विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: सुशांत हों या कोई आम आदमी, जानें क्यों बढ़ रहा सुसाइड का ग्राफ

दुनियाभर में चर्चित बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड मामले से लेकर कोरोना की मार झेल रहे कई मीडिल क्लास लोगों ने पिछले कुछ समय में सुसाइड किया है.

दुनियाभर में 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के रूप में देखा जाता है. इसे लोगों को खुदकुशी जैसे बड़े मुद्दे के प्रति जागरूक करने और इसे रोकने के मकसद से मनाया जाता है. भारत ही नहीं दुनियाभर में आज लोग ड्रिपेशन का शिकार हो रहे हैं. ऊपर से कोरोना महामारी के आने के बाद से डिप्रेशन और सुसाइड का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ा है.

दुनियाभर में चर्चित बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड मामले से लेकर कोरोना की मार झेल रहे कई मीडिल क्लास लोगों ने पिछले कुछ समय में सुसाइड किया है. ऐसे में इस कठिन समय में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उद्देश्य को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है.

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डरावने आंकड़े
डब्ल्यूएचओ द्वारा इकट्ठा किए गए सुसाइड डेटा के मुताबिक, हर साल 8 लाख लोगों की आत्महत्या के कारण मौत होती है. इसका मतलब है हर 40 सेकंड में एक मौत होना. यहीं नहीं हर साल करीब दो करोड़ लोग खुदकुशी करने का प्रयास करते हैं.

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क्या है सुसाइड की मुख्य वजह
सुसाइड की सबसे बड़ी वजह डिप्रेशन है, लेकिन डिप्रेशन के कई कारण हो सकते हैं. मौजूदा समय में कोई पारिवारिक समस्याओं के कारण सुसाइड कर रहा है, तो कोई काम ना मिलने के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठा रहा है. सुसाइड के मामले सिर्फ बड़ों के ही नहीं बल्कि बच्चों के भी सुनने में आते हैं. बहुत से बच्चे पढ़ाई के प्रेशर, एग्जाम और रैगिंग जैसी चीजों को बर्दाश्त नहीं कर पाते और सुसाइड कर लेते हैं. यही वजह है जिस कारण आज सुसाइड के मुद्दे पर बात करना और भी जरूरी हो जाता है.

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