अक्षय कुमार ने कनाडा की नागरिकता पर सच बोला या झूठ? पूरी पड़ताल

अक्षय कुमार की नागरिकता पर आजकल ढेरों सवाल खड़े हो रहे हैं. अक्षय ने खूब सोर मचने के बाद खुद को कनाडा का मानद नागरिक बताया लेकिन उनकी बात में एक बड़ा झोल है. हमने एक पड़ताल करके दूध का दूध और पानी का पानी किया.
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सबकुछ ठीक ही चल रहा था लेकिन फिर अक्षय कुमार ने पीएम मोदी का नॉन पॉलिटिकल इंटरव्यू ले लिया. उस इंटरव्यू में किए गए सवाल-जवाबों का बारीक विश्लेषण खूब हुआ. पीएम मोदी ने जो कहा उस पर प्रतिक्रियाएं तो आई ही लेकिन उससे ज़्यादा चीरफाड़ अक्षय कुमार के सवालों, सवाल पूछने के तरीकों और उनकी नागरिकता के सच-झूठ पर हो गई.

दरअसल अक्षय कुमार हाल ही में देशभक्ति से प्रेरित फिल्में बनाने में जुटे रहे हैं. उससे फुर्सत पाते हैं तो सरकार की योजनाओं का प्रचार करनेवाली फिल्मों में लग जाते हैं. ऐसे में अक्षय पहले से ही लोगों के राडार पर थे. मुंबई में मतदान के दिन जब उनसे किसी ने वोट डालने के बारे में पूछा तो वो लाजवाब दिखे. बाद में खिलाड़ी कुमार ने ट्वीट करके सफाई दी-

अपने ट्वीट में अक्षय कुमार ने खुलकर माना कि उनके पास कनाडा का पासपोर्ट है. उन्होंने ये भी लिखा कि उस कनाडियन पासपोर्ट के होने से उन्होंने कभी इनकार भी नहीं किया, लेकिन एक बात थी जो उन्होंने नहीं लिखी. ये बात वो अक्सर दोहराते रहे हैं. फिर यहां क्यों नहीं दोहराई?

वो बात है नागरिकता के तरीके पर. दरअसल अक्षय कुमार सार्वजनिक मंचों पर कहते रहे हैं कि उन्हें कनाडा से मानद नागरिकता मिली है. वो ये भी कहते रहे कि उनकी मानद नागरिकता लोगों के लिए भी गर्व का विषय है. उनका कहना सही था. दरअसल मानद नागरिकता कोई देश किसी शख्स को सम्मान में देता है, लेकिन अक्षय कुमार ने ट्वीट में ये बात नहीं लिखी. आप जानते हैं क्यों?

क्योंकि संभवत:  अब तक वो अपनी नागरिकता को लेकर झूठ बोलते रहे. उन्हें जो मिली वो मानद नागरिकता नहीं थी.

कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो की वेबसाइट पर उन लोगों के नाम साफ-साफ लिखे हैं जिन्हें आज तक उनके देश ने ऐसी नागरिकता दी है. आप  इस और इस लिंक पर जाकर खुद देख सकते हैं कि कनाडा ने हाल ही में पाकिस्तानी बच्ची मलाला यूसुफज़ई को मानद नागरिकता प्रदान की है. उसके अलावा हंगरी में नाज़ियों से हजारों यहूदियों को बचानेवाले राओल वॉलेनबर्ग, रंगभेद की लड़ाई लड़नेवाले नेल्सन मंडेला, वर्तमान दलाई लामा, म्यांमार की प्रमुख आंग सान सू की (सम्मान वापस लिया जा चुका) और शियाओं की निज़ारी इस्माइली शाखा के 49वें इमाम आगा खां को ही ये सम्मान मिला है.

अक्षय के दावे के उलट उनका नाम मानद नागरिकता पानेवालों में कहीं नहीं दिखता. यूं भी ये सम्मान पाने के लिए कोई ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त किया जाना ज़रूरी है. अक्षय कुमार का खाताबही ऐसी कोई बड़ी कामयाबी तो नहीं ही दिखाता. एक और बात जानकारी में जोड़ते चलें कि मानद नागरिकता पानेवाले को पासपोर्ट नहीं दिया जाता और ना वो कनाडा के चुनावों में वोट ही दे सकता है.

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