड़कें बंद हैं. चमोली के तोताघाटी में ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे बंद है, तो वहीं केदारनाथ-जलेश्वर महादेव और यमुनोत्री की ओर जाने वाले रास्ते भी बंद हैं. अधिकारियों के मुताबिक राज्य के चार नेशनल हाईवे पर 100 से अधिक सड़कें बंद है, बद्रीनाथ हाईवे स्ट्रेच भी पिछले 20 दिनों से बंद है.

पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट की 200 से अधिक मशीनें सड़कों पर से मलबा हटाने के काम में लगायी गयी हैं. IMD ने 25 से 28 अगस्त के बीच राज्य में भारी बारिश की आशंका जताई है.