अमेरिका में भारतीय मूल के 3 नागरिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, दोषी पाए गए तो होगी 10 साल की जेल

इन पर अमेरिका में H-1B वीजा के लिए नकली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी तरीके से लाभ लेने का आरोप है.

वॉशिंगटन: अमेरिका में भारतीय मूल के तीन कंसल्टेंट को वीजा फ्रॉड के मामले में आरोपी बनाया गया है. इन पर अमेरिका में H-1B वीजा के लिए नकली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी तरीके से लाभ लेने का आरोप है. अमेरिकी अदालत ने किशोर दत्तापुरम, कुमार अश्वपथी और संतोष गिरी को इस मामले में आरोपी माना है. पिछले हफ्ते गिरफ्तारी के बाद तीनों को जमानत दे दी गई थी.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, तीनों कंसल्टेंट सेंट क्लारा में एक फर्म का संचालन करते हैं. वे कैलिफोर्निया में सॉफ्टवेयर और तकनीकी कौशल से जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति करते हैं. आरोप है कि तीनों ने प्रतिद्वंद्वी कंपनी से आगे बढ़ने के लिए विदेशी कामगारों की तरफ से वीजा से संबंधित फर्जी आवेदनों का इस्तेमाल किया. बचाव पक्ष ने नैनोसिमैंटिक्स का इस्तेमाल करते हुए फर्जी आई-129 पिटीशन दाखिल की और कामगारों के लिए H-1B वीजा लिया और फिर उन्हें स्थानीय कंपनियों में प्लेसमेंट दिलाया. तीनों आरोपियों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

किसे मिलता है H-1B वीजा?

गौरतलब है कि H-1B वीजा पेशेवरों या हाई क्वालीफाइड लोगों को दिया जाने वाला गैर-आप्रवासी वीजा है. यह किसी कर्मचारी को अमेरिका में छह साल काम करने के लिए जारी होता है. अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है, जिनकी अमेरिका में कमी हो.

दोषी साबित हुए तो 10 साल की सजा

H-1B वीजा धोखाधड़ी का एक मामला 2018 में भी सामने आ चुका है, जिसमें एक भारतीय अमेरिकी व्यक्ति कावुरु को कैलिफोर्निया में गिरफ्तार किया गया था. ऐसे मामलों में वीजा धोखाधड़ी के आरोप साबित होने पर 10 साल की कैद और 2 लाख 50 हजार डॉलर का अधिकतम जुर्माने का प्रावधान है. इस मामले की पेशी डिस्ट्रिक्ट जज एडवर्ड जे. डेविला के सामने 13 मई होगी.