कोई मुस्लिम बना उत्‍तराखंड सीएम तो हिंदू मंत्री बनेगा चारधाम मैनेजमेंट बोर्ड का चेयरपर्सन

चारधाम श्राइन बोर्ड यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ के अलावा राज्‍य के 51 अन्‍य मंदिरों की व्‍यवस्‍था देखेगा.
Chardham Shrine Management Board, कोई मुस्लिम बना उत्‍तराखंड सीएम तो हिंदू मंत्री बनेगा चारधाम मैनेजमेंट बोर्ड का चेयरपर्सन

उत्‍तराखंड में स्थित चार धाम का मैनेजमेंट संभालने को कानून बनाया जाएगा. राज्‍य सरकार ने चारधाम श्राइन बोर्ड (Chardham Shrine Management Board) बनाने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है. अगर कोई मुस्लिम उत्‍तराखंड का मुख्‍यमंत्री बनता है तो हिंदू कैबिनेट मंत्री को श्राइन बोर्ड की कमान सौंपी जाएगी. शहरी विकास मंत्री और राज्‍य सरकार के प्रवक्‍ता मदन कौशिक के मुताबिक, प्रस्‍तावित कानून में ऐसी व्‍यवस्‍था है.

चारधाम श्राइन बोर्ड (Chardham Shrine Management Board) यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ के अलावा राज्‍य के 51 अन्‍य मंदिरों की व्‍यवस्‍था देखेगा. ऐसा ही सिस्‍टम जम्‍मू के वैष्‍णो देवी मंदिर और आंध्र प्रदेश में तिरुपति बालाजी मंदिर के लिए है.

अभी तक राज्‍य के मंदिरों को कमेटियां मैनेज करती हैं जिनमें सरकार के प्रतिनिधि होते हैं. एक बार बोर्ड बनने के बाद, सीएम उसके चेयरपर्सन होंगे. इसके अलावा बोर्ड में तीन सांसद, छह विधायक, कई सचिव और चार धाम के पुजारियों को भी शामिल किया जाएगा.

ये 51 मंदिर भी Chardham Shrine Management Board के दायरे में

तुंगनाथ व मक्कू में तुंगनाथ मंदिर, काली शिला में काली शिला मंदिर, यमुना जी मंदिर, शनि देव मंदिर, कुंडा शिला, व छोटे मंदिर, यमुनोत्री श्राइन समेत ग्राम खिरसाली में शनि महाराज मंदिर, बद्रीनाथ मंदिर धर्मशाीला सहित परिक्रमा, वसुधारा झरना के नीचे धर्मशिला व वसुधारा, श्री केदारनाथ मंदिर व संबंधित अधीनस्थ श्राइन व लघु मंदिर, बदरीनाथ पुरी में पंचशीला व पंच धारा, उर्गाम में ध्यान बदरी मंदिर, दारमी में नरसिंह मंदिर.

अभिमठ में वृद्धा बदरी मंदिर, चेन में सीता देवी मंदिर, ज्योतेश्वर में महादेव मंदिर, बख्ता वत्सल मंदिर, विष्णु प्रयाग में नारायण मंदिर, द्वारहाट अल्मोड़ा में लक्ष्मी नारायण मंदिर, उड़क कुंड, गुप्तकाशी मे विश्वनाथ जी मंदिर, विश्वनाथ जी मंदिर की सीमा पर लघु मंदिर, त्रिजुगी नारायण में नारायण मंदिर व उसकी सीमा के लघु मंदिर, गौरीकुंड में गौरी माई मंदिर.

पेन खंडा में श्री लक्ष्मी मंदिर, गरुड़ मूर्ति, हनुमान जी, घंटाकरण व अन्य छोटी मूर्तियां, बद्रीनाथ मंदिर और उसके परिसर में स्थित समस्त मंदिर जहां पूजा के लिए पट्टी, तल्ला, बद्रीनाथ का शंकराचार्य मंदिर, आदि केदारेश्वर मंदिर, बल्लभाचार्य मंदिर, तप्त कुंड, ब्रहम कपाल, बरानेत की शिला, परिक्रमा परिसर, माता मूरी मंदिर, पांडुकेश्वर में योग बदरी मंदिर, सुब्बाइन में भविष्य बदरी.

जोशीमठ के नरसिंह मंदिर, वासुदेव मंदिर, दुर्गामंदिर, राज व राजेश्वरी मंदिर, कुलसारी में लक्ष्मी नारायण मंदिर, ऊखीमठ के उषा मंदिर व बाराही मंदिर, मदमहेश्वर मंदिर, नंदप्रयाग में लक्ष्मी नारायण मंदिर, कालीमठ में महाकाली मंदिर व महासरस्वती मंदिर, टिहरी गढ़वाल में चंद्रबदनी मंदिर, देवप्रयाग में रघुनाथ मंदिर, मुखेम रमोली नागराजा मंदिर, चौरास श्रीनगर श्री राज राजेश्वरी मंदिर, गंगोत्री में मां गंगा मंदिर, गंगोत्री श्राइन के अधीन गौमुख उद्गम स्थल, गुड़सिर अल्मोड़ा में लक्ष्मी नारायण मंदिर.

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