VIDEO: मोबाइल चोरी पर लगेगी लगाम, अगले महीने लॉन्च हो सकती है ये टेक्नोलॉजी

अगर मोबाइल फोन से सिम कार्ड निकाल दिया जाता है या फिर उसका IMEI नंबर तक बदल दिया जाता है तो भी इस नई टेक्नोलॉजी से हैंडसेट को ट्रैक किया जा सकेगा.

नई दिल्ली: क्या कभी आपका स्मार्टफोन चोरी या गुम हुआ है? अगर हां, तो फिर आपने उसे ट्रैक करने की कोशिश भी ज़रूर की होगी. लेकिन फोन को वापस पाने की आपकी कोशिश नाकाम रही होगी.

जब तक फोन ऑन रहा होगा तब तक की लास्ट लोकेशन तो पता चल जाती होगी लेकिन उसके स्विच ऑफ होने के बाद की लोकेशन नहीं मिलती होगी और फिर आप हार मान कर नया फोन खरीदने को मजबूर हो जाते होंगे.

टेक्नोलॉजी से हैंडसेट को कर सकते हैं ट्रेक

लेकिन ऐसा अब और नहीं क्योंकि सरकार अगले महीने लॉन्च करने जा रही है एक ऐसी टेक्नोलॉजी जिसकी मदद से गुम हुए या चोरी हो गए मोबाइल हैंडसेट को आसानी से खोजा जा सकेगा. यहां तक कि अगर मोबाइल फोन से सिम कार्ड निकाल दिया जाता है या फिर उसका IMEI नंबर तक बदल दिया जाता है तो भी इस नई टेक्नोलॉजी से हैंडसेट को ट्रैक किया जा सकेगा.

सी-डॉट ने विकसित की टेक्नोलॉजी

इस टेक्नोलॉजी को सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स यानी सी-डॉट ने विकसित किया है और अगस्त में इसे लॉन्च किए जाने की उम्मीद है. टेलीकॉम विभाग ने जुलाई 2017 में C-DoT को मोबाइल ट्रैकिंग प्रोजेक्ट ‘Central Equipment Identity Register’ (CEIR)’ सौंपा था.

सरकार ने देश में Central Equipment Identity Register के सेटअप के लिए 15 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव रखा है, जो मोबाइल फोन की चोरी और नकली फोन के धंधे को कम करने के लिए काम करेगा.

ऐसे काम करेगी ये टेक्नोलॉजी

दूरसंचार विभाग एक Central Equipment Identity Register यानी CEIR को Implement करने जा रहा है जो सभी मोबाइल ऑपरेटर्स के IMEI Database को एक साथ कनेक्ट कर देगा.

कुल मिलाकर CEIR सभी Network Operators के लिए एक ऐसे Central System का काम करेगा जिस पर Blacklisted Mobile Terminal की जानकारी शेयर की जाएगी जिससे किसी एक नेटवर्क पर Blacklist किया गया मोबाइल हैंडसेट किसी भी दूसरे नेटवर्क पर काम नहीं करेगा.

भले ही उस हैंडसेट का SIM Card ही क्यों न बदल दिया जाए. यानी गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन से सिम कार्ड निकाले जाने या उसका IMEI नंबर बदल दिए जाने के बावजूद CEIR उस हैंडसेट की सारी सुविधा ब्लॉक कर देगा, चाहे वह डिवाइस किसी भी नेटवर्क पर चलाया जा रहा हो. उम्मीद की जा रही है कि इस Technology से उपभोक्ता हितों की भी सुरक्षा होगी और यह कानून लागू करने वाली एजेंसियों को कानूनी तरीके से मोबाइल पर होने वाले संवादों को ट्रैक करने की भी सुविधा देगी.