हाथियों का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए नहीं किया जा सकता- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई है. जिसमे हाथियों को रिसॉर्ट मालिकों को वापस लौटाने को कहा गया था.
सुप्रीम कोर्ट, हाथियों का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए नहीं किया जा सकता- सुप्रीम कोर्ट

देहरादून. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में रिसॉर्ट मालिकों से जब्त हाथियों को वापस करने के आदेश पर रोक लगा दी है. रिसॉर्ट मालिक इन हाथियों का इस्तेमाल पर्यटकों के मनोरंजन के लिए किया करते थे. न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने पर्यावरण कार्यकर्ता गौरी मुलेखी की याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के 6 मार्च के आदेश को निलंबित कर दिया है.

याचिकाकर्ता गौरी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि हाथियों को वापस करने का आदेश वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 सहित अन्य कानूनों का उल्लंघन है. हाथियों का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, यह प्रावधानों के खिलाफ है. मुलेखी की तरफ से सीनियर अधिवक्ता वी गिरी वकालत कर रहे हैं. उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट का अगला आदेश आने तक प्रभावी नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है- हाथियों का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए नहीं किया जा सकता.

इससे पहले, पर्यावरण कार्यकर्ता मुलेखी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 28 फरवरी को मुख्य वन्यजीव वार्डन के आठ हाथियों को वापस सौंपने के आदेश को चुनौती दी थी.  इस आदेश के तहत हाथियों को रिसॉर्ट मालिकों को वापस लौटाना था.  हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दिया है. बता दें कि, गौरी मुलेखी हमेशा ही जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं.

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